मोदी की सफल 'आर्थिक कूटनीति'

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी अभी फ्रांस, जर्मनी और कनाडा के राजकीय दौरे के बाद भारत लौटे हैं। हर दृष्टिकोण से यह दौरा अत्यन्त ही महत्वपूर्ण और सफल रहा। फ्रांस में उन्होंने 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीददारी का समझौता किया। इससे भारतीय वायुसेना की घटती क्षमता में वृद्धि हुई।...

डॉ गौरीशंकर राजहंस

डॉ. गौरीशंकर राजहंस
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी अभी फ्रांस, जर्मनी और कनाडा के राजकीय दौरे के बाद भारत लौटे हैं। हर दृष्टिकोण से यह दौरा अत्यन्त ही महत्वपूर्ण और सफल रहा। फ्रांस में उन्होंने 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीददारी का समझौता किया। इससे भारतीय वायुसेना की घटती क्षमता में वृद्धि हुई। पिछले कुछ अरसे से भारतीय मीडिया में ये खबरें आ रही थी कि भारतीय लड़ाकू विमान जो रूस की मदद से बनाये गये थे वे बहुत पुराने हो गये हैं। जिसके कारण वायु सेना की क्षमता घटती जा रही है। एक झटके में मोदी ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदारी का समझौता कर भारत के पड़ोसियों को यह संदेश दिया कि अब भारत की वायुसेना की क्षमता किसी से कम नहीं है। इसके अतिरिक्त फ्रांस की एयरबस बनाने वाली कंपनी आने वाले सालों में भारत में 2 अरब यूरो का निवेश करेगी इससे 'मेक इन इंडियाÓ अभियान को गति मिलेगी। फ्रांस से हुए समझौते के बाद महाराष्ट्र के जैतापुर में बंद पड़ी परमाणु परियोजना भी आगे बढ़ेगी।
फ्रांस के बाद नरेन्द्र मोदी जर्मनी गए। उन्होंने जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ अनेक द्विपक्षीय समझौते किये और जर्मन कंपनियों को यह विश्वास दिलाया कि भारत में लाल फीताशाही अब सदा के लिए समाप्त हो गई है और जर्मन कंपनियां भारत में 'मैनुफैक्चरिंग हबÓ बनाने में मदद करें। आधुनिकतम तकनीक के मामले में जर्मन कंपनियों का जवाब नहीं है। यदि उनका पूरा सहयोग मिल जाए तो भारत में 'मेक इन इंडियाÓ कार्यक्रम पूरी तरह सफल हो सकता है। उन्होंने जर्मनी में वहां की चांसलर को ठीक ही कहा कि भारत का 'शेरÓ और जर्मनी का 'बाजÓ मिलकर विश्व में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं और यह जोड़ी दो देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है।
परन्तु सबसे महत्वपूर्ण उनकी कनाडा यात्रा हुई। 42 वर्षों के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री कनाडा गया था और जिस तरह कनाडा में उनका स्वागत हुआ वह अभूतपूर्व था। कनाडा के प्रधानमंत्री 'स्टीफन हार्फरÓ से उनकी दोस्ती बहुत पुरानी है। खासकर उस समय से जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। दोनों ने मिलकर अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर किये। 70 के दशक के पहले कनाडा से भारत के संबंध अत्यन्त मधुर थे। परन्तु 1974 में जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने प्रथम परमाणु विस्फोट किया था तो उसके विरोध में कनाडा ने भारत को यूरेनियम की सप्लाई बन्द कर दी थी। इस बार जब मोदी कनाडा गये और उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री को यह समझाने में सफलता प्राप्त कर ली कि भारत एक शांतिप्रिय देश है। उसे परमाणु ऊर्जा की बहुत अधिक जरूरत है और यह तभी संभव है जब कनाडा उसे यूरेनियम की सप्लाई करे। प्रधानमंत्री मोदी के तकर्कों से कनाडा के प्रधानमंत्री सहमत हो गये और कनाडा अगले पांच वर्षों तक 3000 मीट्रिक टन यूरेनियम की आपूर्ति करने पर सहमत हो गया। इस तरह अब रूस और कजाकिस्तान के बाद कनाडा ऐसा तीसरा देश हो गया है जो भारत को परमाणु ईंधन सप्लाई करेगा। सच कहा जाए कि मोदी की कनाडा यात्रा की यह सबसे बड़ी उपलब्धि हुई। मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री को यह समझाने में सफलता प्राप्त कर ली कि भारत को ऊर्जा की अत्यन्त आवश्यकता है। कोयले से ऊर्जा बनाने की जो तकनीक है वह बहुत पुरानी है और इस पर लागत भी बहुत अधिक आती है। इसलिए आवश्यकता है कि भविष्य के लिए कोई अक्षय ऊर्जा स्रोत खोजा जाए। कोयले से बनने वाली बिजली प्रदूषण के लिहाज से भी काफी खतरनाक है। प्रधानमंत्री मोदी के तर्क से कनाडा के प्रधानमंत्री सहमत हो गये और उन्होंने भारत को फिर से यूरेनियम की सप्लाई करने का वादा किया।
