न्याय के लिए भटक रही है जफर की बेवा

पूरे राजस्थान का प्रशासन एक जैसा है, ऐसा नहीं है। राजसमंद इसके उलट नजर आया...

न्याय के लिए भटक रही है जफर की बेवा
Justice
हाइलाइट्स
  • संघ की प्रयोगशाला बनता राजस्थान-2

राजस्थान से लौटकर भारत शर्मा

नई दिल्ली। पूरे राजस्थान का प्रशासन एक जैसा है, ऐसा नहीं है। राजसमंद इसके उलट नजर आया। प्रशासन की मुस्तैदी के कारण एक तरफ जहां अफराजुल की हत्या के बाद फैलने वाली नफरत को तत्काल रोका गया, वहीं अप्रवासी मजदूरों में विश्वास कायम करने का काम भी प्रशासन ने किया। दूसरी तरफ प्रतापगढ़ में निगम कर्मचारियों के हाथों मारे गए जफर की बेवा आज भी न्याय के लिए भटक रही है।

राजसमंद के जिलाधिकारी पी सी बेरवाल और एसपी मनोज कुमार चौधरी काफी संवेदनशील हैं। अफराजुल की हत्या करने वाले शंभूलाल रैगर के बैंक अकाउंट में जब तमाम कट्टरपंथियों ने पैसा डाला, तो उसे तत्काल फ्रीज करा दिया गया। अधिकारी बताते हैं, ह्त्यारोपी मानसिक रुप से बीमार था, उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। असल में वह एक लड़की से प्रेम करता था, जो किसी बंगाली ठेकेदार के साथ कुछ समय के लिए बंगाल चली गई थी, पर बाद में वह वापस भी आ गई थी। इस घटना का रैगर के दिमाग पर असर पड़ा, अफराजुल उसी हिंसा का शिकार हुआ। इस घटना के बाद दहशत में आए प्रवासी मजदूरों के साथ भी आला अफसरों ने व्यक्तिगत बैठक कर उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिया।


राजस्थान में यह पहला मामला है, जिसमें मृतक को सरकार की तरफ से मुआवजा दिया गया। हालांकि दावा जफर को भी मुआवजा और उसके परिजन को रोजगार देने का किया जा रहा है, पर उनकी पत्नी रशीदा बी इससे इनकार करते हैं। जफर की हत्या नगर पालिका के कर्मचारियों ने उस समय की थी, जब उन्होंने खुले में शौच करने गई महिलाओं के फोटो खींचने से मना किया था। रशीदा बी ने बताया, उनकी दो बेटियां हैं, एक की शादी हो चुकी है, दूसरी 10वीं में पढ़ती है। उनके पति भाकपा माले के कार्यकर्ता थे, उन्होंने कई बार निगम प्रशासन से मांग की थी, कि गरीब बस्ती में रह रही इन महिलाओं के लिए सार्वजनिक शौचालय बनाया जाए, जिससे वे खुले में ना जाएं।

अधिकारियों ने उनकी मांग तो पूरी नहीं की, उल्टा खुले में जाने वाली महिलाओं को प्रताडित करने लगे। घटना के वक्त निगम आयुक्त भी थे, जिनका नाम एफआईआऱ में भी है। इस घटना को आठ माह हो चुके हैं, पर अभी ना तो किसी दोषी की गिरफ्तारी हुई है, ना ही सरकार की तरफ से कोई मदद मिली। उल्टा रशीदा बी को हर दिन धमकाया जाता है।

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