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Interviewee  :   शुभ्रा सक्सेना
Interviewer  :  पूनम सिंघल
Interview Date : 07,May,2009
 

देश की सर्वश्रेष्ठ परीक्षा में अव्वल स्थान प्राप्त करने वाली शुभ्रा सक्सेना की सफलता का राज है बड़ों का आशीर्वाद, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच। शुभ्रा पेशे से इंजीनियर हैं। बोकारो में कोल माइन के श्रमिकों के बच्चों की स्थिति को देखकर इतना विचलित हुईं कि उनके लिए कुछ कर गुजरने की चाह में देश की प्रशासनिक सेवा को चुना। इनका मानना है कि कड़ी मेहनत का कोई और विकल्प नहीं है। पेश है शुभ्रा सक्सेना से पूनम सिंघल की बातचीत के कुछ अंश:-

इससे पहले आप कितनी बार इस परीक्षा में भाग ले चुकी हैं?
इससे पहले मैंने एक बार परीक्षा में भाग लिया था। यह मेरा दूसरा चांस था जिसमें मैं सफल रही।

इस परीक्षा में आपका विषय क्या था?
इस परीक्षा में मेरा विषय पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन व साइकोलॉजी था।

 सफलता के रास्ते में किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
मेरा मानना है देश का दिल गांवों में बसता है और गांवों में रहने वाले लोगों की सेवा का जज्बा ही था जिसने 4 साल पहले शानदार सैलरी पैकेज वाली आईटी प्रोफेशनल की नौकरी छोडऩे के लिए मजबूर कर दिया। फिर शरू हुआ कड़ी मेहनत का दौर। पिछले साल इसी परीक्षा में सफलता तो मिली पर इंटरव्यू में पत्ता कट गया लेकिन दूसरे अटेम्प्ट में वो सब कुछ मिला जिसकी तमन्ना थी। इसके लिए मैंने अपनी नौकरी को अलविदा कह दिया था। न सिर्फ सिविल सर्विसेज में सेलेक्शन बल्कि आल इंडिया रैंक नंबर वन बनकर मैं बहुत खुश हूं।

इंजीनियर होते हुए देश की प्रशासनिक सेवा में जाने का निश्चय कैसे किया?
दरअसल हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब लोगों की दशा इतनी दयनीय है कि उनको देखकर मैं विचलित हो जाती हूं। कोयले की खान के आसपास खेलते गरीब बच्चों को देखकर मेरे मन में यह इच्छा जगी कि ऐसा कार्य किया जाए जिससे बच्चों का भला हो सके। इंजीनियर के रूप में काम करते हुए मैं अपने और अपने परिवार के लिए तो अच्छा कर सकती हूं लेकिन गरीबों के  लिए कार्य करने के लिए मैंने प्रशासनिक सेवा को चुना।

मूलरूप से आप कहां की रहने वाली हैं?
दरअसल, मैं बरेली की रहने वाली हूं। मेरे पिता जी अशोक चंद्र सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड (सीसीएल) बोकारो में अधिशासी अभियंता हैं। मैंने डीएवी पब्लिक स्कूल ढोरी, बोकारो से दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। केसीएम स्कूल, मुरादाबाद से इंटरमीडिएट करने के बाद आईआईटी रुड़की से बीटेक किया। इसके बाद दिल्ली से आईएएस की कोचिंग ली और दूसरे ही प्रयास में आईएएस की परीक्षा में टॉप किया।

आपकी सफलता में आपके परिवार का कितना सहयोग रहा?
मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व पति शशांक गुप्ता को देती हूं। मेरे शिक्षक मुकुल पाठक का सहयोग भी मेरे लिए अहम रहा। उनके सहयोग को जीवन भर नहीं भुला सकती। 

आपको आईएएस बनने के लिए किसने प्रेरित किया?
आईएएस बनने में मेरे पति शशांक ने मुझे काफी प्रोत्साहित किया। मेरे पति नोएडा स्थित सीएससी कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। मेरी सफलता में उनकी बहुत बड़ी भूमिका रही।

नौकरशाहों पर राजनीतिक हस्तक्षेप के बारे में आपका क्या मानना है?
राजनीतिज्ञों का काम नीतियां बनाना है और नौकरशाहों को उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में दोनों को मिलकर काम करना चाहिए।

आईएएस में विषयों का चयन किस आधार पर करना चाहिए?
मेरा मानना है कि आप उन्हीं विषयों का चयन करें जिनमें आप एक-दो वर्षों में परिश्रम करके महारत हासिल कर सकें। आप इन विषयों में लिखने और व्याख्या करने की काबलियत हासिल कर सकें जो दूसरा न कर सके।

देश की प्रशासनिक सेवा में आकर अब आप किन-किन क्षेत्रों पर काम करना चाहेंगी?
देश की प्रशासनिक सेवाओं के माध्यम से मैं ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करना चाहती हूं। तथा निचले वर्ग व पिछड़ी जातियों के लोगों के लिए काम करना चाहती हूं।

वर्तमान समय में महिलाओं की स्थिति के बारे में आपका क्या मानना है?
मेरा मानना है हमारे देश में महिलाओं की स्थिति में बहुत बड़े पैमाने पर सुधार आया है। आज की महिला पूरी तरह सशक्त है। लक्ष्य चाहे कोई भी हो मौजूदा समय में महिलाओं को पहले की तुलना में घर-परिवार, समाज का पूरा सहयोग मिलता है। और वह केवल अपना और अपने परिवार के लिए नहीं बल्कि समाज के बड़े वर्ग की स्थिति में सुधार लाने के लिए सक्षम है। 

आज आप देश की सबसे बड़ी परीक्षा में टॉप आई हैं, इससे पहले टॉपर को देखकर आपके जहन में क्या आता था?
 आज मैं बहुत खुश हूं। आज से पहले जब मैं टॉपर के बारे में सुनती थी तो मैं उनको देखकर काफी प्रोत्साहित होती थी। पिछली बार के टॉप करने वाले कई छात्र मेरे मित्र हैं। उनके साथ मिलकर पढ़ाई की योजना बनाती थी। अनेक मुद्दों पर विचार-विमर्श करती रही थी। मैं सिर्फ मेहनत में विश्वास रखती हूं। और मेरा मानना है कि जो भी मेहनत करता हैं सफलता उसके कदम अवश्य चूमती है।

परीक्षा परिणाम को लेकर आप कितनी आशान्वित थीं?
 मेरे मन में ऐसा ख्याल कभी नहीं आया कि मैं यह नहीं कर सकती। अपनी मेहनत व परीक्षा परिणाम को लेकर मैं काफी आशान्वित थी।

अन्य आईएएस एसपायरेंट को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
आईएएस की परीक्षा की जो युवा तैयारी कर रहे हैं वे निरंतर प्रयास करते रहें और हिम्मत न हारें। दृढ़ इच्छा शक्ति व अथक मेहनत करने वालों को एक न एक दिन सफलता जरूर मिलती है।


 
 
 
 
 
 
 
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