हे श्रवण कुमार, इधर देखो

रेल टिकिट पर छूट का विकल्प देना वृद्ध यात्रियों का अपमान है। सरकार उन्हें हीन भावना से ग्रसित करना चाहती है...

हे श्रवण कुमार, इधर देखो
Old age
प्रभाकर चौबे

प्रभाकर चौबे

रेल टिकिट पर छूट का विकल्प देना वृद्ध यात्रियों का अपमान है। सरकार उन्हें हीन भावना से ग्रसित करना चाहती है। वृद्धों की सुविधाओं का ध्यान रखना क्या उपकार करना हुआ। भारत में ही नहीं, दुनिया भर में वृद्धजनों की सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता है। हम कोई अनोखे नहीं हैं। कोई वृद्ध ट्रेन में खड़ा हो तो युवा उसे अपने बाजू में बिठा लेते हैं- आप यहां बैठिए बाबा। हमारी यह सरकार वृद्धजनों को खड़ा रखना चाहती है। रेल किराया में छूट देकर सरकार कोई एहसान नहीं कर रही-यह उसका कर्तव्य है। सरकार बताए- श्वेतपत्र जारी करें और बताए कि वृद्ध नागरिकों की छूट समाप्त करने पर रेलवे की आय में कितना इजाफा होगा और रेल यात्रा में किस तरह सुधार जाएगा।

 

ए.सी. टिकिट पर लिखा जाने लगा है- 'क्या आप जानते हैं कि आपके किराए का 43 प्रतिशत देश के आम नागरिक वहन करते हैं’- मतलब वृद्धजनों को रेलवे यह याद दिलाता है। इसे याद दिलाने की क्या जरूरत- वृद्धजनों का कुछ भार आम नागरिक उठा रहे हों तो गलत क्या है। रेलवे चाहता है कि इस तरह अपमानित होते रहने से मुक्ति पाने वृद्धजन टिकिट में 50 प्रतिशत की छूट लेना छोड़ दें। जैसे घर में वृद्ध पिता से उसका पुत्र बार-बार कहे, याद दिलाए कि पिताजी आपकी दवा अब महंगी हो गई है। मतलब पिता दवा न ले। ताने सुनते-सुनते तंग आकर एक दिन उठे और वृद्धाश्रम में रहने चल दे। वृद्धों के प्रति यह सरकार कितनी क्रूर होती जा रही है।

ये क्या हो रहा है। ऐसे में श्रवण कुमार की याद हो आती है। साहेब, आपकी सारी सुविधाओं का पूरा भार आम जनता उठा रही है, आप छोड़िए। कहां हो श्रवण कुमार-आओ हम बुजुर्गों की रक्षा करने आओ श्रवण कुमार। बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करने वाले आदर्श पुत्र के रूप में तुम्हारा उदाहरण दिया जाता है।

हम भारतवासी माता-पिता की सेवा करनेवाले को श्रवण कुमार कहते हैं-आज्ञाकारी पुत्र को आज का श्रवण कुमार कहकर पुकारते हैं। तुमने अपने वृद्ध माता-पिता को कांवर में बिठाकर तीर्थ यात्रा के रूप में ले जाने की कठोर व्रत धारण किया था- यह उदाहरण हमारे देश की पाठ्यपुस्तकों में होना अनिवार्य है। लेकिन आज तो वृद्धजनों को दी गई कुछ सुविधाएं ये सरकार वापस ले रही है। ये तो ऐसा ही हुआ कि वृद्ध माता-पिता को तीर्थ यात्रा में अधिक भार पड़ रहा है कह कर बीच रास्ते में कांवर से उतार देना मतलब श्रवण कुमार तुमने वृद्ध माता-पिता से यह तो कहा नहीं कि हे माता-पिता आप दोनों का भार हम पर ज्यादा पड़ रहा है अत: कांवर से उतर जाओ या हमारा भार कम करो।

आज रेल मंत्रालय यही कह रहा है श्रवण कुमार। तुम सुनो हमारी पुकार। यहां वृद्धजनों को रेल मंत्रालय ने यात्रा में टिकिट रेट में पचास प्रतिशत की छूट दी है। अब रेल मंत्रालय यह विचार कर रहा है कि वृद्धजन यह सुविधा त्यागे। रेलवे पर भार पड़ रहा है। इतना खर्च रेलवे वहन नहीं कर पा रहा। हे श्रवण कुमार क्या ऐसा होता है? क्या ऐसा करना चाहिए? अभी भाजपा सरकार के रेल मंत्रालय ने एक नया लफड़ा शुरू किया है वह यह कि वृद्धों को छूट दी जाती है उनकी टिकट पर छूट छोड़ने का विकल्प गुदा होता है कि हे वृद्ध पुरुष-हे आदरणीया वृद्ध महिला! तुम्हें जो टिकिट में रियायत दी जा रही है, वह इतनी है- ध्यान रखो। हे श्रवण कुमार क्या कभी तुमने अपने वृद्ध माता-पिता से कहा था कि हे वृद्ध माता-पिता! मैं आप लोगों का इतना भार उठा रहा हूं-आप दोनों का इतना वजन है।

