'विपक्ष का अड़ियल रवैया विकास में बाधक'

राजीव रंजन श्रीवास्तव : विपक्षी दलों का विरोध और असहिषणुता पिछले कुछ समय में काफी बढ़ गयी है, जिसका नकारात्मक प्रभाव देशहित के जरूरी मसलों व महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने पर पड़ा है, ...

राजीव रंजन श्रीवास्तव

जापान, थाइलैंड की यात्रा से लौट कर बोले प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री के विशेष विमान से !   विपक्षी दलों का विरोध और असहिषणुता पिछले कुछ समय में काफी बढ़ गयी है, जिसका नकारात्मक प्रभाव देशहित के जरूरी मसलों व महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने पर पड़ा है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर दुख और चिंता व्यक्त की। अपनी पांच दिवसीय जापान व थाइलैंड की सफल यात्रा से देश वापस लौटते हुए डा.मनमोहन सिंह विशेष विमान में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। विपक्ष पर खुलकर आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति में विपक्ष बाधक की भूमिका निभा रहा है। दरअसल विपक्ष को यह उम्मीद ही नहींथी कि 2004 में यूपीए की सरकार  बनेगी। उसकी यह निराशा तब दुगुनी हो गई, जब यूपीए ने दोबारा सत्ता में आने का जनादेश 2009 में प्राप्त किया। उन्होंने कहा, मुझे दुख है कि विपक्ष और सरकार के बीच इसी कटुता के कारण संसद में बहुत से आवश्यक कामकाज नहीं हो सके।
सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री के बीच तथाकथित मतभेद की खबरें पिछले कुछ समय में कई बार आईं। लेकिन प्रधानमंत्री ने इससे साफ इन्कार करते हुए कहा कि मेरे व कांग्रेस अधयक्षा के बीच विचारों का कोई मतभेद नहींहै। हम हर मुद्दे पर एक साथ काम करते हैं। जहां सलाह-मशविरे की आवश्यकता होती है, मैं उनसे परामर्श करता हूं इसलिए इस बात में कोई सच्चाई नहींहै कि हमारे बीच किसी प्रकार का मतभेद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति में कोई स्थायी शत्रु या मित्र नहींहोता। अगले आम चुनाव से पहले वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस से दोबारा गठजोड़ की संभावनाओं पर डा.सिंह ने कहा कि सरकार में कुछ लोग आते हैं, कुछ जाते हैं और गठबंधन की राजनीति में उन्हें इसी तरह स्वीकार करना पड़ता है। उनका संकेत स्पषट था कि आगामी चुनावों में गठजोड़ के नए समीकरण बन सकते हैं।
निकट भविषय में केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार की संभावनाओं पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में डा. सिंह ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार पर विचार किया जा रहा है। गौरतलब है कि अश्विनी कुमार और पवन बंसल के हाल के इस्तीफे और तृणमूल कांग्रेस व द्रमुक के अलग होने के बाद केन्द्रीय मंत्रिमंडल में कई पद रिक्त पड़े हैं। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के खुलासे के बाद भारतीय किेट को लेकर पैदा हुए विवाद और  केंद्र सरकार के इस मामले में दखल की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि मैं इस तरह की बातों पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। इस पर अभी जांच जारी है। मंत्रियों सहित कई वरिष्ठ राजनेताओं के भी भारतीय किेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में शीर्ष पदों पर होने के सवाल पर प्रधनमंत्री ने कहा कि मेरे लिए इस पर प्रतियिा व्यक्त करना ठीक नहीं है। मैं केवल इतना कह सकता हूं कि खेल और राजनीति को नहीं मिलाया जाना चाहिए।
नवाज शरीफ के निमंत्रण पर पाकिस्तान जाने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम दोनों ने एक दूसरे को आमंत्रित किया है। हालांकि अभी तक पाकिस्तान यात्रा के बारे में कोई निर्णय नहींलिया गया है। प्रधानमंत्री ने भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों पर कहा कि हम निश्चित रूप से पाकिस्तान के साथ अच्छे पड़ोसी संबंध को पसंद करेंगे। हमारी यह हमेशा से नीति रही है कि हमें भारत-पाकिस्तान संबंधों से, सभी लंबित मुद्दों के साथ निपटना चाहिए। हम उन सभी मुद्दों का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान करने के प्रति बचनबध्द हैं। उन्होंने बताया कि ठीक ऐसी ही भावना नवाज शरीफ  द्वारा भी व्यक्त की गई है।
राज्ससभा में फिर से चुने जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं 1991 से असम से राज्यसभा का प्रतिनिधि रहा हूं और मेरा सौभाग्य है कि असम की जनता ने एक बार फिर मुझे इसके लिए चुना है। मैं उनका आभारी हूं। मैंने यथाशक्ति असम के लोगों के लिए कार्य किया है और आगे भी इसे जारी रखने के लिए मैं प्रतिबध्द हूं।
सरकार की लुक ईस्ट नीति का कितना प्रभाव पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर पड़ेगा, इस पर डा.मनमोहन सिंह ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि हमारी लुक ईस्ट नीति से पूर्वोत्तर के राज्य अवश्य लाभान्वित होंगे। योजनानुसार अगर हम भारत, म्यांमार व थाइलैंड के बीच व्यापारिक गलियारे को निर्मित कर लेते हैं, तो इससे पूर्वोत्तर राज्यों के विकास में मदद मिलेगी। सरकार पूर्वोत्तर में औद्योगिक विकास के लिए कई प्रकार की सब्सिडी दे रही है, इसका कितना असर हो रहा है? इस सवाल पर प्रधानमंत्री का कहना है कि चूंकि पूर्वोत्तर राज्य शेष भारत से आसानी से जुड़े नहींहैं, इस वजह से कुछ सब्सिडी देनी पड़ रही है। पर जल्द ही पूर्वोत्तर राज्यों में औद्योगिक विकास गति पकड़ेगा व वे अपने पैरों पर खुद खड़े होंगे, ऐसी उम्मीद है।
भारत की लुक ईस्ट नीति पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 1991 की नरसिंह राव सरकार से लेकर अब तक इसमें काफी प्रगति हुई है। दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों विशेषकर आसियान देशों के साथ हर मोर्चे पर हमारी निकटता बढ़ी है।
2014 के आम चुनावों के पहले क्या जापान के साथ असैन्य परमाणु करार होने की संभावना है? इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दिशा में जापान के साथ चर्चा हुई है और उम्मीद है कि जल्द ही दोनों देश समझौते पर हस्ताक्षर कर लेंगे।

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