विधानसभा चुनावी नतीजों से निवेशक उत्साहित

डॉ. हनुमन्त यादव 11मार्च को घोषित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में दो राज्यों में भाजपा ने भारी बहुमत प्राप्त करके तथा दो राज्यों में स्थानीय छोटे दलों से गठबंधन करके अपने मुख्यमंत्री बनाने में स...

डॉ. हनुमंत यादव

डॉ. हनुमन्त यादव
11मार्च को घोषित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में दो राज्यों में भाजपा ने भारी बहुमत प्राप्त करके तथा दो राज्यों में स्थानीय छोटे दलों से गठबंधन करके अपने  मुख्यमंत्री बनाने में सफलता हासिल की। इन पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का बहुत महत्व रहा  है जिसके चुनाव नतीजों की ओर केवल देश के ही नहीं, बल्कि विदेश के राजनेताओं की निगाहें लगी हुई थीं। जिसकी पुष्टि इस बात से ही हो जाती है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विदेशी राजनेताओं से बधाईयां प्राप्त हुई हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव  में भाजपा की प्रचंड जीत के समाचार मिलने के बाद देशी और विदशी निवेशकों द्वारा शेयरों एवं अन्य प्रतिभूतियों की  ताबड़तोड़ खरीदी किए जाने के कारण  बम्बई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स उछलकर 29442 बिन्दु तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 9050 पर पहुंच गये । सेंसेक्स को कारपोरेट अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर माना जाता है। यह शेयर कीमतों में उछाल कारपोरेट उद्योग व व्यवसाय के विकास की संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
भाजपा के लिए अनेक कारणों से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बहुत महत्वपूर्ण था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात की बजाय उत्तर प्रदेेश का लोकसभा प्रतिनिधित्व करना पसन्द किया।  245 सदस्यों वाली राज्यसभा  में उत्तर प्रदेश के 30 सदस्य हैं जिसमें भाजपा के मात्र 3 सदस्य हैं। राज्यसभा में भाजपा की संख्या बढ़ाने के लिए  भी उत्तर प्रदेश महत्वपूर्ण हो गया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने  80 में से 73 सीटों पर विजय हासिल की थी। यदि उस समय विधानसभा चुनाव होते तो भाजपा को 350 सीट भी मिल सकती थी। किन्तु दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटें जीतने के बावजूद 2015 के विधानसभा चुनावों में पूरे केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा चुनाव प्रचार करने के बावजूद भाजपा को 70 में से मात्र 3 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। दिल्ली के अनुभव को देखते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए जीत की संभावनाएं संशयपूर्ण हो गई थीं। इस कारण से भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश  विधानसभा चुनाव जीतना बहुत बड़ी चुनौती बन गई थी।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत के लिए जो रणनीति बनाई और जिस प्रकार उसे  क्रियान्वयन किया विधानसभा चुनाव में  प्रचंड जीत इंगित करती है कि भाजपा की रणनीति पूरी तरह सफल रही। कहा जाता है कि 8 नवंबर को 500 रुपए व 1000 रुपए की नोटबंदी उसी गुप्त रणनीति का प्रमुख अंग थी। यू.पी. भाजपा नेताओं को अक्टूबर 2016 में ही जानकारी मिल चुकी थी कि मायावती  तथा समाजवादी पार्टी ने करोडों रुपए की नकदी चुनाव प्रचार व मतदाताओं को लुभाने के लिए एकत्रित कर रखी है। यह कोई नई बात नहीं है, जब भी किसी भी राज्य में चुनाव होते हैं तो वाहनों में करोड़ों रुपए की नकदी के प्रकरण पकड़ाए जाने के समाचार पढऩे को मिलते रहते हैं। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश का चुनाव इतना महत्वपूर्ण था कि नोटबंदी से पूरे देश की आम जनता एवं छोटे व्यवसायियों को होने वाली तकलीफ को नकारते हुए  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हड़बड़ी में 8 नवंबर को पूरे देश भर में 500 रुपए तथा 1000 रुपए के नोटों की बन्दी की का ऐलान कर दिया। नोटबंदी के ऐलान के हर दूसरे-तीसरे दिन नई-नई संशोधन अधिसूचनाएं जारी करना इस बात का द्योतक है कि नोटबंदी को बिना सोचे समझे जल्दबाजी में लागू कर दी गई थी। केवल आम जनता ही नहीं पूरे देश भर के बैंक कर्मचारियों को दो माह तक मानसिक तनाव में काम करना पड़ा। यह सब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विरोधियों की कमर तोडऩे के लिए किया गया था।
