टाटा संस की कमान से नोएल टाटा वंचित

डॉ. हनुमन्त यादव : टाटा संस नाम टाटा नामधारी पुत्र का मुखिया होना इंगित करता है। इस आधार पर स्वाभाविक रूप से 59 वर्षीय नोएल टाटा की टाटा संस के चेयरमैन पद पर नियुक्ति की अपेक्षा की जा रही थी ...

डॉ. हनुमंत यादव

डॉ. हनुमन्त यादव
टाटा संस नाम टाटा नामधारी पुत्र का मुखिया होना इंगित करता है। इस आधार पर स्वाभाविक रूप से 59 वर्षीय नोएल टाटा की टाटा संस के चेयरमैन पद पर नियुक्ति की अपेक्षा की जा रही थी किन्तु रतन टाटा की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने उक्त पद हेतु टीसीएस के सीईओ व प्रबंध संचालक पद पर 2009 से कार्यरत एन. चन्द्रशेखरन की घोषणा करके नोएल  टाटा को टाटा उद्योग समूह के मुखिया पद से वंचित कर दिया है। एन. चन्द्रशेखरन की नियुक्ति से टाटा संस के चेयरमैन पद पर गैर-पारसियों की नियुक्ति का नया  अध्याय प्रारम्भ हुआ है। वैसे तो टाटा समूह की अनेक कम्पनियों में दशकों से गैर-पारसी सीईओ तथा प्रबंध संचालक नियुक्त होते रहे हैं किन्तु 103 अरब डॉलर की नेटवर्थ वाले टाटा समूह के 150 साल के इतिहास में पहली बार गैर-पारसी की चेयरमैन पद पर नियुक्ति की जा रही  है। वैसे तो 2012 में भी टाटा संस के चेयरमैन पर टाटापुत्र की नियुक्ति नही की गई थी किन्तु उस समय नियुक्त साइरस मिस्त्री  पारसी व टाटा संस के बड़े शेयरधारक होने के साथ साथ नोएल टाटा की पत्नी अलू के भाई होने के कारण एक प्रकार से टाटा परिवार के अंग थे।
टाटा उद्योग समूह के मुखिया जेआरडी टाटा के कोई संतान नहीं थी इसलिए उन्होंने नवल टाटा के बड़े पुत्र रतन टाटा को गोद लिया था। टाटा उद्योग समूह में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए 1971 में वे नेल्को के संचालक बनाए गए। जेआरडी टाटा ने 1981 में उन्हें टाटा इंडस्ट्रीज का चेयरमैन तथा 1991 में टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया। टाटा संस के चेयरमैन बनने के बाद रतन टाटा उद्योग समूह की कम्पनियों में पेशेवर युवा प्रबंधकों के हाथों कमान सौंपने के इरादे से अनिवार्य सेवानिवृत्ति योजना प्रस्तुत की,  जिसके  तहत सीईओ तथा कार्यकारी चेयरमैन पद पर 65 साल तथा गैर-कार्यकारी चेयरमैन पद पर 75 साल की आयु पूरी हो जाने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। इस सेवानिवृत्ति योजना के लागू होने के बाद रूसी मोदी, एनए पालखीवाला, दरबारी  सेठ सरीखे आधे दर्जन दिग्गजों की 75 साल पूरे होने पर बिदाई हो गई। टाटा उद्योग समूह को पूर्णरूप से पेशेवर प्रबंधित समूह बनाने के लिए गैर-पारसी युवा भारतीय ही नहीं, विदेशी पेशेवर प्रबंधकों की भी प्रबंध संचालक पर नियुक्तियां की गईं। टाटा मोटर्स के सीईओ पद पर जर्मनी के गुन्टर बुस्चेक की नियुक्ति इसका ज्वलंत उदाहरण है।
साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद माना जा रहा था कि टाटा संस का चेयरमैन कोई टाटा पुत्र ही बनेगा। चूंकि रतन टाटा के छोटे भाई जिम्मी नोएल टाटा 76 साल पार कर चुके थे इसलिए सभी लोग उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा संस के चेयरमैन का स्वाभाविक उत्तराधिकारी मान रहे थे। 59 वर्षीय नोएल टाटा वर्तमान में  ट्रेंड तथा टाटा इंटरनेशनल के चेयरमैन के साथ-साथ अनेक टाटा समूह की कम्पनियों के संचालक मंडल के सदस्य भी हैं। उन्होंने ब्रिटेन से इकॉनामिक्स में बीए की डिग्री लेने के बाद फ्र्रांस से प्रबंधन का पाठयक्रम पूरा किया  है। अध्ययन पूरा करने के बाद से ही टाटा उद्योग समूह की कम्पनियों के प्रबंधन से जुड़े रहे हैं। 2012 में जब टाटा संस से रतन टाटा सेवानिवृत्त हुए थे, उस समय भी उनका नाम चेयरमैन पद के लिए चर्चा में था। साइरस मिस्त्री के टाटा संस के हटने के बाद नोएल टाटा को चेयरमैन पद से वंचित किए जाने को लेकर पारसी समुदाय व्यथित है। यही नहीं, भारतीय औद्योगिक घराने एवं उद्योग व्यवसाय जगत से जुड़े लोग भी इसको नोएल टाटा के साथ किया गया अन्याय बता रहे हैं।
