मोदी सरकार के तीन साल : 2019 में विपक्ष के सामने कठिन चुनौती

विपक्षी पार्टियां एकता की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनकी कोशिशों को अभी भी सफल होने में समय है। राष्ट्रपति का आम चुनाव होने जा रहा है। ...

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मोदी सरकार के तीन साल : 2019 में विपक्ष के सामने कठिन चुनौती
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-कल्याणी शंकर

दिल्ली और बिहार में भाजपा को भारी हार का मुंह देखना पड़ा और पंजाब में भी उसकी करारी हार हुई, जहां उसकी अकाली दल के साथ मिली जुली सरकार थी। लेकिन उसने अन्य अनेक राज्यों में अपना विस्तार किया है। उड़ीसा में उसकी शक्ति बढ़ रही है और पश्चिम बंगाल में भी वह दूसरी बड़ी ताकत बनती दिख रही है। विपक्षी पार्टियां एकता की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनकी कोशिशों को अभी भी सफल होने में समय है। राष्ट्रपति का आमचुनाव होने जा रहा है। उसमेंं एक साझा उम्मीदवार देने की कोशिश में कुछ विपक्षी पार्टियां लगी हुई हैं। देखना होगा कि यह कोशिश कैसा रंग लाती है।

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मोदी सरकार ने अपने तीन साल पूरे कर लिए हैं और वह अपने कार्यकाल के चौथे साल में प्रवेश कर रही है। वह अपने वर्तमान कार्यकाल पूरा करने को लेकर ही आत्मविश्वास से लवरेज नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरा भरोसा है कि वे 2019 का लोकसभा चुनाव भी जीत लेंगे।

विपक्ष के पास अभी भी मोदी और उनकी पार्टी की चुनौती का सामना करने के लिए दो साल का समय है। विपक्ष अभी तक एक नहीं हुआ है और मोदी की चुनौती का सामना करने की स्थिति में वह नहीं दिखाई पड़ता। नरेन्द्र मोदी के आत्मविश्वास का कारण भी यही है।

मोदी के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड क्या है? मीडिया में आ रहे सर्वेक्षण नतीजों के अनुसार देश के 61 फीसदी लोगों को लगता है कि मोदी सरकार से लोगों को जो उम्मीदें थीं, वह पूरी हो गई हैं, हालांकि अनेक मोर्चे पर सरकार की विफलता साफ देखी जा सकती है।

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सरकार न तो आतंकवाद के मोर्च पर सफल दिख रही है और न ही महंगाई के मोर्चे पर। कानून व्यवस्था हालांकि प्रदेश का मामला है, लेकिन इस मोर्चे पर भी देश के लोगों को राहत नहीं मिल रही है। सबसे ज्यादा यदि मोदी सरकार ने देश को कहीं निराश किया है, तो वह है रोजगार का मोर्चा।

विदेशी नीति के मोर्चे पर नरेन्द्र मोदी सरकार की खूब वाहवाही हो रही है। मोदी ने लोगों में विश्वास जगाया है कि कार्रवाई करने वाले नेता हैं। स्वच्छ भारत अभियान, जनधन योजना, मेक इन इंडिया, सबके लिए आवास व अन्य योजनाओं को लेकर नरेन्द्र मोदी ने लोगों के बीच अपनी एक खास छवि बनाने में सफलता पाई है।


पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक और विमुद्रीकरण की घोषणा ने भी लोगों का ध्यान मोदी की ओर खींचा है। उनके नतीजे चाहे जो भी निकले हों, लोगों को लगने लगा है कि नरेन्द्र मोदी साहस भरा कदम उठा सकते हैं। नरेन्द्र मोदी विदेशों में भी भारत के प्रति अच्छा माहौल बनाने में सफल हुए हैं।

नरेन्द्र मोदी की सरकार ने आर्थिक सुधारों की दिशा में भी बड़े कदम उठाए हैं। बैंकिंग व्यवस्था में सुधार के उपायों की घोषणा की गई है। पावर सेक्टर में भी व्यापक सुधार किए गए हैं। सभी सुधारों की जननी जीएसटी विधेयक को भी पास करवा लिया गया है और अब यह वास्तविकता बनने जा रहा है।

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शेयर बाजार भी कुलांचे मार रहा है। लेकिन वह क्षेत्र जहां मोदी सरकार ने तनिक भी सफलता नहीं पाई है, वह है रोजगार सृजन। सरकार के अपने आंकड़े के अनुसार, रोजगार में विकास दर सिर्फ 5 फीसदी रही है, जबकि वायदा था कि एक करोड़ रोजगार हर साल पैदा होंगे। प्रत्येक बैंक एकाउंट में 15 लाख जमा करने का वायदा भी पूरा नहीं किया गया है।

पिछले 3 साल में मोदी ने भारतीय जनता पार्टी को काफी मजबूत कर दिया है। उनके सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी अन्य राज्यों में सत्ता में आई है। महराष्ट्र, हरियाणा, मणिपुर और असम में भाजपा ने पहली बार सरकार बनाई है। जम्मू और कश्मीर में पीडीपी के साथ उसने पहली बार सत्ता हासिल की है। इनके अलावा वह झारखंड, उत्तराखंड और गोवा में भी सरकार बनाने में भाजपा सफल रही है।

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दिल्ली और बिहार में भाजपा को भारी हार का मुंह देखना पड़ा और पंजाब में भी उसकी करारी हार हुई, जहां उसकी अकाली दल के साथ मिली जुली सरकार थी। लेकिन उसने अन्य अनेक राज्यों में अपना विस्तार किया है। उड़ीसा में उसकी शक्ति बढ़ रही है और पश्चिम बंगाल में भी वह दूसरी बड़ी ताकत बनती दिख रही है।

विपक्षी पार्टियां एकता की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनकी कोशिशों को अभी भी सफल होने में समय है। राष्ट्रपति का आमचुनाव होने जा रहा है। उसमें एक साझा उम्मीदवार देने की कोशिश में कुछ विपक्षी पार्टियां लगी हुई हैं। देखना होगा कि यह कोशिश कैसा रंग लाती है।

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