ये श्रवण कुमार आप पुन: धरती पर अवतरित हों। रेल मंत्रालय जाएं! श्री प्रभुजी इस समय रेलमंत्री हैं। वे रेल मंत्रालय में मिल जाएंगे- दिन रात वहां रहते हैं। अगर कोई यात्री रास्ते में उन्हें ट्वीट करता है कि बच्चे को दूध चाहिए तो रेलगाड़ी में ही अगले स्टापेज पर दूध मिल जाता है। कोई कहे कि ठंड लग रही है तो उसे अगले स्टेशन पर कंबल मुहैया करा दिया जाता है। इतने संवेदनशील हैं रेल मंत्री, रोज ही उनकी संवेदनशीलता के किस्से मीडिया में आते हैं। इतने संवेदनशील रेल मंत्री श्री प्रभु वृद्ध यात्रियों पर क्यों दया नहीं कर रहे। उनको दी जा रही छूट वापस मांग रहे।


क्या रेलवे इतना गरीब हो गया है। और कब से गरीब हुआ- 70 साल से? ये 70 साल रटते मिल जाएंगे। हे श्रवण कुमार आप जैसे ही रेल मंत्रालय में उपस्थित होंगे और रेल मंत्री श्री प्रभु जी से कहेंगे कि 'मैं श्रवण कुमार’ वे तुरंत सारी कथा समझ जाएंगे। आपकी मातृ-पितृ भक्ति के गुण गाने लगेंगे। बहरहाल हे श्रवण कुमार, आप उन्हें कहना कि वृद्धजनों को दी जा रही छूट जारी रखी जाए। बड़ी महंगाई है श्रवण कुमार जी... रेल यात्रा में छूट मिल रही है तो हम वृद्ध कुछ यात्राएं कर ले रहे। हे श्रवण कुमार हमें पढ़ाया जाता रहा है कि श्रवण कुमार अपने वृद्ध माता-पिता को कांवर में लेकर तीर्थ यात्रा कराने जा रहे थे। एक जगह पानी लेने गए तो राजा दशरथ ने शब्दभेदी बाण चलाया और श्रवण कुमार की मृत्यु हो गई- यह भी पढ़ा है कि राजा दशरथ ने समझा कि कोई जानवर पानी पी रहा है अत: तीर चलाया। अपने पुत्र श्रवण कुमार की मृत्यु पर वृद्ध माता-पिता खूब रोये। राजा दशरथ को श्राप दिया। हे श्रवण कुमार यह लोकतंत्र है और श्राप काम नहीं आता- वोट काम आता है। रेलवे ने वृद्धजनों को कष्ट पहुंचाया तो वृद्धजन वोट का प्रयोग का दंड दे सकते हैं।

अब आगे बढ़ें। सोशल मीडिया में आ रहा है कि रेलवे वृद्धजनों की टिकिट पर ऐसा लिख रहा है कि आपको टिकिट में इतनी छूट मिली है। वैसे यह भी कह रहे हैं लोग कि रेलवे वृद्धजनों से सब्सिडी छोड़ने कहेगा- मतलब रिक्वेस्ट करेगा। पहले ही गैस सिलेंडर पर छूट छोड़ने का रिक्वेस्ट इस सरकार ने किया- बाद में आंकड़े दिए कि सरकार की रिक्वेस्ट पर 'इतने लाख’ लोगों ने सब्सिडी छोड़ी। बाद में कुछ ने आकड़े दिए कि जिन्होंने छोड़ी थी उनमें से 80 प्रतिशत पुन: छूट लेने लगे। इस सरकार की चाल-ढाल देखकर सोचा हो कि क्यों छोड़ें सब्सिडी। लेकिन ये कौन अपनी सब्सिडी नहीं छोड़ रहे। साल में मुफ्त हवाई यात्रा का लाभ ले रहे। वेतन जब चाहे तब अपना वेतन-भत्ता बढ़ा लेते हैं। छूट केवल गरीब ही छोड़े। सत्ता में बैठे लोग तमाम सुविधाएं लेते रहें। एक समय इनकी कैंटीन में किस दर पर इन्हें भोजन मिलता है, कितना कम रेट- इस पर कई माह जम कर चर्चा हुई थी। बहरहाल रेल अगर घाटे में चल रहा है तो क्या वृद्ध नागरिक को दी जा रही छूट के कारण घाटे पर चल रहा है। छूट खत्म हो तो क्या घाटा न हो? वृद्धों पर ही नज़र क्यों?

