लोक लुभावन बजट की संभावनाएं

डॉ. हनुमन्त यादव कल 1 फरवरी को केन्द्रीय वित्तमंत्री अरूण जेटली आगामी वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए बजट प्रस्तुत करने जा रहे हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत चौथा बजट, दो मायनों में पुराने बजटों की लीक से हटकर...

डॉ. हनुमंत यादव

डॉ. हनुमन्त यादव
कल 1 फरवरी को केन्द्रीय वित्तमंत्री अरूण जेटली आगामी वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए बजट प्रस्तुत करने जा रहे हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत चौथा बजट, दो मायनों में पुराने बजटों की लीक से हटकर होगा । पहला, यह बजट फरवरी माह के अंतिम दिन की बजाय  फरवरी के पहले दिन प्रस्तुत किया जा रहा है । दूसरा, अब रेलमंत्री अलग से रेल बजट प्रस्तुत नहीं करेंगे बल्कि रेल बजट भी इस आम  बजट का हिस्सा होगा । इस प्रकार यह बजट नएपन के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है । अभी यह कहना संभव नहीं है कि आगे आने वाले सालों में इस बजट के साथ ही 1 फरवरी को बजट प्रस्तुत करने की परम्परा प्रारम्भ की जा रही है । यह इसलिए कि सरकार द्वारा गठित शंकर आचार्य समिति वित्त वर्ष में बदलाव की सिफारिश करती है और सरकार उसको स्वीकार कर लेती है तो अगले साल 2018-19 का बजट प्रस्तुत करने की तिथि बदल सकती है।   
वैसे तो हर वित्तमंत्री का लोक लुभावन बजट प्रस्तुत करने का प्रयास करता है । किन्तु अरूण जेटली पर दो कारणों से 2017-18 बजट के पूरी तरह लोक लुभावन बजट प्रस्तुत करने का दबाव रहेगा।  पहला कारण आर्थिक कारण है जो नोटबंदी से संबधित है। नोटबंदी द्वारा  काला धन निकालने सरकार का बहुप्रचारित अभियान खोदा पहाड़ निकली चुहिया  साबित हुआ  है। लोकलुभावन राहतकारी बजट द्वारा वित्तमंत्री हड़बड़ी में की गई नोटबंदी से आम नागरिकों को पहुंची तकलीफ  को विस्मृत करवाने का प्रयास करेंगे।
लोक लुभावन बजट प्रस्तुत किए जाने का दूसरा कारण राजनैतिक है। फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव वाले राज्यों  खासकर उत्तरप्रदेश के मतदाताओं को इस बजट से रिझाने का प्रयास किया जाएगा । यद्यपि चुनाव आयोग ने सरकार  को सलाह दी है कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं उन राज्यों से संबंधित घोषणाएं बजट में नहीं की जाय । किन्तु पूरे देश भर के लिए जिन नई लोकलुभावन घोषणाएं की जाएंगी, उनका इन राज्यों में भारी प्रचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नए साल के उद्बोधन में की जाने वाली लोकहितकारी योजनाओं की घोषणा तथा नवम्बर एवं दिसम्बर 2016 में किसानों के द्वारा लिए गए कर्ज माफी की योजना नोटबंदी से जनता को विस्मृत करवाने के साथ साथ विधानसभा के मतदाताओं को रिझाने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है । अब रेल बजट भी आम बजट के अंग के रूप में पेश किया जाएगा। चूंकि यात्री रेल भाडा बढ़ाने के लिए संसद की मंजूरी नहीं होती इसलिए यात्रा भाड़े में वृद्धि होगी तो वह विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद ही की जाएगी ।  
