फिदेल कास्त्रो : एक क्रांतिकारी युगपुरुष

सीताराम येचुरी : कामरेड फिदेल कास्त्रो के निधन के साथ एक युग का अंत हो गया है। 20वीं सदी के उत्तराद्र्घ में वह विश्व राजनीतिक रंगमंच पर छाए रहे थे जैसे कोई महाकाय पुरुष वैश्विक महत्व के सभी मुद्दों के बीच से तेजी से कदम बढ़ाता चला जा रहा हो।...

सीताराम येचुरी

कामरेड फिदेल कास्त्रो के निधन के साथ एक युग का अंत हो गया है। 20वीं सदी के उत्तराद्र्घ में वह विश्व राजनीतिक रंगमंच पर छाए रहे थे जैसे कोई महाकाय पुरुष वैश्विक महत्व के सभी मुद्दों के बीच से तेजी से कदम बढ़ाता चला जा रहा हो। इस प्रक्रिया में कभी क्षण भर के लिए भी उन्होंने एक कम्युनिस्ट के नाते, मानवता की पूर्ण मुक्ति तथा स्वतंत्रता के लिए काम करने के लक्ष्य को अपनी नजरों से ओझल नहीं होने दिया। हालांकि, वह शरीर से अब हमारे बीच नहीं हैं, वह दुनियाभर में संघर्षशील मानवता के विराट बहुमत के लिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे।
इस प्रेरणा का आधार यह है कि कामरेड फिदेल कास्त्रो ने एक पिछड़े, बगवानी आधारित लगभग दास अर्थव्यवस्था वाले समाज के, एक आधुनिक समाजवादी देश में रूपांतरण का रास्ता दिखाया और यह रूपांतरण कराया था। प्रेरणा इस तथ्य पर आधारित है कि यह वाकई संभव हुआ है। फिदेल के नेतृत्व में क्यूबा ने मानव विकास के क्षेत्र में निर्विवाद रूप से प्रशंसनीय नतीजे लाकर दिखाए हैं, जैसे नस्लवाद का अंत, नारी मुक्ति, निरक्षरता का उन्मूलन, नवजात मृत्यु दरों में भारी कमी, सामान्य ज्ञान का ऊंचा स्तर, आदि। शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा शोध तथा खेल-कूद के क्षेत्रों में क्यूबा ने जो मुकाम हासिल किया है, उससे अनेक विकसित देश भी रश्क करते हैं।
क्यूबा ने यह सब हासिल किया है, जघन्यतम साम्राज्यवादी आर्थिक नाकेबंदी तथा घेराव को चुनौती देते हुए तथा उसका मुकाबला करते हुए। फिदेल का साबका आइजनहावर से लेकर बुश-द्वितीय तक, पूरे दस अमेरिकी राष्टï्रपतियों से पड़ा था। उनकी हत्या की पूरी 600 कोशिशें हुई थीं। अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा छेड़े गए आर्थिक युद्घ और क्यूबा को नष्टï करने के लिए तोड़-फोड़ की उसकी तमाम कोशिशों का सफलतापूर्वक मुकाबला करने में, जिनको सीआईए के पूर्व-एजेंट फिलिप एगी ने इतनी अच्छी तरह से दस्तावेजबद्घ किया है, उन्होंने क्यूबा का नेतृत्व किया था।
वह सभी क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं क्योंकि अपने जीवन तथा कार्य से उन्होंने दिखाया है कि एक कम्युनिस्ट क्रांतिकारी, अपनी आखिरी सांस तक व्यवहार से सीखता है। उन्होंने 1953 में घृणित तानाशाह बाटिस्टा के अमेरिका के  कठपुतली निजाम के खिलाफ, क्यूबा के सामाजिक रूपांतरण के लिए, छापामार लड़ाकों के एक दल का नेतृत्व किया था। पर यह क्रांतिकारी कोशिश विफल हो गई। बाटिस्टा निजाम ने उन्हें जेल में डाल दिया। इस सिलसिले में मुकदमे के दौरान यह स्पष्टï करते हुए कि वे क्यूबा के लिए और उसकी जनता के लिए क्या चाहते थे, फिदेल ने विश्वासपूर्ण भविष्यवाणी की थी: ‘चाहे मुझे सजा दे दो। इससे फर्क नहीं पड़ता है। इतिहास मुझे सही साबित करेगा।’
सचमुच इतिहास ने उन्हें सही साबित किया।
इसके छ: वर्ष बाद ही, 1959 की पहली जनवरी को, फिदेल और उनके क्रांतिकारी दस्ते ने, जिसमें चे ग्वेअरा तथा दूसरे कई प्रसिद्घ क्रांतिकारी शामिल थे, तानाशाह की सेना को शिकस्त दे दी और क्यूबा के समाजवादी रूपांतरण का रास्ता तैयार कर दिया।
