आर्थिक सर्वेक्षण : उल्लेखित आठ तथ्य

डॉ. हनुमन्त यादव : 1 फरवरी को 2017-18 वर्ष का केन्द्रीय बजट को संसद में प्रस्तुत किए जाने के एक दिन पहले वित्तमंत्री अरूण जेटली द्वारा संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 प्रस्तुत किया गया था। ...

डॉ. हनुमंत यादव

डॉ. हनुमन्त यादव
1 फरवरी को 2017-18 वर्ष का केन्द्रीय बजट को संसद में प्रस्तुत किए जाने के एक दिन पहले वित्तमंत्री अरूण जेटली द्वारा संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 प्रस्तुत किया गया था। चूंकि सभी की निगाहें बजट पर थी इसलिए आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में की गई भारतीय अर्थव्यवस्था की समीक्षा पृष्ठभूमि में चली गई। आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 भारत सरकार के वित्तमंत्रालय के प्रधान आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रमण्यम एवं उनके सहयोगियों द्वारा तैयार किया गया महत्वपूर्ण तथ्यात्मक दस्तावेज है। यद्यपि इसके कुछ अध्यायों में प्रस्तुत विश्लेषण को अच्छी तरह समझने के लिए वृहत अर्थशास्त्र  का ज्ञान जरूरी है । आर्थिक सर्वेक्षण के हिन्दी संस्करण में अंग्रेजी संस्करण के अध्यायों के नाम का शब्दश: अनुवाद नहीं किया गया है । उदाहरण के लिए एक अध्याय का अंग्रेजी संस्करण में नाम भारत के आठ रोचक तथ्य दिया गया है, जबकि हिन्दी संस्करण में  उस अध्याय का नाम भारत के आठ आश्चर्य नाम दिया गया है। यद्यपि जो लोग भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं उनके लिए उसमें आश्चर्य सरीखा कुछ भी नहीं है।   
यहां पर हम आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 के आठ रोचक तथ्यों पर चर्चा करेंगे। पहला तथ्य, भारतीयों की गतिशीलता के बारे में है जिसके लिए रेलवे यात्री यातायात को गतिशीलता का मानदंड माना गया है। इसके अनुसार भारत में हर साल 90 लाख यात्री अपने कार्य के सिलसिले में रेल में आवाजाही करते हैं, यह संख्या 2011 की तुलना में लगभग दुगुनी है। इस प्रकार रेल यात्री संख्या में अब जापान के स्थान पर भारत प्रथम स्थान पर आ गया है क्योंकि भारत में रेलयात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि जापान में यात्रियों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है।  रेलयात्रियों की संख्या में जर्मनी तीसरे स्थान पर है जहां पर रेलयात्री संख्या 20 लाख है। ग्रेट ब्रिटेन एवं चीन क्रमश: चौथे एवं पाचवें स्थान पर है।  चीन की तुलना  में भारत के रेलयात्रियों की संख्या पांच गुनी है। रेल यात्रियों की संख्या को जनसंख्या की गतिशीलता की मान्यता के आधार पर संयुक्त राज्य अमरीका गतिशीलता में बहुत पीछे है ।
आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित दूसरा तथ्य क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की सोच में पूर्वागह के कारण भारत की क्रेडिट रेटिंग में ए ग्रेड से वंचित किया जा रहा है । पिछले दो सालों में भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी एवं मजबूती आने के बावजूद स्टेडंड्र्र एंड पुअर सरीखी  क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भारत की साख रेटिंग बीबीबी बनाए रखी है, जबकि हाल के सालों में चीनी अर्थव्यवस्था में शिथिलता के बावजूद उसकी क्रेडिट रेटिंग एए. कायम रखी है । 2010 में चीन की क्रेडिट रेटिंग मात्र ए. थी। अरविन्द सुब्रमण्यम के अनुसार चीन की सकल घरेलू उत्पाद  जीडीपी दर 2010 की 10.5 प्रतिशत  की तुलना में 2015 में गिरकर 6.5 प्रतिशत  पर आ गई है जबकि क्रेडिट जीडीपी अनुपात 2010 के 142 प्रतिशत  की तुलना में 2015  कम होने की बजाय बढक़र 205 प्रतिशत हो गया है । दूसरी ओर भारत की जीडीपी वृद्धि दर 5.0 प्रतिशत से बढक़र 7.5 प्रतिशत हो गई है और क्रेडिट जीडीपी अनुपात पिछले सात सालों में 90  प्रतिशत से नीचे बना हुआ है। भारत सरकार द्वारा इन तथ्यों की ओर क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद इन एजेंसियों का भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में  पूर्वाग्रह कायम है  तथा वे भारत को ए ग्रेड नकार रही हैं।
