परीक्षा या धांधली

मध्यप्रदेश के व्यापमं घोटाले ने कितने लोगों का जीवन तबाह कर दिया है, यह देश ने देखा है। इस साजिश में शामिल कई लोग मारे गए, कहींगवाह अचानक मौत के मुंह में समा गए, कहींपरीक्षार्थी मृत पाए गए।...

देशबन्धु
परीक्षा या धांधली
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मध्यप्रदेश के व्यापमं घोटाले ने कितने लोगों का जीवन तबाह कर दिया है, यह देश ने देखा है। इस साजिश में शामिल कई लोग मारे गए, कहींगवाह अचानक मौत के मुंह में समा गए, कहींपरीक्षार्थी मृत पाए गए। बहुत से लोगों की डिग्रियां सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अमान्य हो गईं, क्योंकि उन्होंने गलत तरीके से परीक्षा में सफलता हासिल की थी। इन सबका जीवन तो तबाह हुआ ही, गलत तरीके से आगे बढऩे वालों के कारण सच में योग्य उम्मीदवारों के अवसर छीने गए और इससे उनका जीवन भी प्रभावित हुआ। हाल में परीक्षा में भ्रष्टाचार का इतना बड़ा उदाहरण देख कर भी प्रशासन और सरकारें कोई सबक नहींले रही हैं या लेना नहींचाहती हैं। बीते दिनों महाराष्ट्र में सेना भर्ती परीक्षा के पेपर लीकहोने का मामला सामने आया और बिहार में बिहार कर्मचारी चयन आयोग के पर्चे भी लीक हुए। फिलहाल ये दोनों परीक्षाएं रद्द हो गईं और कई लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या आगे ऐसे अपराध रुकेेंगे? क्या प्रतियोगी परीक्षाओं का अर्थ ही भ्रष्ट तरीके से कामयाबी हासिल करना हो गया है? क्यों सरकारी नौकरी का सवाल हमारे नौजवानों के लिए इतना बड़ा बना दिया गया है कि इसमें सफल होने के लिए गलत तरीके अपनाने से उन्हें गुरेज नहींहै?
सेना भर्ती के पेपर लीक होने पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पुणे, नागपुर और गोवा समेत कई शहरों में छापेमारी की और 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 350 छात्रों को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक दो-दो लाख रुपए में पेपर अभ्यर्थियों को बेचे गए। गिरफ्त में आए अभ्यर्थियों को एक लॉज में लीक पेपर की आंसर शीट भरते हुए पाया गया है। पुलिस ने आशंका जताई कि इस केस में सेना के कुछ लोगों का भी हाथ हो सकता है।
बिहार में पिछले साल ही नकल का एक ऐसा मामला पकड़ाया था, जिसमें परीक्षा में सर्वोच्च स्थान हासिल करने वाली लड़की को अपने विषय का उच्चारण भी ठीक से करना नहींआता था। स्कूलों-कालेजों की परीक्षा में खुलेआम नकल अब सामान्य व्यवहार की तरह लिया जाने लगा है और यही रोग प्रतियोगी परीक्षाओं में जड़ें जमा चुका है। बीएसएससी परीक्षा के पेपर लीक होने पर आयोग के चेयरमैन सुधीर कुमार समेत उनके छोटे भाई व पटना विवि  में भूगोल के विभागाध्यक्ष प्रो अवधेश कुमार, उनकी पत्नी मंजू कुमारी, भांजे आशिष कुमार समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। बताया जा रहा है कि सुधीर कुमार के रिश्तेदार इस परीक्षा में अभ्यर्थी थे, जिन्हें लाभ पहुंचाने के लिए उन पर पेपर लीक करने का आरोप लगा है। उनके रिश्तेदारों के जरिए कुछ और लोगों तक ये पेपर पहुंचे, जिनका काम ही विभिन्न परीक्षाओं में सेटिंग कर नौकरियां लगवाने का है। पुलिस के मुताबिक एक आरोपी रामाशीष का एवीएन नामक स्कूल है, जो सेटरबाजों का वर्ष 2010 से ही अड्डा बना हुआ था। बीएसएससी की परीक्षा के साथ दूसरी प्रतियोगिता परीक्षा रेलवे, बैंक, बीपीएससी में रामाशीष अपने स्कूल में सेंटर लेता था। पूछताछ में रिमांड पर लिए गए सेटरों ने इसका खुलासा किया है कि स्कूल के माध्यम से अब तक विभिन्न परीक्षाओं में सैकड़ों लोगों की नौकरियां लगवाई गई हैं। पुलिस अब इस बात का भी पता लगा रही है कि जब गिरोह वर्ष 2010 से इस धंधे में लगा था तो बीएसएससी की सभी परीक्षाओं में इन लोगों ने सेटिंग की होगी। बीएसएससी में भर्ती की यह धांधली बहुत कुछ व्यापमं से मिलती-जुलती है।
परीक्षा में सफलता के लिए भ्रष्ट तरीकों का इस्तेमाल हमारी सामाजिक सोच के कारण बढ़ा है, क्योंकि डिग्री हासिल करना और सरकारी नौकरी पाना ही सफलता का सबसे बड़ा पैमाना हमने बना लिया है। सेना भर्ती परीक्षा के पेपर दो-दो लाख रुपए में बेचे गए, ऐसा पुलिस का कहना है। बीएसएससी में एक-एक अभ्यर्थी से लाखों वसूले गए होंगे। जब ये अभ्यर्थी सफलता प्राप्त कर सरकारी नौकरी में आएंगे तो परीक्षा में निवेश की कई रकम को सूद समेत वसूलने के तरीके निकालेंगे, और भ्रष्टाचार की कडिय़ां लंबी होती जाएंगी। क्या इस तरह हम समाज से भ्रष्टाचार को खत्म करने के सपने देख रहे हैं? कुछ परीक्षाओं के रद्द होने, कुछ डिग्रियों के अमान्य होने या कुछ लोगों की गिरफ्तारियां होने से परीक्षाओं में धांधली नहींरुकेगी, इसके लिए हमें अपनी सोच को बदलना होगा।


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