भाजपा के पास अपने पुराने कार्यकर्ताओं की कमी नहीं थी। इसके बावजूद लोकसभा चुनाव की भंाति उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी पोलिंग बूथ स्तर पर मतदाताओं के प्रबंधन हेतु अपनी भाजपा ने वेबसाइट में विज्ञापन देकर सवा लाख से अधिक चुनावी कार्यकर्ताओं की स्वयंसेवकों के रूप में भर्तियां कीं। इन स्वयंसेवकों को इस बात की भी समझाइश दी गई थी कि नोटबंदी से व्यथित आम मतदाताओं को आयकर विभाग द्वारा देश भर में प्रतिदिन की जाने वाली  छापामारी से उजागर होने वाले बेहिसाबी धन की जानकारी का प्रचार करते हुए बतावें कि काली कमाई से धनी बनने वाले लोगों से कालाधन निकालने के लिए नोटबंदी की गई है। विधानसभा चुनाव में बसपा की मात्र एक स्टार प्रचारक मायावती और सपा-कांग्रेस गठबंधन के 2 स्टार प्रचारक थे। भाजपा के 40 स्टार प्रचारकों की प्रतिदिन होने वाली रैलियों के भीड़ जुटाने में भाजपा के स्थानीय नेताओं को सहयोग देने की जिम्मेदारी भी इन बूथ स्वयंसेवकों पर थी।
सवाल उठता है कि उत्तर प्रदेश एवं उत्तराख्ंाड में भाजपा की प्रचंड जीत का केन्द्र की पोलिटिकल इकोनॉमी या  राजनैतिक अर्थव्यवस्था पर क्या किस प्रकार प्रभाव की संभावनाएं हैं? वर्तमान में राज्यसभा के 245 सदस्यों में भाजपा व उसके सहयोगी सदस्यों की संख्या लगभग 80 है। इसलिए इन 2 राज्यों में भाजपा की जीत से राज्यसभा में संख्याबल में 2018 से हर दो साल पर धीरे-धीरे परिवर्तन होने के कारण शक्ति  संतुलन अगले पांच साल तक कांग्रेस के पक्ष में ही रहने वाला है। यह एक अलग बात है कि मनोबल गिरने से कांग्रेसी सदस्य भाजपा के पक्ष में दलबदल कर सकते हैं या भाजपाविरोधी क्षेत्रीय दल अपने राज्य के हित में पाला बदलकर भाजपा को समर्थक दे सकते हैं। अभी तक का अनुभव यह रहा है कि अन्य दलों से भाजपा में शामिल होने वाले नेता लोग आरएसएस से जुड़ाव न होने के कारण महत्वपूर्ण पदों से वंचित होकर अगल-थलग पड़े रहते थे किन्तु हाल ही में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में दलबदलू नेताओं को जिस प्रकार से महत्वपूर्ण स्थान मिला है उससे विरोधी दल के संसद सदस्य भी भाजपा में शामिल होने को प्रेरित हो सकते हैं।
बीएसई सेंसेक्स पिछले दो सालों में मात्र एक या 2 दिन के लिए ही 29,000 बिन्दु से ऊपर रहा था। किन्तु यूपी चुनाव नतीजों के बाद कारोबारी सप्ताह के पहले दिन 14 मार्च को सेंसेक्स 29,000 बिन्दु पारकर 29442 तक पहुंचा और प्रतिदिन बढ़त बनाते हुए 17 मार्च को 29,700 को पार कर गया।  यह इस बात को इंगित करता है देशी-विदेशी निवेशकों और कारपोरेट सेक्टर की सोच है कि यू.पी. का चुनाव नरेन्द्र मोदी की प्रधानमंत्री के रूप में एक प्रकार से जनमत संग्रह था जिसमें नरेन्द्र मोदी पर भरोसा जताया गया है। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद कुछ लोगों को शंका थी कि उनकी कट्टरवादी छवि के कारण निवेशकों को निराशा होगी तथा सेंसेक्स 29,000 से नीचे गिर जाएगा। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। 20 मार्च के 1 बजे तक मुनाफा बिकवाली के बावजूद सेंसेक्स 29,500 से ऊपर चल रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि निवेशकों एवं कारपोरेट व्यवसायियों की सोच है कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव अब समाप्त हो चुका है। सरकार यू.पी. के जनादेश के आधार पर सरकार आर्थिक सुधारों में तेजी लााएगी जिससे भारतीय उद्येागों में निवेश बढ़ेगा और लक्षित 7.5 प्रतिशत विकास दर प्राप्त होगी।  


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