राष्ट्रभक्त आरएसएस से जुड़े कुछ लोग राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त

एल.एस. हरदेनिया : भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित मध्यप्रदेश अनेक प्रकार के अपराधों का केन्द्र बन चुका है। अभी तक जो अपराध सामने आए थे उनसे देश की आन्तरिक स्थितियां प्रभावित होती थीं...

एल.एस. हरदेनिया

एल.एस. हरदेनिया
भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित मध्यप्रदेश अनेक प्रकार के अपराधों का केन्द्र बन चुका है। अभी तक जो अपराध सामने आए थे उनसे देश की आन्तरिक स्थितियां प्रभावित होती थीं परंतु हाल में एक ऐसे अपराधी माफिया का अस्तित्व पता लगा है जो राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलग्न था।
पिछले कई वर्षों से मध्यप्रदेश में इस तरह के अपराध हुए हैं जिनसे प्रशासन, शिक्षा, पर्यावरण आदि प्रभावित हुए हैं। देश का सबसे बड़ा घोटाला, जो व्यापमं के नाम से जाना जाता है, मध्यप्रदेश में हुआ। इस व्यापमं घोटाले ने प्रदेश को कितनी हानि पहुंचाई है इसका अंदाजा अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय से होता है। व्यापमं घोटालों में विभिन्न लोगों ने अनेक प्रकार के हथकंडे अपनाकर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के 634 एमबीबीएस छात्रों के प्रवेश को रद्द कर दिया है। इस फैसले से जहां यह बात सामने आई हैै कि कैसे लाखों रुपयों की हेराफेरी कर लोगों ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाया था वहीं 634 एमबीबीएस छात्रों का प्रवेश रद्द होने से प्रदेश में डॉक्टरों की कमी भी महसूस होगी। व्यापमं के तार बड़े-बड़े पूर्व मंत्रियों, नेताओं और अफसरों से जुड़े हुए हैं।
इसी तरह खनिज माफिया की गतिविधियों का केन्द्र भी मध्यप्रदेश है। एक समाचारपत्र ने बड़े अधिकारियों की ऐसी सूची प्रकाशित की है जिनका स्थानांतरण सिर्फ इसलिए कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने खनिज माफिया के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की थी। आए दिन खनिज माफिया में शामिल लोग प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के ऊपर हिंसक हमले भी करते हैं। इस तरह के हमलों में एक आईपीएस अधिकारी (नरेन्द्र कुमार सिंह) की हत्या भी हो चुकी है। अभी हाल में रेत माफिया में संलग्न 102 डंपर पकड़े गए, परंतु सुबह होते-होते उनमें से सिर्फ 68 ही बचे और बाकी को कौन ले गया, कैसे ले गया यह अभी तक पता नहीं लगा है। रेत माफिया के संदर्भ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के नजदीकी रिश्तेदारों पर भी आरोप लगे हैं। देश का सबसे बड़ा भ्रष्ट आईएएस अधिकारी (अरविंद जोशी) भी मध्यप्रदेश में पकड़ा गया था। इस अधिकारी के पास 300 करोड़ रुपयों की अवैध संपत्ति पाई गई थी। लोकायुक्त द्वारा डाले गए छापों में चपरासियों और बाबुओं के यहां भी करोड़ों रुपयों की गैरकानूनी संपत्ति पाई गई।
इन सब घटनाओं से तो देश की आंतरिक स्थितियां प्रभावित होती हैं परंतु अभी हाल में विदेशों के लिए जासूसी करने वाला एक बड़ा षडय़ंत्र उजागर हुआ है। मध्यप्रदेश की पुलिस ने इसे उजागर किया है।
अभी हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मध्यप्रदेश में लगातार पांच दिन बिताए। इस दरम्यान उन्होंने नैतिकता के अनेक उपदेश दिए। हिन्दुओं से संगठित होने का आह्वान किया। परंतु यह अनोखा संयोग था कि जिस दिन वे इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों की निंदा कर रहे थे और कह रहे थे कि यह संगठन निर्दोष लोगों को मारता है और यह दु:ख की बात है कि इस संगठन की गतिविधियों पर अभी तक नियंत्रण नहीं पाया जा सका है, ठीक उसी दिन मध्यप्रदेश एनटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (एटीएस) ने आईएसआई (पाकिस्तान की खुफिया एजेन्सी) को गुप्त सूचनाएं देने में संलग्न एक समूह को उजागर किया। यह समूह अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के बीच में संवाद की सुविधा दिए हुए था। यह संवाद कानून के अंतर्गत स्थापित चैनलों के द्वारा नहीं किया जाता था। इस तरह के काम में संलग्न एजेंट पाकिस्तान के पे-रोल (पैसा प्राप्त करते थे) पर थे। वे हमारे देश की गुप्त सैनिक गतिविधियों के बारे में सूचनाएं देते थे। इस राष्ट्रविरोधी समूह की दो विशेषताएं थीं, पहली यह कि इसमें सिर्फ हिन्दू लिप्त पाए गए और दूसरी यह कि इस समूह में कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जिनका संबंध संघ से जुड़े संगठनों से था।
