भाजपा की राह आसान करने में जुटे हैं कई दल

शेष नारायण सिंह : नई दिल्ली ! राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और नरेंद्र मोदी की मुलाकात के साथ-साथ ही बिहार विधान सभा का चुनाव बहुत ही दिलचस्प दौर में पहुंच गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस की और से पवार-मोदी भेंट को महाराष्ट्र की सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए हुई मुलाकात बताया जा रहा है। इसी तरह से कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव ने भी भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह से भेंट की थी।...

शेष नारायण सिंह

बिहार में तीसरा मोर्चा बनाने की हो रही कवायद
नई दिल्ली !    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार और नरेंद्र मोदी की मुलाकात के साथ-साथ ही बिहार विधान सभा का चुनाव बहुत ही दिलचस्प दौर में पहुंच गया  है। राष्ट्रवादी कांग्रेस की और से पवार-मोदी भेंट को महाराष्ट्र की सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए हुई मुलाकात बताया जा रहा है। इसी तरह से कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव ने भी भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह से भेंट की थी।
उनके अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई दिल्ली में मुलाकात हुई थी। इधर शरद पवार और प्रधानमंत्री की मुलाकात हुई और उधर पटना में उनकी पार्टी और मुलायम सिंह यादव की पार्टी का चुनावी गठबंधन का ऐलान कर दिया गया। यह दोनों पार्टियां साथ इसलिए आई हैं, जिससे बिहार में कांग्रेस और भाजपा को सत्ता से बाहर रखा जा सके। खबर यह भी है कि पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी को भी इस गठबंधन के साथ लिया जा सकता है।
यह अलग बात है कि पप्पू यादव, लालू यादव से अलग इसलिए हुए थे कि भाजपा उनको यादव वोटों के लिए साथ ले लेगी। उन्होंने जीतन राम मांझी के साथ भी राजनीतिक गठजोड़ की कोशिश की थी, लेकिन बात बनी नहीं। भाजपा ने जंगल राज को चुनावी मुद्दा बना रखा है। इसलिए लगता है कि लालू यादव के उन साथियों को साथ लेने से परहेज कर रही है जो लालू के राज में जंगल राज के साथ पर्याय माने जाते थे। चर्चा तो यह भी है कि असदुद्दीन ओवैसी को भी साथ लेने की कोशिश की जाएगी हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की तारिक अनवर इस बात को खारिज करते हैं। समाजवादी पार्टी के आला नेता किरणमय नंदा ने तो दावा किया है कि पी ए संगमा की पार्टी समेत करीब 8 से 10 छोटी पार्टियों को साथ लाया जा सकता है, जिन सबका उद्देश्य कांग्रेस और भाजपा को सत्ता से बाहर रखना है। कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने में तो यह गठबंधन निश्चित रूप से कामयाब हो जाएगा, क्योंकि उनके लिए कांग्रेस पार्टी ही पिछले 25 साल से काम कर रही है, लेकिन आम तौर पर माना जा रहा है कि यह सभी पार्टियां किसी ने किसी रूप में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को सत्तासीन करने में मदद करेंगी।  बिहार के तेजी से  घूमते राजनीतिक घटनाक्रम में अब भाजपा को चुनौती देने वाला लालू यादव और नीतीश कुमार का महागठबंधन अब उनकी दो पार्टियों और कांग्रेस का गठबंधन ही रह गया है। इस गठबंधन की एक कमजोरी यह भी  है  कि लालू यादव अभी भी स्वर्ण जातियों के सभी सदस्यों को अपना विरोधी मान रहे हैं, जबकि नीतीश कुमार ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सभी जातियों को साथ लेने की कोशिश की थी, जबकि भाजपा ने अपने गठबंधन के साथियों के साथ सीटें फाइनल कर ली हैं और  ऐसे लोगों को भी लाइन पर लगा दिया है जो संभावित जीत में उनकी मदद करेगें। बिहार में चुनाव में एक बार फिर अमित शाह का चुनाव प्रबंधन कौशल साफ नजर आने लगा  है। चाहे असदुद्दीन ओवैसी हों या शरद पवार, चाहे पप्पू यादव हों या मुलायम सिंह यादव सभी अमित शाह की पार्टी की सफलता में अपना योगदान करने को तैयार नजर आ रहे हैं।


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