आज वृद्धों को रेल टिकिट में रियायत दी जा रही है। अंग्रेजों के समय भी पांच साल तक के बच्चों की टिकिट नहीं लगती थी और 5 से 12 साल तक के बच्चों की हाफ टिकिट लगती थी। अंग्रेजों की रेल कम्पनियां भी उदार रहीं। उन्होंने बच्चों को छूट व हाफ टिकिट की छूट छोड़ने रिक्वेस्ट नहीं किया। वैसे कितने प्रतिशत वृद्धजन रेल यात्रा करते हैं। बहरहाल वृद्धों को छूट देकर सरकार कोई उपकार कर रही है क्या? सरकार कोई दान में छूट दे रही है क्या?

रेल टिकिट पर छूट का विकल्प देना वृद्धयात्रियों का अपमान है। सरकार उन्हें हीनभावना से ग्रसित करना चाहती है। वृद्धों की सुविधाओं का ध्यान रखना क्या उपकार करना हुआ। भारत में ही नहीं, दुनिया भर में वृद्धजनों की सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता है। हम कोई अनोखे नहीं हैं। कोई वृद्ध ट्रेन में खड़ा हो तो युवा उसे अपने बाजू में बिठा लेते हैं- आप यहां बैठिए बाबा। हमारी यह सरकार वृद्धजनों को खड़ा रखना चाहती है। रेल किराया में छूट देकर सरकार कोई एहसान नहीं कर रही-यह उसका कर्तव्य है। सरकार बताए- श्वेतपत्र जारी करें और बताए कि वृद्ध नागरिकों की छूट समाप्त करने पर रेलवे की आय में कितना इजाफा होगा और रेल यात्रा में किस तरह सुधार आ जाएगा।

वृद्धजन रेल किराया में मिल रही छूट क्यों वापस करें। क्यों ले? जीवन भर कमाने वाले वृद्ध होने पर कुछ सहूलियत पा रहे तो सरकार को खटक रहा। यह सरकार जनविरोधी नीतियां कार्यक्रम चला रही। तमाम जनहितैषी योजनाएं खत्म कर रही या उनमें कटौती कर रही। शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने का उपक्रम चल रहा। शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं महंगी हो रहीं और स्मार्ट कार्ड निजी क्षेत्र में कमाई का जरिया बना दिया गया।

मजेदार बात यह कि रेल मंत्रालय वृद्धजनों से रियायत छोड़ने की अपील करे शायद। क्या बात है? सरकार रेल्वे स्टेशनों को बेचे, धंधा करे और वृद्धजनों से रेलटिकिट में मिल रही छूट छोड़ने कहे। यह भी ध्यान देनेवाली बात है कि व्यवस्था सत्ता से जुड़े, उसके करीब हो चुके लोग तो अब हवाई यात्रा ही करते हैं- जहां हवाई उड़ानें नहीं हैं, उधर ही ट्रेन से सफर करते हैं, अन्यथा प्लेन से ही आते-जाते हैं। जो प्लेन से नहीं आ-जा सकते ऐसे वृद्धों से कहा जा रहा है कि रेलवे टिकिट में दी जा रही छूट का परित्याग करें। त्याग केवल आमजन के हिस्से बड़ों के हिस्से 'मौज’- इसे ही कहते हैं 'पर उपदेश कुशल बहुतेरे...।’ सत्ता के पास वाले अपनी सुविधाएं छोड़ें- वृद्धजन छोड़ देंगे रियायत। वे रहें फ्ेलट में- बिना सुरक्षा निकलें बाहर। सत्ता के वृत्त में घूमनेवालों में से किसी का पुत्र-पुत्री, रिश्तेदार नौकरी खोज रहा है क्या? सबको फिट कर देते हैं। कर रहे हैं।

सफाई ठेका से लेकर तमाम ठेका किन्हें मिल रहे। सत्ता, व्यवस्था के साथ जुड़े लोग सारी सुविधाएं लें, बाकी गैर-पहुंच वाले सामान्य आय वर्ग के वृद्ध रेल टिकिट में मिल रही छूट तक न लें। यह छूट सत्ता में बैठे लोगों की आंखों में गड़ रही है। हमारे सत्ताधीशों को श्रवण कुमार की कथा पुन: सुनाई जानी चाहिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट लाभ कमाने नहीं होते- सरकार सब्सिडी देगी। दुनिया भर में यह है। सरकारी स्कूल, अस्पताल क्या लाभ कमाने होते हैं।

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