दक्षिण चीनी सागर पर चीन नरम

राजीव रंजन श्रीवास्तव : आसियान देशों के 23 वें शिखर सम्मलेन में भारत के अलावा संयुक्त राष्ट्र अमरीका, रूस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्ड जैसे देशों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। ...

राजीव रंजन श्रीवास्तव

राजीव रंजन श्रीवास्तव
बन्दर सेरी बेगवान, बु्रनेई !    आसियान देशों के 23 वें शिखर सम्मलेन में भारत के अलावा संयुक्त राष्ट्र अमरीका, रूस, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैण्ड जैसे देशों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। इस वर्ष आसियान सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि इसी सम्मेलन में पूर्वी एशियाई देशों के साथ 8वीं शिखर बैठक भी आयोजित थी। जिसमें आसियान को मजबूत करने के अलावा आपसी मतभेदों को मिटाने के प्रयास भी हो हुए। ब्रुनेई की राजधानी बन्दर सेरी बेगवान के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केन्द्र (आसियान) में चीन के प्रधान मंत्री ली केकियांग पर सदस्य देशों की नजरें टिकी हुई थी। क्योंकि दक्षिण चीनी सागर (साउथ चाइना सी) में व्यापार और माल वाहक जहाजों की आवाजाही को लेकर काफी मतभेद हैं।  यह मतभेद जापान और आसियान सदस्य देशों ,खासकर वियतनाम के लिए समय-समय पर भारी पड़ता है। माना जा रहा है कि आसियान देशों की बढ़ती घनिष्टता और एकजुटता को देखते हुए चीन के तेवर कमजोर हुए हैं।
यही कारण है कि चीनी प्रधानमंत्री ने कल अपने संबोधन को दक्षिण चीनी सागर पर केन्द्रित रखते हुए कहा कि चीन इस मुद्दे से जुड़े हर विवाद को द्विपक्षीय वार्ता के तहत दूर कर लेना चाहता है। उन्होंने अपनी बात को पुरजोर तरीके से  रखते हुए कहा कि इस सागर में पिछले एक साल में एक लाख से यादा कार्गो जहाजों का परिवहन हुआ है। ली ने कहा कि दक्षिण चीनी सागर के लिए आचार संहिता की घोषणा से इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली में मदद मिलेगी। उन्होंने आशा जताई कि जल्द ही आसियान देश एक सर्वमान्य आचार संहिता का निर्माण कर उसका पालन करना शुरू कर देंगे। चीन का आसियान के मंच से दक्षिणी चीनी सागर को लेकर विवाद के निपटारे पर सकारात्मक रुख यह स्पष्ट करता है कि आसियान सशक्त हो रहा है।
एशिया प्रशांत में शांति चाहते हैं भारत-ऑस्ट्रेलिया
आसियान शिखर सम्मेलन के लिए बु्रनेई आए ऑस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री टोनी एबट के साथ आज द्विपक्षीय वार्ता में भारत के प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच जरी सामरिक समझौते और एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृध्दि पर चर्चा की। नालंदा विश्वविद्यालय के लिए ऑस्ट्रेलिया से आर्थिक मदद भी मिल रही है।  ऑस्ट्रेलिया ने भारत से वादा किया कि नालंदा के पुनरुत्थान और सत्र की शुरुआत के बाद ऑस्ट्रेलियाई छात्रों के दल को वह भारत पढ़ने के लिए भेजेगा। आण्विक समझौते पर भी चर्चा हुई।
सामरिक भागीदारी को आगे बढ़ाएंगे भारत-जापान
 द्विपक्षीय वार्ता के तहत भारत के प्रधान मंत्री और जापान के प्रधान मंत्री शिंजो अबे के साथ लम्बी मुलाकात हुई।  इस मुलाकात में दोनों देशों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति स्थापना और सामरिक भागीदारी पर जोर दिया। जापान की मदद से मुंबई-अहमदाबाद सुपर फास्ट रेल ट्रैक, नालंदा विश्वविद्यालय के लिए विशेष आर्थिक मदद और इलेक्ट्रोनिक हब की स्थापना की जा रही है। ज्ञात हो कि भारत ने अपनी लुक इस्ट पालिसी में जापान के साथ रिश्तों को काफी मजबूत किया है।

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