देश का हो रहा है आर्थिक कायाकल्प

डॉ. गौरीशंकर राजहंस : संसद के सत्रों में सबसे महत्वपूर्ण 'बजट सत्रÓ होता है। क्योंकि इसी सत्र में सरकार की आर्थिक नीतियों का विस्तार से खुलासा होता है। इसी कारण सारे देश की निगाह बजट सत्र पर टिकी रहती है। बजट सत्र में सर्वप्रथम राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है जिसमें सही अर्थ में सरकार की नीतियों का वर्णन रहता है। इस भाषण को कैबिनेट तैयार करता है। राष्ट्रपति उसे केवल संसद के संयुक्त सत्र में पढ़ देते हैं। उसके बाद 'रेल बजटÓ संसद में पेश होता है और अंत में सबसे महत्वपूर्ण 'आम बजटÓ संसद में पेश होता है जिसमें सरकार की आर्थिक नीतियों का खुलासा किया जाता है।...

डॉ गौरीशंकर राजहंस

संसद के सत्रों में सबसे महत्वपूर्ण 'बजट सत्रÓ होता है। क्योंकि इसी सत्र में सरकार की आर्थिक नीतियों का विस्तार से खुलासा होता है। इसी कारण सारे देश की निगाह बजट सत्र पर टिकी रहती है। बजट सत्र में सर्वप्रथम राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है जिसमें सही अर्थ में सरकार की नीतियों का वर्णन रहता है। इस भाषण को कैबिनेट तैयार करता है। राष्ट्रपति उसे केवल संसद के संयुक्त सत्र में पढ़ देते हैं। उसके बाद 'रेल बजटÓ संसद में पेश होता है और अंत में सबसे महत्वपूर्ण 'आम बजटÓ संसद में पेश होता है जिसमें सरकार की आर्थिक नीतियों का खुलासा किया जाता है।
इस बार राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्षी दलों की बोलती बंद कर दी। प्रधानमंत्री पर विपक्ष के दल यह कहकर हमला कर रहे थे कि उनकी पार्टी के कई नेता सांप्रदायिकता की बातें करते हैं जिसकी ओर से वे आंख मूंदे बैठे हैं। लोकसभा में हुंकार भरते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वे सांप्रदायिकता को सिरे से खारिज करते हैं। उनकी सरकार का एक ही धर्म है - 'भारतÓ, एक ही धर्मग्रंथ है 'भारत का संविधानÓ, एक ही भक्ति है 'भारत भक्तिÓ, एक ही पूजा है 'सवा सौ करोड़ देशवासियों का कल्याणÓ। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी को भी धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव करने या कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। देश संविधान के दायरे में ही चलेगा। उन्होंने कहा कि काले धन की वापसी से सरकार भटकने या हटने वाली नहीं है। लेकिन सब कुछ संविधान के दायरे में होना चाहिये और इसी से समस्याओं का समाधान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सभी मिल जाएं तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार मिटा सकते हैं। प्रधानमंत्री ने काला धन विदेशी बैंकों से भारत लाने के वायदे की याद दिलाते हुए कहा कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उनकी सरकार इस रास्ते से डिगेगी नहीं। बाद में कोई यह आरोप नहीं लगाये कि उत्पीडऩ हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई सरकार ने ही 'एसआईटीÓ बनाई है। 'कोल ब्लॉकÓ के भ्रष्टाचार की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि जिसे 'जीरो लॉस थ्यौरीÓ बताया जा रहा था उसी कोयले के जरिये राज्यों का खजाना भर रहा है। हर राष्ट्र का अपना दर्शन होता है। उनकी सरकार 'सबका साथ, सबका विकासÓ सिद्धांत पर चल रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आ•ाादी के बाद पहली बार हिन्दुस्तान के राज्यों के पास जो खजाना है और भारत सरकार के पास जो खजाना है उस पूरे खजाने का हिसाब लगाएंगे तो निकलेगा कि 62 फीसदी खजाना राज्यों के पास है और 38 फीसदी खजाना भारत सरकार के पास है। राज्यों को विकास के लिए अवसर देना चाहिये और इस काम को भारत सरकार राजनीति से परे होकर कर रही है।
उसके बाद आया 'रेल बजटÓ । यह हर दृष्टिकोण से पिछले रेल बजटों से बेहतर है। आज तक होता यही था कि हर रेल मंत्री अपने राज्य में ताबड़तोड़ नई ट्रेनें चलाने और नई रेल लाइनें बिछाने की घोषणा कर देते थे। लेकिन उनके पद से हटते ही सब कुछ धराशाई हो जाता था। परन्तु नये रेल मंत्री ने लीक से हटकर अलग कुछ किया है जिसके लिए वे प्रशंसा के पात्र हैं। उन्होंने न तो नई ट्रेनें चलाने की घोषणा कीं और न ही नई रेल लाइनें बिछाने की। इसके विपरीत उन्होंने ऐलान किया कि लंबित रेल परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा और यात्री सुविधाओं और सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। सुरेश प्रभु के रेल बजट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विजनÓ की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
