मोदी सरकार का एक साल

डॉ. गौरीशंकर राजहंस : बहुत शीघ्र मोदी सरकार का एक साल पूरा हो गया। अत: यह स्वाभाविक ही है कि इस एक साल की अवधि की सफलता और असफलताओं का विश्लेषण किया जाए। मनुष्य का यह स्वभाव है कि यदि जो व्यक्ति रचनात्मक दृष्टिकोण रखते हैं वे कहते हैं कि गिलास में कम से कम आधा गिलास पानी है उससे प्यास कुछ तो बुझेगी और जो बेवजह आलोचनात्मक दृष्टि रखते हैं वे कहते हैं कि बड़ी उम्मीद की थी कि पूरे गिलास में पानी भरकर आएगा।...

डॉ गौरीशंकर राजहंस

बहुत शीघ्र मोदी सरकार का एक साल पूरा हो गया। अत: यह स्वाभाविक ही है कि इस एक साल की अवधि की सफलता और असफलताओं का विश्लेषण किया जाए। मनुष्य का यह स्वभाव है कि यदि जो व्यक्ति रचनात्मक दृष्टिकोण रखते हैं वे कहते हैं कि गिलास में कम से कम आधा गिलास पानी है उससे प्यास कुछ तो बुझेगी और जो बेवजह आलोचनात्मक दृष्टि रखते हैं वे कहते हैं कि बड़ी उम्मीद की थी कि पूरे गिलास में पानी भरकर आएगा। यह तो आधा गिलास खाली है। इसलिए कहने का अर्थ है कि आलोचना करने वाले क्षिद्रान्वेशी हर चीज में कोई न कोई नुक्स देखते ही रहेंगे। परन्तु यदि निष्पक्ष रूप से विश्लेषण किया जाए तो यह मानना होगा कि गत 30 वर्षों में जितनी सरकारें आईं उनकी तुलना में नरेन्द्र मोदी की सरकार सर्वोत्तम है।    
एक साधारण परिवार का व्यक्ति जिसने अपना बचपन रेलवे प्लेटफार्म पर और रेल के डिब्बों में चाय बेचकर बिताया वह एक सशक्त नेता होकर उभरे इससे बढक़र आश्चर्य की बात और क्या हो सकती है? नरेन्द्र मोदी के उदाहरण ने सारी दुनिया को यह दिखा दिया है कि भारत में सही अर्थ में लोकतंत्र है। जहां पर एक झोपड़ी में रहने वाला व्यक्ति भी देश के सर्वोच्च पद पर पहुंच सकता है। यह तो मानना ही होगा कि गत 10 वर्षों में संप्रग सरकार जो कई पार्टियों की मिली-जुली सरकार थी इस खींचातानी से गुजरी थी कि लोग उस कमजोर सरकार से तंग आ गये थे और चाह रहे थे कि केन्द्र में कोई मजबूत सरकार हो। एक मजबूत व्यक्ति देश का नेता हो जो दूरदर्शी हो और जिसके हृदय में केवल आम जनता के कल्याण की भावना हो। नरेन्द्र मोदी उस सशक्त नेता के रूप में उभर कर सामने आए और एक साल की अवधि के दौरान भारत ही नहीं विदेशियों ने भी देखा कि भारत एक सक्षम नेतृत्व से संपन्न है और उसका भविष्य अत्यन्त ही उज्जवल है।
नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने थे तब लोगों को ऐसा लगता है कि वैदेशिक मामलों में उन्हें कोई अनुभव नहीं है इसलिए विदेश नीति में वे सर्वथा असफल रहेंगे। परन्तु दूरदर्शी नरेन्द्र मोदी ने एक झटके में ही संसार को दिखा दिया कि विदेशों से मधुर संबंध बनाने में वे जितने माहिर हैं उसके पहले कोई दूसरे प्रधानमंत्री या नेता नहीं थे। अपनी सूझबूझ से उन्होंने सबसे पहले पड़ोसियों के साथ मधुर संबंध बनाने का प्रयास किया। इसीलिए अपने शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने सभी ‘सार्क’ देशों के राष्ट्राध्यक्षों या शासनाध्यक्षों को बुलाया जिसका अत्यन्त ही अनुकूल प्रभाव पड़ा।
