अमरीका फस्र्ट का नतीजा

अमरीका के कन्सास शहर में भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचीभोटला और उनके मित्र आलोक मदसानी पर हुआ हमला नस्ली है या नहीं, फिलहाल अमरीकी प्रशासन इसकी जांच कर रहा है। ...

देशबन्धु
अमरीका फस्र्ट का नतीजा
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अमरीका के कन्सास शहर में भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचीभोटला और उनके मित्र आलोक मदसानी पर हुआ हमला नस्ली है या नहीं, फिलहाल अमरीकी प्रशासन इसकी जांच कर रहा है। लेकिन दो व्यक्ति आराम से बैठकर खा-पी रहे हों, किसी तरह के झगड़े का माहौल न हो और अचानक उन पर यह कहते हुए कोई गोली चला देता है कि मेरे देश से दफा हो जाओ, तो इसे क्या कहेंगे? फिर नस्ली हमला अमरीका के लिए कोई अनजाना अपराध नहींं है। वहां की सरकार, पुलिस और जनता सब जानते हैं कि नस्लवाद की जड़ें वहां कितनी गहरी हैं। जब बात धर्म, रंग और नस्ल की हो, तो वहां कितनी संकीर्ण मानसिकता दिखाई देती है। पगड़ी, दाढ़ी, हिजाब, बुर्का, सांवला, काला या गेहुंआ रंग वल्र्ड ट्रेड सेंंटर पर हमले के बाद से निशाने पर रहा। विमानतलों पर सुरक्षा के नाम पर अपमान की हद तक जांच, शक के आधार पर कार्रवाई, शिक्षण संस्थाओं में विद्यार्थियों से भेदभाव, धर्म स्थलों पर हमले ये सब होते रहे हैं और हर बार प्रशासन की ओर से नागरिकों को यह आश्वासन मिलता रहा है कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अपराधी पकड़े भी गए हैं और शायद उन्हें सजा हुई भी हो, लेकिन अमरीका में नस्ली हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं, यह तथ्य है। पहले की सरकारें भी नस्लवाद की निंदा करती थीं और अभी डोनाल्ड ट्रंप ने भी कन्सास की घटना की निंदा की है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने तो पहले चुनाव अभियान और बाद में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने में ही अपनी मंशा जाहिर कर दी थी कि वे कितनी संकीर्ण सोच के साथ काम करने जा रहे हैं। जो अमरीका दुनिया भर से आयातित बुद्धि और कौशल के सहारे प्रगति करता रहा और उस पर इठलाता भी रहा, उसी अमरीका में अब अमरीका फस्र्ट का नारा देकर यह संदेश दिया जा रहा है कि बाहर से आने वालों को वापस भेजो। उनके लिए यहां कोई स्थान नहीं, कोई सम्मान नहीं। सात मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों के लिए तो डोनाल्ड ट्रंप ने बाकायदा अमरीका के दरवाजे बंद कर दिए। मैक्सिको के लिए दीवार उठाने की बात कही और बाकी बचे देशों के नागरिकों के लिए भी कड़े नियम बनाने का संदेश दिया। अभी पिछले सप्ताह ही एच-1 बी वीजा के लिए नियम कड़े करने की बात पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से अनुरोध किया कि वे इस मुद्दे पर तार्किक, संतुलित और दूरदर्शी सोच से काम लें। इस वी•ाा पर सख्ती से हजारों भारतीय प्रभावित होते, जो बेहतर भविष्य और रोजगार के लिए अमरीका गए हैं। ट्रंप प्रशासन मोदीजी की बात को कितनी अहमियत देता है, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन अमरीका में नफरत और उग्रराष्ट्रवाद की जो आंधी चल रही है, वह किसी वीजा के नियम में सख्ती से कहींज्यादा खतरनाक है।
नस्लवादी हमले अमरीका में होते रहे हैं, लेकिन ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से रोजाना औसतन 2 सौ अपराध घृणाजन्य हो रहे हैं। अमरीकी खुफिया सेवा के प्रमुख राबर्ट बायस ने स्वयं स्वीकार किया है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद ऐसे अपराधों में 115 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। जाहिर है अपराधी इसे राष्ट्रवाद से जोडक़र देख रहे हैं। उग्रराष्ट्रवाद की यह लहर जब, जिस देश में उठी है, अल्पसंख्यकों के लिए घातक साबित हुई है। लेकिन इतिहास से सबक न लेते हुए, उग्रराष्ट्रवाद की यह अवधारणा बार-बार लौट कर आ रही है वह भी पहले से अधिक खतरनाक होकर। कन्सास हमले में मारे गए श्रीनिवास की पत्नी सुनयना ने अपने पति की मौत के बाद ट्रंप सरकार से सवाल किया है कि वो नफरत की बुनियाद पर हुई इस हिंसा को रोकने के लिए क्या करने जा रही है? दरअसल इस सवाल का जवाब सुनयना ही नहींदुनिया के करोड़ों लोग चाहते हैं। अपने देश, अपने धर्म, अपनी जाति से प्यार करने का यह अर्थ तो कदापि नहींकि आप दूसरों को नुकसान पहुंचाएं। भारत समेत कई देशों के नौजवान रोजगार, शिक्षा, व्यापार आदि के लिए अमरीका जाते हैं। कुछ लौट आते हैं, कुछ वहींरह जाते हैं और वहींके नागरिक बनना चाहते हैं। भारत में एक वक्त इस तरह के ब्रेनड्रेन को लेकर काफी विमर्श होता था कि हम अपने देश में ही ऐसा माहौल क्यों नहींबनाते कि हमारे बच्चे ऊंची शिक्षा लेकर बाहर न जाएं, बल्कि यहींरहें। यह विचार एक हद तक तो सही है कि जिनकी शिक्षा पर देश ने निवेश किया है, बाद में उनके कौशल का लाभ देश को ही मिले। लेकिन इसका यह अर्थ तो नहींकि लोग अपने-अपने देशों की सीमाओं से बंध कर ही रह जाएं। इस तरह इंसानी सभ्यता की बहती धार को रोका जाएगा तो उसमें सड़ांध पैदा होगी। माहौल तो ऐसा बनना चाहिए कि विभिन्न देशों के बीच परस्पर संवाद, सहयोग बढ़े। संकीर्णताएं इसी से टूटेंंगी और आतंकवाद जैसी बुराइयों पर लगाम कसने में मदद मिलेगी। डोनाल्ड ट्रंप यह सोचें कि अमरीका फस्र्ट कहते-कहते वे बाकी उसे दुनिया से कटा द्वीप न बना दें।


 

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