Last Updated: 07:36:56 AM 17, Mar, 2010, Wednesday
साइन इन   संपर्क करें
खबरे लगातार 07:37:05 AM 17, Mar, 2010, Wednesday समाचार सेवाएँ डेस्कटॉप पर मोबाइल पर घर पर आर एस एस फीड
होम आज का अंक पिछले अंक      ब्लॉग्स
ताजा समाचार
    गांगुली से सुपर साबित हुए धोनी,नाइट राइडर्स का विजय रथ थमा    दो हजार की आबादी पर खुलेगा नया बैंक    इसरो में गोलीबारी के बाद 2 व्यक्तियों की तलाश     जयललिता के खिलाफ सुनवाई रुकी   
 आपका देशबन्धु
अन्य
कार्टून
इंटरव्यू
ई-पेपर
राशिफल
सहयोगी संस्थाएं
जनदर्शन
मायाराम सुरजन फ़ाउन्डेशन
देशबन्धु लाइब्रेरी
हाईवे चैनल
अक्षर पर्व
सेवाएँ
Jobs
Shopping
Matrimony
Web Hosting
Interview
Interviewee  :  छत्तीसगढ़ में आर्ट गैलरी नहीं, अजीब बात
Interviewer  :  चित्रकार व प्रोफेसर श्रीमती अंजनी रे
Interview Date : 09,February,2010
 

23 वर्षों से हैदराबाद के पंडित जवाहरलाल नेहरू फाइन आर्ट यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को फाइन आर्ट की शिक्षा दे रही सुप्रसिध्द चित्रकार व प्रोफेसर श्रीमती अंजनी रेड्डी ने कहा है- राज्य बनने के आठ वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ में आर्ट गैलरी न होना दुर्भाग्य की बात है। यहां के ट्राइवल कल्चर और रहन-सहन अपने आप में विशिष्ट होने के कारण लोगों की जिज्ञासा का केन्द्र है। प्रकृति के आसपास से खैरागढ़ में जैसा लोकेशन कलाकारों के लिए है वहां दिल्ली, मुंबई में ढूंढने से नहीं मिलता। अजीब बात है। इतना सब कुछ होने के बाद भी आपके यहां राज्य की कोई ऐसी यूनिवर्सिटी नहीं जो यहां के कलाकारों को प्लेटफार्म दे। छत्तीसगढ़ की राजधानी है रायपुर, यहां तो वो सब कुछ होना चाहिए।

राष्ट्रीय चित्रकला शिविर के सिलसिले में पहली बार रायपुर आईं श्रीमती रेड्डी ने 'देशबन्धु' के कला प्रतिनिधि के साथ खास बातचीत में इस आशय के विचार व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि आज का कलाकार ज्यादा संवेदनशील है। कला व संस्कृति के क्षेत्र में युवाओं का रूझान बढ़ा है। पढ़े-लिखे लोग कला का मर्म समझेंगे तभी तो माहौल बनेगा। खासकर के नई पीढ़ी रचनात्मक सोच के जरिये कुंठा, तनाव से मुक्त होकर काफी कुछ कर सकती है।

0 क्या कला की शिक्षा प्राथमिक कक्षाओं में दिया जाना चाहिए?

00 जी हां! प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों को चित्रकारी, कविताएं लिखना और प्रकृति को बूझने की ललक को नैसर्गिक रूप देकर पूरा करना चाहिए। पेरिस में मैंने देखा है कि वहां की टीचर बहुत छोटे बच्चे जो क्लास पीपी वन में पढ़ते हैं, उन्हें लेकर वो म्यूजियम की सैर कराने जाती हैं। सर्कस की पेंटिंग दिखाकर बच्चों से पूछा जाता है कि इसमें वे क्या पसंद करते हैं। उन्हें चित्र बनाने की पूरी छूट दी जाती है। जब विदेशों में शुरू से बच्चों को इस तरह की छूट दी जा सकती है तो हिन्दुस्तान में टोकाटोकी क्यों? यहां तो मां-बाप बात-बात में बच्चों को झिड़कते हैं। कभी टयूशन के नाम पर तो कभी अच्छे अंक लाने उन पर दबाव डाला जाता है। ये पागलपन नहीं तो और क्या है? भई बच्चों को हम नहीं समझेंगे तो और कौन समझेगा। हाल ही में प्रदर्शित फिल्म 'थ्री इडियट' में इसी बात को मनोरंजक रूप में दर्शाया गया है। सिर्फ विज्ञान और तकनीक से काम नहीं चलेगा। जब तक हमारे बच्चे यहां की कला व संस्कृति नहीं जानेंगे वे बड़े होकर अपनी बात कैसे रख पाएंगे।

 

उन्हें चित्र बनाने की पूरी छूट दी जाती है। जब विदेशों में शुरू से बच्चों को इस तरह की छूट दी जा सकती है तो हिन्दुस्तान में टोकाटोकी क्योंयहां तो मांबाप बातबात में बच्चों को झिड़कते हैं। कभी टयूशन के नाम पर तो कभी अच्छे अंक लाने उन पर दबाव डाला जाता है। ये पागलपन नहीं तो और क्या हैभई बच्चों को हम नहीं समझेंगे तो और कौन समझेगा। हाल ही में प्रदर्शित फिल्म थ्री इडियटमें इसी बात को मनोरंजक रूप में दर्शाया गया है। सिर्फ विज्ञान और तकनीक से काम नहीं चलेगा। जब तक हमारे बच्चे यहां की कला व संस्कृति नहीं जानेंगे वे बड़े होकर अपनी बात कैसे रख पाएंगे।

हैदराबाद में 6 आर्टस् कॉलेज है। एक सेंट्रल का 2 कॉलेज राज्य सरकार का और बाकी निजी संस्थाओं द्वारा संचालित है। वहां बहुत सी आर्ट गैलरी भी है, जहां कलाकार अपने हुनर का प्रदर्शन करने पहुंचते हैं। इसका फायदा वहां के लोगों को मिल रहा है।

चित्र बनाने की प्रेरणा कहां से मिली?

00 हैदराबाद से 6 मि.मी. दूर एक गांव है नंदी मंडी जहां मेरा बचपन बीता। वहां दसवीं शताब्दी का चालुक्य मंदिर है। इससे मुझे काफी प्रेरणा मिली। बचपन से शौक रहा। प्रकृति से प्रभावित होकर मैंने कई चित्र बनाए। इसके साथ ही नारी पात्र को लेकर मैंने अलग-अलग भावों को दर्शाने वाले चित्र बनाए हैं।

 


 
 
 
 
 
 
Home About us Sitemap /></td>
                <td width=Contact
Privacy Policy Terms & Conditions Disclaimer
Powered By: S W T G R O U P