जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट की संभावना

डॉ. हनुमन्त यादव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ ने गत सप्ताह वल्र्ड इकानामिक आउटलुक 2017 में दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं की सालाना समीक्षा में भारत की 2016-17 की जीडीपी वृद्धि दर का पूर्वानुमान 7.6 ...

डॉ. हनुमंत यादव

डॉ. हनुमन्त यादव
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ ने  गत सप्ताह वल्र्ड इकानामिक आउटलुक 2017 में दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं की सालाना समीक्षा में भारत की 2016-17 की जीडीपी वृद्धि दर  का पूर्वानुमान 7.6 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ के अनुसार भारत में नोटबंदी के कारण बाजार में लेन-देन के लिए नकदी की भारी कमी होने से व्यवसाय में आई बाधाओं के कारण उत्पादन में भी गिरावट आई। आईएमएफ के अनुसार नकदी की पूर्ति बढ़ाए जाने के बावजूद 8 अक्टूबर, 2016 को की गई नोटबंदी का असर अगले वित्तीय साल 2017-18 की आर्थिक विकास दर पर पडऩे वाला है इसलिए उसने 2017-18 के लिए पूर्वानुमान 7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। नकदी की कमी दूर होने पर अच्छे मानसून तथा खनिज तेल की कीमतों में गिरावट होने पर 2018-19 में भारत की आर्थिक विकास दर 8.0 प्रतिशत सालाना होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। 2016-17 की भारत की आर्थिक विकास दर चीन की विकास दर 6.9 प्रतिशत से भी नीचे रहने का अनुमान है। आईएमएफ का भारत की विकास दर का 2016-17 के लिए 6.6 प्रतिशत का अनुमान, विश्व बैंक के 7.0 प्रतिशत के अनुमान की तुलना में निराशाजनक है किन्तु वह जमीनी सत्यता के अधिक करीब है।
भारत सरकार द्वारा 8 नवंबर, 2016 को की गई नोटबंदी के बाद से ही नकदी की कमी के कारण बाजार में लेन-देन की कमी से  व्यवसाय में हुई गिरावट को देखते हुए सरकार ने भी 2016-17 की अक्टूबर-दिसम्बर तिमाही में आर्थिक विकास दर में गिरावट की बात तयशुदा मान ली थी। कुछ व्यवसायिक संगठनों व अर्थशास्त्रियों का कहना था कि जनवरी-मार्च 2017 की तिमाही में भी बाजार में नकदी की कमी के कारण आर्थिक विकास दर 7.0 प्रतिशत से नीची जा सकती है । लेकिन 8 नवम्बर, 2016 को  बहुत कम लोगों को अनुमान रहा होगा कि भारत की सकल उत्पादन दर जीडीपी 7.0 प्रतिशत से भी नीची चली जाएगी। जाने-माने वाले अर्थशास्त्रियों में  मोंटेकसिंह अहलुवालिया पहले अर्थशास्त्री थे जिन्होंने 18 नवम्बर को एक साक्षात्कार में नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था में आनेवाले धीमापन के कारण जीडीपी विकास दर गिरकर 5.0  से 6.0  प्रतिशत के बीच में रहने की बात कही थी। डॉ. अहलुवालिया का कहना था अनौपचारिक क्षेत्र पर नकदी की कमी का ज्यादा बुरा असर पड़ेगा  तथा रोजगार में गिरावट आएगी।
इंटरनेशनल क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में फिच पहली एजेंसी थी जिसने 8 दिसम्बर को अपनी आर्थिक समीक्षा में भारत में नोटबंदी से उपजे आर्थिक संकट के कारण आर्थिक विकास दर का 2016-17 का पूर्वानुमान 7.4 प्रतिशत घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया था। फिच का कहना था कि औद्योगिक परिदृश्य  निराशाजनक होने के कारण निर्यात व निवेश दोनों घटने की संभावनाएं हंै। फिच के बाद तो मोर्गन स्टेनली, स्टैंडर्ड एंड पुअर, आदि एजेंसियों ने भी विकास दर के पूर्वानुमान में कटौती की। भारतीय रिजर्व बैक ने 8 दिसंबर, 2016 को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में 2016-17 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया। रिजर्व बैंक ने स्वीकार किया कि अनौपचारिक क्षेत्र व पहले से ही शिथिलता में चल रहे औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन में नोटबंदी के कारण गिरावट आने से जीडीपी में 0.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी।