बजट का फोकस कृषि, सामाजिक क्षेत्र और लघु उद्योगों  पर होने की संभावना है । इस कारण  इन क्षेत्रों में राशि आबंटन में भारी वृद्धि की जा सकती है।  जिस प्रकार से पिछले लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बढ़चढ़ कर समर्थन किया था तथा जिस प्रकार से नीति आयोग द्वारा देशभर में युवाओं की भागीदारी करके युवा नीति बनाई गई है इसके मद्देनजर युवाओं के लिए इस बजट में बड़ा आबंटन प्राप्त हाने की संभावना है। ग्रामीण रोजगार योजना पर भी दुगुनी राशि आबंटित की जा सकती है। जहां एक ओर बजट में उक्त क्षेत्रों पर अधिक धनराशि व्यय होने की संभावना है, वहीं पर आयकर की छूट सीमा बढ़ाये जाना निश्चित है। चूंकि केन्द्र सरकार करदाताओं का दायरा बढ़ाना चाहती थी इसलिए पिछले बजट में आयकर से छूट की सीमा  यथावत रखी गई थी । 2017-18 के बजट में आयकर की छूट सीमा तीन लाख रुपए किया जाना तयशुदा माना जा रहा है । कार्पोरेट टैक्स 30 प्रतिशत से घटाकर 28 प्रतिशत किया जा सकता है। बैंकों में पांच साल के फिक्सड डिपाजिट की बजाय तीन साल की फिक्सड डिपाजिट पर छूट दी जा सकती है । उसी प्रकार आयकर की धारा 80 सी. के तहत विभिन्न निवेश और बचत पर भी छूट सीमा 3 लाख रुपए किए जाने तथा होमलोन  के ब्याज पर भी कर छूट सीमा  बढऩे की संभावना है । छोटे व्यापारियों के लिए वस्तु एवं सेवाकर कर मुक्त सीमा 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए की जाने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है ।
सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती लोक लुभावन योजनाओं के लिए राजस्व जुटाने की रहेगी । वित्तमंत्री का दावा है कि नोटबंदी से जीडीपी वृद्धिदर में गिरावट के अनुमान अल्पकालिक अवस्था है, न केवल चालू साल बल्कि अगले बजट साल में जीडीपी वृद्धि दर  7.5 प्रतिशत बनी रहेगी । वर्तमान औद्योगिक शिथिलता को देखते हुए  7.5 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर प्राप्त करना दूसरी प्रमुख चुनौती रहेगी । उच्च विकास दर प्राप्त करने के लिए अधोसंरचना क्षेत्र खासकर विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़़ाने के लिए अधोसंचना बजट में  कम से कम 20 प्रतिशत बजट वृद्धि जरूरी   है । स्टेट बैंक आफ  इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार नोट बंदी की वजह से निरस्त देनदारी के तौर पर 75,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद है । मैं एसबीआई रिसर्च के इस राजस्व प्राप्ति अनुमान से इत्तफ ाक नहीं रखता । मेरे अनुसार काला धन निकालने में  नोटबंदी फेल हुई है इस कारण से एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में अंकित  राजस्व का 10 प्रतिशत भी प्राप्त हो जाय तो बहुत बड़ी बात होगी ।
सरकार के लिए तीसरी बड़ी चुनौती जीडीपी  से लोक ऋण एवं राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा में रखने का लक्ष्य प्राप्त करने का है । वर्तमान परिस्थितियों में राजकोषीय घाटा को जीडीपी का 3 फीसदी तक सीमित रखना  बहुत कठिन है, क्योंकि विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वित्तमंत्री मतदाताओं को नाराज करने वाले कर राजस्व उपायोंं से परहेज करना चाहेंगे। कुल मिलाकर लोक लुभावन बजट एवं राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की सीमा में रखना इन दो विकल्पों में से लोक लुभावन बजट का विकल्प चुने जाने की अधिक संभावनाएं हैं। यदि लोक लुभावन बजट एवं राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की सीमा में रखने में वित्तमंत्री कामयाब होते हैं तो इसके लिए उनकी बाजीगरी को ही श्रेय जाएगा ।


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