सवाल उठता है कि क्या सचमुच ही नोएल टाटा में टाटा संस का चेयरमैन बनने की क्षमता नहीं है? नोएल टाटा के करीबी लोगों का कहना है कि टाटा उद्योग समूह में उन्हें जिस कम्पनी में जो भी जिम्मेदारी मिली उसे उन्होंने बखूबी निभाया है। नोएल के पिता नवल टाटा की पहली पत्नी से दो पुत्रों में बड़े पुत्र रतन को चूंकि टाटा उद्योग समूह के मुखिया जेआरडी टाटा ने गोद लेकर अपना उत्तराधिकारी बना दिया इसलिए उन्होंने आगे बढऩे के अवसर मिलते गए। किन्तु रतन से 3 साल छोटे दूसरे पुत्र जिम्मी को सीईओ या प्रबंध संचालक के रूप में कोई जिम्मेदारी नहीं  मिल पाई केवल वे टाटा समूह की कुछ कम्पनियों के बोर्ड की सदस्यता तक सीमित रहे। नवल टाटा की दूसरी पत्नी सिमोन के पुत्र नोएल को अपनी माता की उद्यमिता के कारण प्रबंधन सीखने का बहुत  अवसर मिला।
जेआरडी टाटा ने नवल टाटा को 1948 में टाटा ऑयल मिल्स का प्रबंध संचालक नियुक्ति किया। नवल टाटा ने टाटा ऑयल मिल्स के परम्परागत खाद्य तेल व हेयर ऑयल के साथ-साथ साबुन प्रारम्भ कर बाजार में हमाम व जय सरीखे ब्रांड साबुन नगरों एवं गांवों में लोकप्रिय बनाकर घर-घर पहुंचाया। टाटा ऑयल मिल प्रसाधन बाजार में मार्केट लीडर हिन्दुस्तान लीवर की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर चुनौती देने लगी थी। 1952 में प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने जेआरडी टाटा से कहा कि भारत में महिलाओं की आधुनिक सौंदर्य सामग्री बाजार विदेशी निर्माताओंं के विदेशी ब्रांडों से भरा हुआ है जिस कारण भारत को विदशी मुद्रा  बाहर जा रही है, इसलिए उन्होंने टाटा को महिला सौंदर्य सामग्री बनाने की सलाह दी। जेआरडी टाटा ने इसकी जिम्मेदारी नवल टाटा को सौंपी। नवल टाटा ने इस चुनौतीपूर्ण दायित्व की जिम्मेदारी सुश्री सिमोन को सौंपी। सुश्री सिमोन टाटा ने काफी सोच-विचार करके लक्मे ब्रंॉंड नाम से आधुनिक महिला सौंदर्य सामग्री बनाने का निर्णय लिया। टाटा ऑयल मिल्स की सहयोगी के रूप में लक्मे इंडिया स्थापित की गई। एफएमसीजी बाजार में लोक्िरप्रय बने रहने के लिए उत्पादन लागत से तीन-चार गुना विपणन पर खर्च करना पड़ता था। सिमोन टाटा ने दस साल के अन्दर ही लक्मे को लोकप्रिय बनाकर मार्केट लीडर पौंड्स की बराबरी में ला खड़ा किया।
1995 में जब टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा को साफ्टवेयर कम्पनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज को  विश्व स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए धन की जरूरत पड़ी तो उन्होंने नवल टाटा द्वारा संचालित कम्पनी टाटा ऑयल मिल्स व लक्मे तथा उसके लोकप्रिय ब्रांडों को हिन्दुस्तान लीवर को बेच दिया। नवल टाटा को हमाम, जय, मोती, सेन्डल साबुन व ओ.के. तथा सिमोन टाटा को लक्मे से उतना ही लगाव था जितना आज रतन टाटा को नैनो कार से है। किन्तु किसी ने भी रतन टाटा के निर्णय का विरोध नहीं किया। तब सुश्री सिमोन टाटा ने नई कम्पनी ट्रेंट इंटरनेशनल स्थापित करके खुदरा बाजार में कदम रखा तथा उन्हें सफलता मिली। 2005 में उनके पुत्र नोएल टाटा ने ट्रेंट के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाली। भारत के व्यवसायिक घरानों का मानना है कि एक कम्पनी के सीईओ या प्रबंध संचालक पद के लिए उसके उत्पाद के क्षेत्र की तकनीकी दक्षता व प्रबंधन कुशलता की जरूरत होती है। जबकि विविधिकृत उद्योग समूह के मुखिया के लिए पारिवारिक मूल्यों, हित व समस्त उद्योग समूह के व्यापक विकास हेतु कम्पनियों के सीईओ के प्रबंधन क्षमता जरूरी है। टीसीएस के एन. चन्द्रशेखरन की सीईओ के रूप में प्रतिभा के सभी कायल हैं किन्तु टाटा उद्योग समूह के विभिन्न कम्पनियों के बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्य कर चुके नोएल टाटा हर दृष्टि से टाटा संस के चेयरमैन पद के योग्य थे तथा उन्हें इस पद से वंचित करके उनसे साथ अन्याय किया गया है। टाटा संस के चेयरमैन पद पर अनिच्छा की प्रतिक्रिया व्यक्त करना उनकी महानता है।


 

देशबंधु से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.

डॉ. हनुमंत यादव के आलेख