जिस रोज बाटिस्टा की सेना को शिकस्त देने के बाद, विजयी 32 वर्षीय फिदेल ने हवाना में मार्च किया, उसी रोज फ्रांस में पांचवे गणराज्य के पहले राष्टï्रपति के रूप में चाल्र्स द गाल को शपथ दिलाई जा रही थी। ब्रिटेन तथा थाइलेंड के राजाओं/ रानियों ने ही शासक का अपना रस्मी ताज, क्यूबा में फिदेल के नेतृत्व से ज्यादा अर्से तक बनाए रखा होगा। वास्तव में वह सबसे लंबे अर्से तक अपने देश की सेवा करने वाले नेता थे, जिन्होंने दृढ़तापूर्वक समाजवादी क्यूबा की हिफाजत की थी और उसे सुदृढ़ किया था।
फिदेल के जीवन तथा कार्य में कम्युनिस्ट क्रांतिकारी की जो एक और निशानी हम देख सकते हैं, वह थी इस अनुल्लंघनीय लेनिनवादी सिद्घांत को लागू करने की उनकी अनथक कोशिश कि द्वंद्ववाद का सार है, ठोस परिस्थितियों का ठोस विश्लेषण। सोवियत संघ का पराभव असंदिग्ध रूप से क्यूबा की अर्थव्यवस्था और क्यूबाई समाजवाद के लिए एक पंगु कर देने वाला प्रहार था। दुनिया में बहुत कम ही लोग रहे होंगे जिन्हें इस पर जरा भी भरोसा रहा होगा कि समाजवादी क्यूबा इस धक्के को झेल जाएगा। अंतरराष्टï्रीय खबरिया पत्रिका टाइम  ने तो अपने कवर पेज पर फिदेल की एक तस्वीर तक छाप दी थी, जिसके साथ कैप्शन लगाया गया था: ‘कास्त्रो का क्यूबा: एक सपने का अंत।’
वास्तव में सोवियत संघ के पराभव के कुछ ही अर्सा बाद, 1993 के सितंबर में, कामरेड ज्योति बसु के साथ सीपीआई (एम) के एक प्रतिनिधिमंडल में मुझे क्यूबा जाने का मौका मिला था। हमारी इस यात्रा के दौरान, एक शाम को, जब ज्योति बसु और मैं दिन के अपने कार्यक्रमों के बाद आराम करने जा रहे थे, रात करीब ग्यारह बजे अचानक हमें संदेश मिला कि कमांदांत हमसे मुलाकात करना चाहते हैं। हम देर रात को मिले इस निमंत्रण से हैरान थे, फिर भी हम फिदेल से मुलाकात करने के लिए तैयारी में लग गए। जब हमने उनके दफ्तर में प्रवेश किया, हमने उन्हें क्यूबा के खनिज भंडारों तथा अन्य आर्थिक संसाधनों के नक्शों तथा चार्टों के अध्ययन में तल्लीन पाया। वह उस क्यूबाई अर्थव्यवस्था को नया रूप तथा नयी दिशा देने में जुटे हुए थे, जो इससे पहले तक लगभग पूरी तरह से सोवियत संघ से उदार आयातों के भरोसे खड़ी रही थी। अचानक ये आयात बंद हो गए थे। तेल के आयातों का बंद होना खासतौर पर पंगु कर देने वाला था, जिसने समाजवादी क्यूबा के चक्के करीब-करीब जाम कर दिए थे। हमारे सामने फिदेल बैठे थे जो क्यूबा के लिए एक वैकल्पिक यात्रा पथ तैयार करने में जुटे हुए थे।
अमेरिकी साम्राज्यवाद की मुजरिमाना नाकेबंदी क्यूबा को अन्य देशों के साथ व्यापार का लाभ उठाने से अब भी रोक रही थी। इन हालात में क्यूबा को आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए अपने ही रास्ते निर्मित करने थे। इस समय तक क्यूबा एक-फसली अर्थव्यवस्था बना हुआ था और पूरी तरह से गन्ने के ही उत्पादन पर निर्भर था। ऐसे हालात में फिदेल, क्यूबा के लोग जिसे ‘रैड डस्ट’ कहते हैं उसके यानी निकल के खनन के और अमेरिकी नाकेबंदी तथा घेराव को धता बताकर बिरादराना लातीनी अमेरिकी देशों के साथ आर्थिक रिश्ते बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रहे थे।
