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 विचार में बड़ी शक्ति है
विचार में बड़ी शक्ति है

आम आदमी का जीवन कई आयामों में बंटा हुआ है। पहला है उसका शरीर। शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति। यह सब ठीक रहे तो आध्यात्मिक स्थिति ठीक रहती है।

देशबन्धु
2017-03-26 22:52:34
मानव जीवन का सच्चा लक्ष्य
मानव जीवन का सच्चा लक्ष्य

लक्ष्यहीन जीवन सदैव ही दु:खद जीवन होता है। मानव भौतिक शरीर में आते हैं बिना यह जाने कि क्यों, उनमें से अधिकांश जीवन जीते हैं,

देशबन्धु
2017-03-23 22:47:02
कृतज्ञता हमारी जीवन-नीति में घुल जाए
कृतज्ञता हमारी जीवन-नीति में घुल जाए

हमारी हंसी-खुशी और सुख-सुविधाएं स्वयं उपार्जित नहीं हैं; वे दूसरों के श्रम, सहयोग और अनुग्रह से मिली हैं।

देशबन्धु
2017-03-22 23:02:34
समय का सही नियोजन है जरूरी
समय का सही नियोजन है जरूरी

समय हमारे साथ हर पल रहता है, हर क्षण रहता है, इस समय को भूल जाते हैं, लेकिन समय हमें नहीं भूलता।

देशबन्धु
2017-03-21 23:48:10
विद्यार्थी का अर्थ न बदलें
विद्यार्थी का अर्थ न बदलें

आज का विश्व बड़े खतरनाक दौर से गुजर रहा है, मानव मन भारी तनावों से आक्रांत है। वह कू्ररता, घृणा, ईष्र्या के दावानल में झुलस रहा है।

देशबन्धु
2017-03-20 23:08:37
स्वास्थ्य सबसे बड़ी पूंजी
स्वास्थ्य सबसे बड़ी पूंजी

कहते हैं धन गया तो कुछ नहीं गया, स्वास्थ्य गया तो कुछ गया और चरित्र गया तो सब कुछ गया। अपने आपको स्वस्थ रखें यह हमारा पहला कर्तव्य है।

देशबन्धु
2017-03-19 23:21:24
संशयात्मा विनश्यति
संशयात्मा विनश्यति

जीवन में जब तक कुछ अनुभूति नहीं होती, तब तक साधना में लगे रहना चाहिए। साधना की नकारात्मक और सकारात्मक प्रवृत्ति होती है। कुछ भी हो जाये, हम साधना...

देशबन्धु
2017-03-16 22:32:06
आप कृतघ्न तो नहीं हैं
आप कृतघ्न तो नहीं हैं?

रमेशचन्द्र महरोत्रा : ‘चाणक्यसूत्रम्’ के एक सूत्र का भावार्थ है- उपकृत होने पर भी दुर्जन और शठ उपकार करने वाले के प्रति कृतघ्न रहकर उसे निश्चित ...

देशबन्धु
2017-03-15 22:47:29
प्यार ईश्वर की इबादत
प्यार ईश्वर की इबादत

सच्चा प्यार कभी बेकार नहीं जाता। वह कई गुना होकर हमारे पास लौटता है। प्यार एक अनुभूति है जो दुनिया को चला रही है। विश्व में कितने प्राणी हैं सबके...

देशबन्धु
2017-03-15 02:09:56
पुरुष की अंतिम गति पुरुषात् न परम् किंचित्।
पुरुष की अंतिम गति पुरुषात् न परम् किंचित्।

विश्व का रहस्य क्या है, सो हम कैसे जानें? इस सारे विश्व का जो अध्यक्ष है, वही शायद जानता होगा। वैदिक ऋषि कहते हैं, हम कैसे कहें कि वह भी जानता है...

देशबन्धु
2017-03-09 23:03:32
दृष्टिकोण बदलें और प्रसन्न रहें
दृष्टिकोण बदलें और प्रसन्न रहें

प्रसन्नता एक मनोभाव है, एक सकारात्मक मनोदशा है। हमारी जैसी मन:स्थिति होती है, वैसे ही हमारे शरीर में भौतिक-रासायनिक परिवर्तन घटित होते हैं।

देशबन्धु
2017-03-08 23:06:29
पर-निन्दा
पर-निन्दा

एक दिन एक परिचित घर आए। करीब घंटे-भर बैठे। मैंने नोट किया कि इस घंटे-भर में उन्होंने करीब दस व्यक्तियों की बुराई की।

देशबन्धु
2017-03-07 22:30:44
मानवता विकासमान हो
मानवता विकासमान हो

मनुष्य उभर रहे हैं, मनुष्यता दबती जा रही हैं उपधियां उभर रही हैं। चरित्र दब रहा है। क्रूरता उभर रही है, करुणा दब रही है। जानकारियां उभर रही है, प...

देशबन्धु
2017-03-06 23:09:42
बधाई धन्यवाद आभार एहसानमंद होना
बधाई, धन्यवाद, आभार, एहसानमंद होना

हम किसी की किसी भी उपलब्धि पर बधाई दे देते हैं या हम पर कोई एहसान किया गया हो तो आभार मानते हैं। एहसानमंद होते हैं,

देशबन्धु
2017-03-05 23:01:01
परमात्मा पर्याप्त है
परमात्मा पर्याप्त है

अनेकों तरह से अनेक सम्पत्तियों की खोज में बाहर भटका। ये मिलीं भी, लेकिन अन्त में उन्हें विपत्ति पाया। फिर स्वयं में, अपने ही अन्दर सम्पत्ति की खो...

देशबन्धु
2017-03-02 23:08:07
सब मन का ही खेल है
सब मन का ही खेल है

नारायण! नारायण! नारायण! एक रोगी बिस्तर में पड़ा पीड़ा से कराह रहा था। हाय। अब जीकर क्या करेंगे?

देशबन्धु
2017-03-01 22:48:38
गुणग्राहिता की नाप-जोख
गुणग्राहिता की नाप-जोख

हो सकता है कि आप कभी-कभी इस बात से निराश हो जाते हों कि आपके सद्गुणों का किसी-किसी व्यक्ति पर लेशमात्र भी प्रभाव नहीं पड़ता और आपकी अच्छी बातों क...

देशबन्धु
2017-02-14 04:00:40
व्यवस्था अनुशासन
व्यवस्था, अनुशासन

हर काम में व्यवस्था की जरूरत पड़ती है। अव्यवस्थित काम तो हमारे जीवन के साथ खिलवाड़ करता है। पर आदमी हमेशा व्यवस्था-अव्यवस्था के बीच जीता आया है।

देशबन्धु
2017-02-13 04:29:18