पुलिस ने 40 सिम बॉक्स (चीन के बने हुए), 3000 सिम काड्र्स पकड़े। जो 11 लोग पकड़े गए उनमें एक प्रमुख भारतीय जनता पार्टी के नेता का नजदीकी रिश्तेदार है। ये सारी गिरफ्तारियां भोपाल, ग्वालियर और सतना में हुईं। इनके विरूद्ध देशद्रोह और देश के विरूद्ध युद्ध करने के आरोप लगाए गए हैं। एटीएस के प्रमुख संजीव सामी के अनुसार इस संबंध में और भी प्रमुख गिरफ्तारियां होने वाली हैं। ये लोग हमारे दुश्मन देशों से संबंध रखे हुए थे और उन्हें सभी प्रकार की गुप्त सूचनाएं देते थे। इनकी गतिविधियों से हमारे देश के टेलीकॉम उद्योग को भी भारी हानि हुई है। ये स्वयं को वरिष्ठ फौजी अधिकारी बताकर जम्मू-कश्मीर व अन्य स्थानों पर बात करते थे, वहां के सेना संबंधी स्थितियों की गुप्त सूचनाएं प्राप्त कर पाकिस्तान भेजते थे। एटीएस ने असाधारण परिश्रम कर इस राष्ट्रविरोधी षडय़ंत्र का खुलासा किया है। ज्यों ही यह षडय़ंत्र सामने आया, मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर आरोप लगाया कि इस समूह में जितेन्द्र सिंह यादव नाम का जो व्यक्ति पकड़ा गया है वह ग्वालियर के भारतीय जनता पार्टी के पार्षद का नजदीकी रिश्तेदार है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस व्यक्ति के कुछ रिश्तेदार केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से भी संबंधित हैं। उन्होंने मांग की कि इस बात की जांच की जाए कि जितेन्द्र सिंह ने प्रमुख भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की नजदीकी से कोई लाभ तो नहीं उठाया है।
इस समूह में शामिल कुछ ऐसे नाम भी उजागर हुए हैं जिनमें भाजपा और संघ से जुड़े संगठनों से संबंध हैं। ऐसा ही एक नाम आशीष सिंह का है। इस दरम्यान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने यह आरोप लगाया कि यह महत्वपूर्ण बात है कि इस राष्ट्रविरोधी समूह में एक भी मुसलमान शामिल नहीं है। इसके ठीक विपरीत भाजपा से जुड़े लोग इस राष्ट्रविरोधी गतिविधि में संलग्न थे। कांग्रेस की तरफ से कुछ फोटो भी जारी किए गए हैं। इनमें से एक फोटो धु्रव सक्सेना का है, जो भारतीय जनता युवा मोर्चा के इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी प्रकोष्ठ का संयोजक रहा है। इस तरह के फोटो में धु्रव सक्सेना मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भारतीय जनता पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और भोपाल जनता युवा मोर्चे के अध्यक्ष अंशुल तिवारी के साथ दिखाई दे रहे हैं। यद्यपि भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों का खंडन किया है और यह कहा है कि कौन कब किसके साथ फोटो में शामिल हो जाता है यह जानने का कोई तरीका नहीं है।
मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नंदकुमार चौहान ने यह दावा किया है कि मध्यप्रदेश की सरकार को यह श्रेय देना चाहिए कि उसने राष्ट्रविरोधी षडय़ंत्र का खुलासा किया है। उन्होंने यह कहा है कि धु्रव सक्सेना से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। इस संबंध में भाजपा की तरफ से कितना ही खंडन किया जाए परंतु वास्तविकता यह है कि उससे जुड़े हुए लोग इस षडय़ंत्र में शामिल हैं। यह अत्यधिक चिंता की बात है कि इस तरह के लोग सत्ताधारी पार्टी से जुड़े रहे परंतु न तो पुलिस को और ना ही पार्टी को इस बात की भनक तक लगी।


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