नेपाल के साथ गत 10 वर्षों से भारत के संबंध मधुर नहीं चल रहे थे। यही नहीं, चीन बुरी तरह नेपाल पर हावी हो रहा था। नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोईराला को अत्यधिक सम्मान दिया। जब वे पशुपतिनाथ के दर्शन करने नेपाल गये तो नेपाल की जनता में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। सबसे बड़ी बात यह हुई कि जब नेपाल में भूकम्प आया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सबसे पहले भारत का राहत दल सेना के अफसरों, जवानों, डॉक्टरों के साथ पहुंचा और हवाई तथा सडक़ मार्ग से भूकम्प पीडि़तों की भरपूर मदद की गई। सबसे बड़ी बात यह हुई कि जब नेपाल में भूकम्प आया उस समय उसके प्रधानमंत्री सुशील कोईराला इंडोनेशिया में थे। नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें नेपाल के भूकम्प के बारे में खबर दी। यह नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व का ही प्रभाव था कि पूरा भारत एक साथ नेपाल के भूकम्प पीडि़तों की मदद के लिए खड़ा हो गया। नेपाल के साथ-साथ बिहार में भी भूकम्प से तबाही हुई थी। नरेन्द्र मोदी ने तुरन्त बिहार के भूकम्प पीडि़तों की मदद के लिए दिल्ली से भरपूर सहायता भेजी जिसकी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो नरेन्द्र मोदी के प्रतिद्वंद्वी जाने जाते हैं उन्होंने भी तारीफ की।
नरेन्द्र मोदी पर यह गलत इल्जाम लगाया जाता है कि उनकी सरकार ‘सूटबूट की सरकार’ है। असल में उनकी सरकार जनता की सरकार है। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘आदर्श ग्राम योजना’ और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अनेक कार्यक्रमों से जनता में यह छाप छोड़ी है कि देश बदल रहा है और वे जी जान से आम जनता के कल्याण में जुट जाएंगे। सबसे बड़ी बात तो यह हुई कि गत एक वर्ष में कोई बड़ा घोटाला सामने नहीं आया। कोयले का उत्पादन 25 प्रतिशत बढ़ा जिसके कारण बंद हुए अनेक बिजलीघर चालू हो गए।
स्वच्छ भारत अभियान के तहत एक बात तो अवश्य हुई कि गांव-गांव में अनेक शौचालय बनाए गए जिससे लोगों को खुले में शौच करने की आवश्यकता नहीं हुई। नरेन्द्र मोदी ने अपने सांसदों से कहा कि वे सांसद निधि की रकम कम से कम दो वर्षों तक गांवों में शौचालय बनाने में खर्च करें। यहां एक बात बताना आवश्यक है कि शौचालयों के पास चापाकल की भी व्यवस्था होनी चाहिये। क्योंकि पानी के अभाव में शौचालय गंदे रह जाते हैं। टायलेट के संबंध में मुझे स्वर्गीय निर्मला देशपांडे की याद आती है जो राज्यसभा सदस्य और आचार्य विनोबा भावे की दत्तक पुत्री थीं। उन्होंने एक अभियान चलाया था कि जिनके घरों में शादी विवाह हो, वे बारातियों को एक-दो मिठाई कम खिलावें पर वर-वधू की याद में एक चापाकल अवश्य लगवावें और उसके पास ही एक फलदायी पेड़ जैसे आम, जामुन, अमरूद आदि का पेड़ लगावें। चापाकल से लोगों की प्यास बुझेगी और जब समय बीतेगा और फलदायी वृक्ष फल देने लगेंगे तो लोग वर्षों तक वर-वधू को याद करेंगे।
इसमें कोई संदेह नहीं कि स्वच्छ भारत अभियान का पूरे देश में असर हुआ है और लोग उन लोगों से नफरत करने लगे हैं, जो गंदगी फैलाते हैं। गंगा की सफाई में भी ठोस प्रगति हुई है। परन्तु यह तब तक संतोषजनक नहीं हो सकती है जब तक गंगा में कानपुर जैसे शहरों में कारखानों की गंदगी का गिराया जाना नहीं रुके।
अंत में बात वहीं आती है जहां से आरंभ हुई थी। जन-धन योजना, बीमा योजना या पेंशन योजना जनता के कल्याण के लिए है अमीरों के लिए नहीं। अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और चीन में जिस तरह नरेन्द्र मोदी का भव्य स्वागत हुआ उससे हर भारतवासी का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। संक्षेप में, नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल है।
(लेखक पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत हैं)

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