Interviewee : केविन केयर पुरस्कार से सम्मानित जमीर
Interviewer : केविन केयर पुरस्कार से सम्मानित जमीर
Interview Date :
05,March,2010
अहमदाबाद में रहने वाले युवा जमीर ढाले भले ही बहुसंवेदी विकलांगता से जूझ रहे हैं पर उनकी असाधारण उपलब्धियां औरों को प्रेरित करने के लिए काफी है। बधिर और नेत्रहीन लोगों के जीवन में उत्साह का संचार करने वाले जमीर ढाले की राय में समाज का एक बड़ा वर्ग विकलांगों को दया का पात्र मानता है। पर तन से अशक्त लोगों का जीवन अंधकारमय नहीं बल्कि अंधकार लोगों की सोच में शामिल है जो बात-बात पर उलाहना देने से नहीं चूकते। राजधानी के अवंति विहार में आयोजित बधिरान्धता पर राज्यस्तरीय सेमीनार में शामिल होने पहुंचे जमीर ने 'देशबन्धु' से खास मुलाकात में ये बातें कही। 0 सुना है कि आपने बालीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री रानी मुखर्जी को चर्चित फिल्म ब्लेक के लिए साइन भाषा का प्रशिक्षण दिया है? उनके साथ काम करना कैसा अनुभव रहा? 00 बालीवुड के अभिनेता अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री रानी मुखर्जी के साथ तीन माह मैंने काम किया। उन्हें फिल्म ब्लेक के लिए साइन भाषा में दक्ष किया। रही बात उनके साथ मिलने की तो जैसे और नये लोगों से मेरी मुलाकात होती रहती है वैसे ही अमित जी के साथ मिला। दोनों के साथ काम करने में कोई दिक्कत नहीं हुई। 0 बधिर और नेत्रहीन होना एक व्यक्ति के लिए त्रासदी भरा जीवन होता है आपने एक सामान्य जीवन जीने के लिए किस तरह का संघर्ष किया? 0 भले ही हम आपको देख व सुन नहीं पाते पर स्पर्श की अनुभूति से मन के भावों को पहचान जाते हैं। विषम परिस्थितियों में मेरे परिवार वालों ने मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कम्प्यूटर सीखा, अंग्रेजी भाषा सीखी। 13 वर्ष से परामर्शदाता के रूप में अहमदाबाद की संस्था से जुड़ा हूं। जीवन का एकमात्र लक्ष्य है कि अपने जैसे और लोगों का जीवन खुशहाल बनाऊं। अहमदाबाद से रायपुर तक का सफर मैंने अकेले ही पूरा किया। दुनिया में अच्छे लोग भी हैं इस बात को कभी ना भूलें। 0 छत्तीसगढ़ के संदर्भ में निशक्तजनों की स्थिति पर आपकी राय क्या है? 00 छत्तीसगढ़ में नि:शक्तजनों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिली है। मुंबई में यहां की अपेक्षा अच्छा काम हो रहा है। मीडिया सरकार को जगाए ताकि वो बधिरान्धता के संदर्भ में गंभीरता से सोचे। और ठोस योजना बनाकर कार्य करें। 0 क्या आपको सफर में या दैनिक कार्यकलाप में संवाद को लेकर परेशानी हुई? 00 समस्या तो कई तरह की आती है। जैसे मुझे अंग्रेजी की समझ है पर बोल नहीं सकता। रिक्शे में जाना है तो जरूरी नहीं कि रिक्शावाला अंग्रेजी समझे। हाथ में लिखे हुए अंग्रेजी के शब्द को पढ़ लेता हूं। कभी-कभी हम अपनी भावनाएं स्पर्श के माध्यम से कहना चाहते हैं पर लोग उसका अर्थ नहीं समझ पाते। इसके लिए स्कूलों में साइन लेंग्वेज सिखाई जानी चाहिए। 0 पारिवारिक स्थिति के बारे में बताएं? 00 दो वर्ष पूर्व मेरी शादी हुई है। पत्नी भी सामान्य है। एक छोटी बच्ची भी है। दोनों पूर्ण स्वस्थ्य हैं। मैं भी नौकरी करता हूं। मुझे भारत में बधिर और नेत्रहीन लोगों के साथ काम करने में आनंद आता है। मुझे आशा है कि सभी बधिर व नेत्रहीनों को अमरीका व अन्य देशों की तरह भारत में भी समान मान्यता दे । हमारे यहां भी उन्हें समान अवसर मिले। और वे स्वतंत्र होकर जीवन जीने में विश्वास रखे। 0 अपने जीवन से जुड़ी उपलब्धि के बारे में बताएं? 00 शुरू में मुंबई में काफी समय तक काम किया। बाद में अहमदाबाद की संस्था से जुड़ा। मेरी असाधारण उपलब्धि के लिए 13 फरवरी को केविन केयर योग्यता स्वामीत्व पुरस्कार से चेन्नई में सम्मानित किया गया। जमीर ढाले ने बताया कि राजस्थान के मुख्यमंत्री से भी वे मिले हैं। तमिलनाडू के राज्यमंत्री से भी चर्चा हुई। बस एक ही इच्छा है कि सामाजिक स्तर बधिरान्धों को प्रोत्साहित किया जाये। क्योंकि वे किसी बात में कम नहीं है।