तीसरा तथ्य, सामाजिक कार्यक्रमों के त्रुटिपूर्ण लक्ष्यबद्ध किए जाने की प्रक्रिया  के सबंध में प्राप्त साक्ष्यों से संबंधित है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में सामाजिक कायक्रमों पर गलत ढंग से व्यय किया जाता रहा है। भारत के 650 हजार जिलों में से 40 फीसदी जिले सबसे अधिक गरीब आबादीवाले जिले हैं किन्तु सरकार द्वारा उन पर  कुल व्यय का मात्र 29 प्रतिशत ही व्यय किया जा रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में चौथी बात यह कही गई है कि भारत में राजनीतिक लोकतंत्र तो है किन्तु राजकोषीय लोकतंत्र नहीं है । भारत में 100 प्रतिशत वयस्कों को मतदान सहित सभी लोकतांत्रिक  अधिकार प्राप्त हैं तथा वे उसका प्रयोग कर रहे हैं। किन्तु कुल मतदाताओं में से केवल 7 फीसदी आयकर दाता हैं।  विकासशील देशों के  जी-20 समूह में  करदाताओं के प्रतिशत  में भारत 13वें स्थान पर है। आार्थिक सर्वेक्षण में उल्लेखित  तीसरा एवं चौथा नया नहीं हैं, इसके लिए उपचारात्मक उपाय सरकार द्वारा ही किए जाने हैं ।  
पांचवा तथ्य, भारत अपनी बड़ी युवा आबादी से विशिष्ट जनांकिकी लाभ प्राप्त करने की स्थिति में है । इसका मुख्य कारण भारत में 15 से 65 आयुवर्ग के लोगों का अधिक प्रतिशत होना है । दुनिया के अन्य देशों की तुलना भारत में उपरोक्त आयुवर्ग  अधिक संख्या में है । इसका लाभ भारत को लम्बे समय तक मिलेगा। भारत का जनांकिकी लाभंाश चीन, ब्राजील व दक्षिण कोरिया उभरती अर्थव्यवस्था के  देशों की तुलना में अभी निम्न था।  चूंकि ये देश  जनांकिकी लाभंाश के शीर्ष पर पहुंच चुके थे  इसलिए  इनके लाभांश में अब गिरावट आनी प्रारम्भ हो गई  है।  किन्तु भारत का  जनांकिकी लाभंाश इन देशों को पार करते हुए लम्बे समय तक भारतीय अर्थव्यवस्था को लााभन्वित करता रहेगा।  भारत के राज्यों में वर्तमान में पंजाब, पश्चिम बंगाल तथा दक्षिण भारत के सभी राज्यों में जनांकिकी लाभंाश भारत के औसत से ऊंचा है जबकि बिहार, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व राजस्थान आदि राज्यों में नीचा रहा है। पिछले कुछ  सालों में इन राज्यों का जनांकिकी लाभंाश में वृद्धि हो रही है और आगे के सालों में इसमें और अधिक सुधार की संभावनाएं हैं।
छठवां तथ्य, चीन की तुलना में भारत का आंतरिक व्यापार अर्थात भारत की सीमा में  व्यापार की मात्रा अधिक है । 1980 में भारत का और चीन दोनों का ही आंतरिक व्यापार उनकी जीडीपी का लगभग 15 फीसदी था । चीन ने व्यापार को विकास का इंजन मानकर अपने व्यापार को  तेजी से बढ़ाया,  परिणामस्वरूप चीन का आंतरिक व्यापार 2005 में बढक़र इसकी जीडीपी का 65 फीसदी तक जा पहुंचा जबकि भारत के आंतरिक व्यापार में 1991 के बाद तेजी आनी प्रारम्भ हई तथा 2005 में यह जीडीपी का 30 प्रतिशत तक पहुंचने में सफल हुआ। भारत का आंतरिक व्यापार 2015 में जीडीपी का 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका था। यद्यपि भारत आंतरिक व्यापार के जीडीपी के प्रतिशत के रूप में  संयुक्त राज्य अमरीका, चीन व ब्राजील से नीचे  है, किन्तु युरोपीय संघ, कनाडा आदि अन्य देशों की तुलना में बहुत आगे है । अपेक्षा की जाती है कि वस्तु एवं सेवा कर लागू होने व आंतरिक परिवहन के स्थानीय अवरोधों को हटाने पर  भारत के आंतरिक व्यावार में तेजी आएगी।
सातवां तथ्य यह है कि 2004 से 2014 तक की 10 साल की अवधि में  भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी में तेजी से स्थानिक फैलाव हुआ है और वह आगे भी वृद्धि की ओर अग्रसर रहेगा जबकि अमरीका व चीन में फैलाव में कमी आई है । आठवां और अन्तिम  तथ्य  भारत के नगरीय निकायों द्वारा  सम्पत्ति कर क्षमता की संभावनाओं के विदोहन में उदासीनता रही है । बंगलुरू तथा जयपुर सरीखे नगरों में सम्पत्तिकर राजस्व संकलन क्षमता का मात्र 20 प्रतिशत तक ही विदेाहन किया  गया  है। इन सभी बिन्दुओं  पर आगे आने वाले दिनों में  विस्तार से विवेचनात्मक चर्चा की जाएगी ।   


 

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