बॉलीवुड के साउंड इंजीनियर सतीश गुप्ता का कहना है कि हिंदी फिल्मों में साउंड इंजीनियर को कभी वाजिब श्रेय नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाले रसूल पोकुट्टी जैसे साउंड इंजीनियर इसके अपवाद कहे जा सकते हैं। 'भीगे होंठ तेरे' 'संदेशे आते हैं' और 'कहो ना प्यार है' जैसे गीतों को अपनी साउंड इंजीनियरिंग कला से जादुई स्पर्श दे चुके सतीश गुप्ता कहते हैं, ''साउंड इंजीनियर ही सपाट आवाज को खूबसूरत बनाता है और गीत के ठहराव और गति को नियंत्रित करता है लेकिन उसे उसके काम श्रेय मुश्किल से ही मिलता है।
''आमतौर पर यदि एक गाना हिट होता है तो सारा श्रेय संगीतकार और गीतकार को चला जाता है लेकिन बॉलीवुड में साउंड इंजीनियर के महत्वपूर्ण योगदान को कभी-कभार ही पहचान मिलती है।
गुप्ता ने कहा, ''पहले की अपेक्षा आज फिल्मों में तकनीक का बहुत ज्यादा उपयोग होता है। अब पहले की तरह विस्तृत आर्केस्ट्रा नहीं होते हैं क्योंकि प्रत्यक्ष रिकॉर्डिंग भी बहुत कम होती है। अब कैमरे के सामने सिर्फ होंठ हिलाए जाते हैं। वास्तविक काम स्टूडियो में होता है, जहां साउंड इंजीनियर गीतों में ठहराव और गति को नियंत्रित कर उन्हें विभिन्न रंग और प्रभाव देता है। वह गीत के लिए आवश्यक माहौल और भावनाओं की अनुभूति पैदा करता है। गुप्ता महसूस करते हैं कि उनकी कला एक प्रकार से अभियांत्रिकी है, जिसके लिए वह नवीनतम ऑडियो उपकरणों और कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर्स का उपयोग करते हैं। इसलिए वह एक रिकॉडिस्ट की जगह पर एक इंजीनियर कहलाना पसंद करते हैं।