प्रधानमंत्री के बयानों पर विवाद

नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद की शक्ति का अहसास तो है, लेकिन इस पद की गरिमा और मर्यादा का अहसास भी उन्हें होना चाहिए।...

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नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद की शक्ति का अहसास तो है, लेकिन इस पद की गरिमा और मर्यादा का अहसास भी उन्हें होना चाहिए। 70 साल के लोकतंत्र में संसद में पक्ष और विपक्ष हमेशा रहे हैं और दोनों के बीच वैचारिक मतभेद भी रहा है। हर  सरकार को अपने विरोधियों के वार सहने पड़े, आरोपों का जवाब देना पड़ा। कई बार ऐसे अवसर बने कि तीखी बहसों के कारण सदन की कार्रवाई स्थगित हुई, सांसदों ने बर्हिगमन किया। बल्कि पिछले कुछ वर्षों से तो संसद में काम कम हुआ, हंगामे अधिक हुए। कई बार सांसदों के अभद्र व्यवहार के कारण संसद की गरिमा को ठेस पहुंची। लेकिन शायद ही किसी प्रधानमंत्री के बयानों और भाषणों पर इतना विवाद हुआ हो, जितना मोदीजी के बयानों पर हो रहा है। वे सदन में बोलते भी हैं तो ऐसा लगता है मानो देश के प्रधानमंत्री नहीं, भाजपा के प्रधानमंत्री हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य विरोधियों की खिंचाई करना है, उन पर तंज कसना है और हिसाब चुकता करना है। मंगलवार को उन्होंने उत्तराखंड के भूकंप का जिक्र राहुल गांधी के भूकंप संबंधी बयान से जोडक़र किया। इस पर सदन में भाजपा सांसदों ने खूब ठहाके लगाए, लेकिन आम जनता को मजाक का यह तरीका पसंद नहींआया। सोशल मीडिया पर इसकी खूब आलोचना भी हुई। लोकसभा में ही उन्होंने आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान पर टिप्पणी की थी कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो चार्वाक के सिद्धांत पर चलते हैं, चार्वाक ने कहा था कर्ज लो और घी पियो, पर शायद भगवंत मान होते तो कुछ और ही पीने को कहते। नोटबंदी का फैसला सही बताने के लिए किसी सांसद की निजी जिंदगी का जिक्र सदन में करना और वह भी मखौल उड़ाने के लिए, यह व्यवहार क्या प्रधानमंत्री को शोभा देता है? अगर सांसद मान के कुछ खाने या पीने से संसद की मर्यादा भंग हो रही है या किसी कानून का उल्लंघन हो रहा है, तो उन पर नियमानुसार कार्रवाई करने का हक संसद के पास है, प्रधानमंत्री औपचारिक बयान में किसी पर निजी टिप्पणी नहींकर सकते। नरेन्द्र मोदी की टिप्पणी से आहत भगवंत मान ने लोकसभा अध्यक्षा सुमित्रा महाजन को एक पत्र दिया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री ने उनको लेकर जो टिप्पणी की थी उसे सदन की कार्रवाई से बाहर किया जाए। मंगलवार को लोकसभा में इस हंगामे के बाद बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यसभा में पूर्व प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह पर टिप्पणी की। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए श्री मोदी ने कहा, कि अभी एक किताब निकली है। उसका फोरवर्ड डॉक्टर साहब ने लिखा है। हमें लगा किताब उन्हीं की है। लेकिन किताब किसी और की थी और फोरवर्ड उनका था। उनके भाषण में भी मुझे ऐसा ही लगा कि शायद...। उनके इतना कहते ही विपक्ष ने इस पर हंगामा किया तो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो मैंने बोला नहीं, उसका अर्थ आप कैसे समझ गए? इसके आगे उन्होंने कहा, 35 साल तक इस देश में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जिसने आजादी के बाद आधा समय तक देश की अर्थव्यवस्था को देखा हो। लेकिन कितने घोटाले की बातें आईं। खासकर राजनेताओं के पास डॉक्टर साहब से बहुत कुछ सीखने जैसा है। इतना सब हुआ, उन पर एक दाग नहीं लगा। बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना, ये कला सिर्फ डॉक्टर साहब ही जानते हैं। नरेन्द्र मोदी के इस बयान से नाराज कांग्रेसी सांसदों ने सदन से वाकआउट किया और यह विवाद बाद में भी जारी रहा। प्रधानमंत्री बोलने की कला में माहिर हैं, कटाक्ष करना भी खूब जानते हैं। चुनावी सभाओं में यह सब स्वीकार्य होता है, लेकिन सदन में यह नहींहोना चाहिए। मोदीजी का कहना है कि इतने बड़े पद पर रहे व्यक्ति ने जब प्लंडर और लूट जैसे शब्द प्रयोग किए थे तो ये सोचना चाहिए था कि संविधान की मर्यादा क्या होती है। हम मर्यादा का आदर करते हैं। किसी भी रूप में पराजय स्वीकार ही नहीं करना, ये कब तक चलेगा?
गौरतलब है कि विगत सत्र में नोटबंदी के फैसले को गलत बताते हुए डा. मनमोहन सिंह ने नरेन्द्र मोदी को आड़े हाथों लिया था। तो क्या उस हमले का जवाब प्रधानमंत्री अब इस तरह से देंगे? और क्या संसद में जरूरी मुद्दों पर चर्चा की जगह इस तरह हिसाब चुकता करने का खेल चलेगा? मोहल्ले में दो गुटों के बीच प्रतिद्वंद्विता और शह-मात का खेल असल जीवन से लेकर फिल्मों तक खूब देखा गया है, लेकिन संसद मोहल्ला नहींहै, यह बात सभी राजनीतिक दलों को समझना चाहिए। डा.मनमोहन सिंह के फैसलों पर विवाद हो सकते हैं, आलोचना हो सकती है, लेकिन उन पर निजी तौर पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहींलगा है। ऐसे में उन पर रेनकोट पहन कर नहाना जैसी टिप्पणी अशोभनीय लगती है। जुमले इस्तेमाल करने में माहिर प्रधानमंत्री यह जुमला भी जानते होंगे कि किसी पर एक ऊंगली उठाने से बाकी तीन उंगलियां खुद पर उठती हैं।


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