रेल मंत्री ने किराये नहीं बढ़ाया जिससे आम जनता को बड़ी राहत हुई। उन्होंने रेल बजट को राजनैतिक तुष्टिकरण का औजार नहीं बनाया। इसके विपरीत सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के 'स्वच्छ भारतÓ और 'मेक इन इंडियाÓ जैसे मिशनों को पूरा करने का संकल्प लिया। वित्त पोषण के लिये 'प्राईवेट पब्लिक पार्टनरशिप' पर जोर दिया। रेलवे के प्रबंध तंत्र के विकेन्द्रीकरण पर जोर दिया। धन के सही इस्तेमाल की केन्द्रीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की। उन्होंने कहा कि यात्रियों से बेहतर व्यवहार के लिए स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाएगी।
रेल मंत्री सुरेश प्रभु की कोशिशें सफल हों, सब यही चाहते हैं। परन्तु जनता को राहत तभी मिलेगी जब यात्रियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा की पूरी व्यवस्था हो। सफाई के नाम पर रेल डिब्बों की हालत अत्यन्त ही दयनीय है। सबसे दयनीय हालत जनरल डिब्बों में बिहार, उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों की है। हाल में अनेक टीवी चैनलों पर उनकी दुर्दशा दिखाई गई है। आशा है सुरेश प्रभु इस स्थिति में निश्चित रूप से सुधार करेंगे जिससे आम पैसेंजरों को राहत मिल सके।
सबसे अधिक महत्वपूर्ण 'आम बजटÓ था। जिस पर भारत की जनता की ही नहीं, सारे संसार की निगाहें टिकी हुई थीं। सब यही देखना चाहते थे कि मोदी का बजट विकासोन्मुख होता है अथवा नहीं। इस संदर्भ में यही कहा जा सकता है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जो आम बजट पेश किया है वह हर दृष्टिकोण से संतुलित है जिसमें हर वर्ग पर पूरा ध्यान दिया गया है।
विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की कि जेटली का बजट केवल अमीरों को देखता है, गरीबों को नहीं। इसके जवाब मेंं वित्त मंत्री ने कहा कि यदि उद्योगों से कमाऊंगा तभी तो गरीबों के लिए समाज कल्याण की योजनाएं चला पाऊंगा। जेटली ने सही अर्थ में 'सबका साथÓ दिया। वित्त मंत्री ने कहा कि 'कारपोरेट टैक्सÓ को 4 वर्ष में 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करेंगे। इसके अतिरिक्त छोटे उद्यमियों के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की कोष की स्थापना की जाएगी। मुद्रा बैंक की स्थापना की जाएगी। काले धन पर अंकुश के लिए विशेष विधेयक बनेगा जिसमें 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान होगा। आयकर स्लैब नहीं बदलेगा। परन्तु वाहन भत्ते, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन से 4.44 लाख रुपये तक की छूट मिलेगी।
जहां तक 'कारपोरेट टैक्सÓ की बात है, पड़ोस के 'आसियानÓ देशों में 21 फीसदी कारपोरेट टैक्स है। इसीलिए सारी दुनिया के निवेशक, यहां तक कि भारत के निवेश भी वहां जा रहे हैं। अत: इन निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 'कारपोरेट टैक्सÓ कम करना आवश्यक था। 'वित्त आयोगÓ की सिफारिशों को मानकर राज्यों को 62 प्रतिशत राजस्व दिया जाने वाला है। अत: कृषि की उन्नति का भार अधिकतर राज्यों के ऊपर ही होना उचित है।
भारत के बुनियादी ढांचागत विकास पर 70 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे इससे औद्योगिक विकास तो होगा ही, युवकों को भरपूर नौकरी मिलेगी। बिजली क्षेत्र में पांच और अल्ट्रा मेगा बिजली परियोजनाएं स्थापित होंगी जिससे गांव और शहर दोनों लाभान्वित होंगे। सबसे बड़ी बात सरकार के लिए 'सबके लिए घरÓ योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 4 करोड़ और शहरी क्षेत्रों में 2 करोड़ पक्के आवास सरकार बनाएगी।
कुल मिलाकर वर्तमान परिस्थितियों में इससे अधिक संतुलित बजट हो ही नहीं सकता था। अभी तो संसद में और संसद के बाहर आम बजट के प्रावधानों पर जमकर चर्चा होती रहेगी। चर्चा का परिणाम जो कुछ निकले। परन्तु इतना सत्य है कि इस कल्याणकारी बजट के लिए नरेन्द्र मोदी और अरुण जेटली दोनों बधाई के पात्र हैं।
(लेखक पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत हैं)


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