हमारी बातचीत में, जो दो घंटे से ज्यादा चली और जिसमें सोवियत संघ के पराभव के क्यूबा पर प्रभाव समेत अनेक मुद्दों पर हमने चर्चा की, फिदेल ने अचानक भारत में इस्पात उत्पादन की मात्रा, खेती की जमीन तथा सिंचित भूमि जैसे मामलों में विस्तृत तथ्यात्मक जानकारियां मांगनी शुरू कर दीं। ज्योति बसु के लिए ऐसे सवाल पूछा जाना और वह भी आधी रात के बाद, पूरी तरह से अप्रत्याशित था। तब फिदेल मुझसे मुखातिब हुए और बोले कि ज्योति बसु की उम्र को देखते हुए, उन्हें तो फिर भी माफ किया जा सकता था। लेकिन ऐसी जानकारियां मेरी तो उंगलियों के पोरों पर होनी चाहिए थी। उसके बाद से अलग-अलग मौकों पर दो बार मुझे फिदेल से मिलने का मौका मिला था। हर बार आंकड़ों की ताजातरीन हैंडबुक मेरी जेब में थी।
    फिदेल से हमारी उक्त मुलाकात के कुछ ही वर्ष बाद खुद फिदेल ने कहा था: ‘क्यूबाई क्रांति के बच जाने पर कोई एक पैसे का दांव लगाने को तैयार नहीं था।’ फिदेल ने कहा था कि वे यह चमत्कार कर सके थे, ‘क्योंकि क्रांति को हमेशा से राष्टï्र का, एक प्रतिभाशाली आबादी का, जो बढ़ते पैमाने पर एकजुट, शिक्षित तथा लड़ाकू है, समर्थन हासिल था और बढ़ते पैमाने पर हासिल रहेगा।’
स्वेच्छा से राज्याध्यक्ष की जिम्मेदारी छोडऩे और अपने से जूनियर कामरेडों के हाथों में सत्ता सौंपने के बाद भी वह ‘रिफ्लेक्शन्स’ के माध्यम से, तमाम महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर, जिसमें अंतरराष्टï्रीय तथा क्यूबा के घरेलू घटनाक्रम दोनों ही शामिल थे, अपनी राय से लोगों को अवगत कराते रहे थे।
एक सच्चा क्रांतिकारी होने के नाते फिदेल की दिलचस्पियों का दायरा बहुत विस्तृत था। विज्ञान व प्रौद्योगिकी की ताजातरीन प्रगतियों से लेकर, सौंदर्यशास्त्र तक और धर्म व ईश्वर के साथ मनुष्यों के रिश्ते तक, विषयों के आश्चर्यजनक रूप से विराट संसार में वह गहरी दिलचस्पी के साथ चर्चा कर सकते थे। उनकी इस बहुविषयकता ने उन्हें हमेशा एक चुंबकीय व्यक्तित्व बनाए रखा था। उनके इन महान बौद्घिक उद्यमों का साक्ष्य हैं, अपने जमाने की कुछ सबसे ऊंची सर्जनात्मक प्रतिभाओं के साथ उनके निजी संवाद। इस सूची में दूसरे अनेक बुद्घिजीवियों के अलावा अर्नेस्ट हेमिंग्वे, ज्यां पॉल सात्र्र, साइमन द बुवा, पाब्लो नेरुदा, गाब्रिएल गार्सिया मार्खेज़, खोसे सरामागो के नाम शामिल हैं।
फिदेल के इस गुण का भी प्रभाव था कि समूचे लातीनी अमेरिका में साम्राज्यवादविरोधी लोकप्रिय संघर्षों को ताकत देने में फिदेल और क्यूबाई क्रांति ने धुरी की भूमिका अदा की थी। फिदेल के नेतृत्व में क्यूबा और भारत के बीच रिश्तों का खास महत्व रहा था। फिदेल तथा क्यूबाई क्रांतिकारियों ने अपनी तमाम आर्थिक कठिनाइयों तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद से निरंतर संघर्ष करते रहने की मजबूरी के बावजूद, एक क्षण को भी सर्वहारा अंतरराष्टï्रवाद के बुनियादी कम्युनिस्ट सिद्घांत को अपनी आंखों से ओझल नहीं होने दिया था। क्यूबा के डॉक्टरों, शिक्षकों तथा सैनिकों ने लंबी-लंबी दूरियां तय कर अफ्रीका में अंतरराष्टï्रीय मिशनों को अंजाम दिया था और दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, जाम्बिया, मोजाम्बीक तथा दूसरे अनेक देशों में, अपनी मुक्ति के लिए संघर्षरत जनगण की मदद की थी।
कामरेड फिदेल का जीवन और कार्य इसका शानदार सबूत है कि एक कम्युनिस्ट क्रांतिकारी, एक बेहतरीन इंसान होता है।                                                                                                     


 

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