जाने-माने अर्थशास्त्रियों में विश्व बंैक के सलाहकार कौशिक बसु दूसरे अर्थशास्त्री थे जिन्होंने नोटबंदी से आम जनता को होने वाली तकलीफों के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में भी गिरावट की बात कही। डॉ. बसु रिजर्व बैंक के 2016-17 के 7.1 प्रतिशत इकानामिक ग्रोथ रेट के अनुमान से सहमत नहीं थे,  उन्होंने 18 दिसम्बर को एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में आर्थिक विकास दर गिरकर 7.0 प्रतिशत से नीचे 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया। उनका कहना था कि कृषि तथा अनौपचारिक क्षेत्र इस नोटबंदी से बुरी तरह प्रभावित होने वाला है। डॉ. कौशिक बसु का कहना था कि सरकार ने कालाधन के नाम पर बाजार में नकदी का संकट निर्मित करके आर्थिक विकास की गति धीमी कर दी।
11 जनवरी को जारी ग्लोबल इकानामिक प्रॉस्पेक्ट्स 2017 में विश्व बैंक ने भारत की 2016-17 की आर्थिक विकास दर का अपना पूर्वानुमान  7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.0 प्रतिशत कर दिया। विश्व बैंक ने विकास दर में कटौती का कारण भारत में नोटबंदी के कारण सकल उत्पादन में आई गिरावट को बताया। भारत सरकार के केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन सीएसएसओ ने 2016-17 के लिए आर्थिक विकास दर का प्रथम अनुमान 7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.1 प्रतिशत व्यक्त किया। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने 31 जनवरी  को संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2016-17 में नोटबंदी से उत्पन्न नकदी के संकट को ध्यान में रखते हुए आर्थिक विकास दर का अनुमान 7.6 प्रतिशत की बजाय 6.75 से 7.5 प्रतिशत के बीच रहने की बात कही है।
8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कालाधन निकालने के लिए 500 रुपए तथा 2000 रुपए के नोटों के विमुद्रीकरण के ऐलान का अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ, विश्व बैंक, भारत के व्यवसायिक संगठनों, अर्थशास्त्रियों तथा अन्य बुद्धिजीवियों ने स्वागत किया था। इन सभी को भरोसा था कि नोटबंदी सोच समझकर एक फुलप्रूफ योजना के तहत की जा रही है तथा आम जनता को तकलीफ दिए बिना कालेधन की निकासी कार्रवाई जाएगी। कालेधन की निकासी से सरकार का अक्टूबर-दिसंबर 2016 की तिमाही में इतना अधिक राजस्व बढ़ जाएगा कि सरकार विकास योजनाओं पर दिल खोलकर खर्च कर सकेगी फलस्वरूप चौथी तिमाही में विकास दर 8.0 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। लेकिन परिणाम उल्टा हुआ है। जनता को तकलीफ भी हुई और विकास दर में वृद्धि की बजाय गिरावट आई। सरकार को जो बेहिसाबी आमदनी प्राप्त हुई है, वह नोटबंदी के कारण नहीं बल्कि आयकर प्रवर्तन अधिकारियों के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर छापों के कारण उनसे बेहिसाबी आमदनी उजागर हुई है। यह व्यवसायियों पर छापामारी का कार्य तो बिना नोटबंदी द्वारा आम जनता को तकलीफ डाले बिना भी किया जा सकता था। जाली नोट बनना एवं बंटना बदस्तूर जारी है। अब नोटबंदी का स्वागत करने वाले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठन ही जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट का ऐलान कर रहे हैं। फिलहाल केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन सीएसएसओ के जीडीपी वृद्धि दर के अंतिम अनुमान मार्च 2017 के बाद अप्रैल-मई में ही प्राप्त हो सकेंगे । सीएसओ के जीडीपी अनुमानों में जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट की संभावना है। इस प्रकार कुल मिलाकर सरकार द्वारा हड़बड़ी  में किया गया विमुद्रीकरण तथा अनाड़ीपन से की गई नए मुद्रित नोटों की पूर्ति व्यवस्था का नतीजा अनौपचारिक  अर्थव्यवस्था और जीडीपी दर में गिरावट के रूप दिखाई दे रहा है।


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