निमेष शुक्ला,पाण्डव नगर/
दारूल उलूम ने फ तवा जारी करके मुसलमानों से कहा है कि वे बाबा रामदेव के योग शिविर में जाने से बचें, क्योंकि शिविर वंदे मातरम के गायन से शुरू होता है। वंदे मातरम् के विरुद्घ फतवा जारी करने वाले कार्यक्रम को चार दिन पहले देवबंद में मुस्लिम उलेमाओं की बैठक में योग गुरु बाबा रामदेव ने प्राणायम करके दिखाया था। एक हिंदू पुजारी ने इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार भी किया था। लेकिन चार दिन बाद स्थिति बदल गई है। वंदे मातरम जैसे राष्ट्रभक्ति वाले गीत पर पाबंदी को नकारकर रामदेव बाबा सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उस कार्यक्रम में पधारे थे। आखिर उलेमाओं ने रामदेव की कौन सी सीख मान ली। रामदेव बाबा को क्या यह नहीं पता कि वंदे मातरम गाते हुए कई लोगों ने मातृभूमि को अपनी बलि चढ़ा चुके हैं। ऐसी हालात में उलेमाओं के कार्यक्रम में जाकर रामदेव ने हमारे शहीदों का अपमान किया है, जो अक्षम्य है। रामदेव बाबा को क्या लोग कम सम्मान देते हैं? योग गुरू को विचार कर कोई कदम उठाना चाहिए। उनके विरुद्घ फतवा जारी सुनकर उनके अनुयायियों की भावना आहत हुई है। कहा जा सकता है कि बाबाओं को भी अपनी संस्कृति से अधिक दिलचस्पी सस्ती लोकप्रियता में हो गई है। वंदे मातरम का विरोध धर्म और भारतीयता का विरोध है। आखिर रामदेव ऐसे कार्यक्रम में जाकर क्या संदेश देना चाहते है? अब उनके विरुद्घ भी फतवा जारी कर उलेमाओं की मानसिकता सामने आ गई है।