जिस तरह अमेरिका में मोदी ने अप्रवासी भारतीयों को संबोधित किया था उसी तरह कनाडा में टोरंटो शहर में भी उन्होंने प्राय 10 हजार अप्रवासी भारतीयों को संबोधित किया। भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में उनके सत्ता संभालने के बाद करीब 10 महीने में ही विश्वास का एक नया माहौल बन गया है। उन्होंने विकास को हर समस्या का समाधान बताते हुए पिछली सरकारों द्वारा छोड़ी गई गंदगी को साफ करने का संकल्प जताया। टोरंटो के 'रीकोह कोलेजियम स्टेडियमÓ में वैसा ही नजारा देखने को मिला जैसा न्यूयार्क के 'मेडिसन सक्वायरÓ में देखने को मिला था।
अप्रवासी भारतीयों में उत्साह भरते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी पंूजी उसके युवा हैं। 80 करोड़ की युवा आबादी, 80 करोड़ के सपने, 160 करोड़ मजबूत हाथ भारत की ऐसी निधि है जो कुछ भी चमत्कार कर सकती है। मोदी ने प्रवासी भारतीयों को बताया कि अब भारत में माहौल बदल गया है। अत: वे भारत आकर ज्यादा से ज्यादा निवेश करें। इसमें कोई संदेह नहीं कि जिस तरह अमेरिका में प्रवासी भारतीय संपन्न हैं उसी तरह कनाडा में भी संपन्न भारतीयों की कमी नहीं है। वे भारत में निवेश करना चाहते हैं। खासकर जिन गांव या शहरों से वे आए थे वहां वे स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सड़क बनाना चाहते हैं। परन्तु आज तक उन्हें इस दिशा में मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं था। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें विश्वास ही नहीं था कि यदि वे भारत में निवेश करेंगे तो उनकी पूंजी सुरक्षित रहेगी। इसके अलावा भारत की लालफीताशाही इतनी बदनाम हो चुकी है कि कोई भी प्रवासी भारतीय भारत में निवेश करने में आज तक हिचकिचा रहा था। मोदी के आश्वासन के बाद अब बातें बदल गई हैं। मोदी ने कनाडा के नागरिकों को वीजा की सुविधा का ऐलान किया। अब कनाडा का हर नागरिक जो भारत जाना चाहेगा उसे एयरपोर्ट पर ही वीजा मिल जाएगा। यह एक बड़ी बात है।
टोरंटो के बाद मोदी बैंकुवर गये। यहां याद रखने वाली बात है कि वर्षों पहले सिखों का एक बड़ा जत्था सर्वप्रथम कनाडा के बैंकुवर शहर ही गया था।  इन लोगों ने न केवल बैकुवर का कायाकल्प किया, बल्कि कनाडा के आर्थिक उत्थान में इनका भरपूर योगदान रहा। मोदी कनाडा के प्रधानमंत्री हार्पर के साथ सीधे गुरुद्वारा गये और वहां उन्होंने प्रार्थना में भाग लिया। वहां उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि कनाडा के सिखों ने अपने काम से भारत के लिए प्रतिष्ठा अर्जित की है। इसके बाद दोनों नेता लक्ष्मीनारायण मंदिर गये। वहां मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 'हिन्दुत्वÓ की बहुत अच्छी परिभाषा देते हुए कहा है कि 'हिन्दुत्वÓ धर्म नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है। कनाडा के विदा होते समय मोदी ने वहां के प्रधानमंत्री की भूरि भूरि प्रशंसा की और इस तरह भारत और कनाडा के संबंध एक बार फिर से मधुर हो गये। यदि कनाडा की सरकार, वहां की कंपनियां और वहां रहने वाले अप्रवासी भारतीय भारत में निवेश करेंगे तो इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इससे भारत के आर्थिक विकास को बहुत बल मिलेगा।
सबसे बड़ी बात यह  हुई कि इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ में अमेरिका की जगप्रसिद्ध मैगजीन 'टाइमÓ में एक बड़ा लेख लिखा जिसमें उन्होंने मोदी को सुधारों का मुखिया बताया। ओबामा ने लिखा है कि बचपन में मोदी ने अपने पिता को चाय बेचने में मदद की और आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के वे मुखिया हैं। गरीबी से प्रधानमंत्री तक के सफर की उनकी कहानी भारत के विकास की गतिशीलता और क्षमता का प्रतीक है। ओबामा ने यह भी कहा कि मोदी के पास गरीबी को कम करने, शिक्षा में सुधार तथा महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण का महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण है। मोदी सही मायने में भारत की तरह ही प्राचीनता और आधुनिकता का संगम हैं। ओबामा ने आज तक संसार के किसी नेता की इतनी तारीफ  नहीं की है।
कुल मिलाकर यह मानना ही होगा कि नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर से विदेशों में भारत का डंका बजा दिया है और एक बार फिर से भारत का सिर संसार में ऊंचा हो गया है। हर दृष्टिकोण से मोदी की तीन देशों की यात्रा पूरी तरह सफल रही।
(लेखक पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत हैं)

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