अमिताभ अग्निहोत्री
लोकसभा के चुनावी महासमर के परिणाम से मिली नई हैसियत और ताकत के बाद अब आत्मविश्वास से भरी कांग्रेस का मिजाज भी बदला है। लालू प्रसाद और मुलायम सिंह जैसे चौथे मोर्चे के क्षत्रप अब उसके दरवाजे पर हैं, लेकिन पार्टी अब उन्हें सरकार में भागीदारी देने को इच्छुक नहीं है।
शरद पवार और ममता बनर्जी जैसे सहायोगियों का भी सुर बदला हुआ है और सब मनमोहन सरकार को बिना शर्त समर्थन देने का खुद-ब-खुद ऐलान कर रहे हैं। रविवार रात हुई पार्टी की सर्वोच्च नीति नियामक इकाई- कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद कांग्रेस का सामूहिक सुर अब यह है कि सरकार में केवल उन्हीं दलों को शामिल किया जाए, जो चुनावी समर में उसके साथ थे। 19 मई को पार्टी संसदीय दल की बैठक में मनमोहन सिंह को नेता चुनने की रस्म पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद मनमोहन सिंह एक बार फिर देश की कमान संभालेंगे।
उधर, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पिछले चौबीस घंटों में दो संविधानवेत्ताओं- सोली सोराबजी और अशोक देसाई से विचार -मंत्रणा की और अब राष्ट्रपति भवन से मनमोहन सिंह के नाम चिठठी आना भी महज एक औपचारिकता रह गई है। यूपीए के पास 263 की संख्या है। उसे अब महज नौ सांसदों की दरकार है। इसके लिए उसके सामने दस निर्दलीय हैं।
आज तीन सांसदों वाले जेडीएस के नेता कुमारस्वामी ने सरकार को समर्थन देने की इच्छा जताकर कांग्रेस की राह और आसान कर दी है। पांच सांसदों वाले रालोद के नेता अजीत सिंह भी कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में हैं। इस नाते अब बहुमत के लिए यूपीए को चौथे मोर्चे के समर्थन की जरूरत नहीं रही है। जहां तक मनमोहन सिंह की नई टीम का सवाल है, उसमें प्रणब मुखर्जी, पी चिदंबरम, एके एंटनी, कमलनाथ, कपिल सिब्बल, मीरा कुमार, गुलाम नवी आजाद और वीरप्पा मोइली को स्थान मिलना लगभग तय है।
राकांपा से शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल, नेशनल कान्फेंस से फारूख अब्दुल्ला और द्रमुक से टीआर बालु, ए राजा, दयानिधि मारन और करुणानिधि के पुत्र एमके अझगिरि और बेटी कणिमुझि सरकार में शामिल हो सकते हैं। 19 सांसदों वाली तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी को उनके समेत मंत्रिमंडल में चार से पांच स्थान मिल सकते हैं।
आज सुबह प्रधानमंत्री के त्यागपत्र की औपचारिकता के बाद शाम को यूपीए की बैठक होनी है। इस बैठक में ही नए मंत्रिमंडल का स्वरूप तय होने के संकेत हैं। आज पार्टी कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा - मंगलवार को पार्टी संसदीय दल की बैठक के बाद हम उन दलों के साथ बैठक करेंगे जो चुनाव में हमारे साथ थे। इसी बैठक में तय होगा कि नई सरकार में किसे शामिल किया जाए। हालांकि द्विवेदी ने पत्रकारों के साथ बातचीत में यह भी जोड़ा - आप जानते ही है कि चुनाव पूर्व गठबंधन का मतलब क्या होता है?

प्रधानमंत्री इस बार अपनी टीम को एक 'यंग लुक' भी देना चाहते हैं। इस नाते कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, संदीप दीक्षित और जतिन प्रसाद को मंत्री बनाए जाने की संभावना है। राहुल के लिए तीन मंत्रालय फिलहाल चर्चा में हैं- ग्रामीण रोजगार, युवा एवं खेल तथा सूचना एवं प्रसारण।
सत्ता के गलियारों में एक चर्चा और तेज है। संकेत है कि प्रधानमंत्री योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया को नए वित्तमंत्री के रूप में लाना चाहते हैं। अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस को अहलुवालिया को राज्यसभा से संसद में लाना होगा। यदि अहलुवालिया नए वित्तमंत्री के रूप आते हैं, तो प्रणब मुखर्जी, कमलनाथ, चिदंबरम और कपिल सिब्बल के मौजूदा विभागों में फेरबदल हो सकता है।
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