केजरीवाल का अग्निपथ

डा. गौरीशंकर राजहंस : अरविन्द केजरीवाल की 'आपÓ पार्टी ने जनता से 70 वायदे किए हैं। अब चुनाव समाप्त हो गया है। उसके परिणाम भी घोषित हो गये हैं और सारे देश के लोग यह देखकर आश्चर्यचकित हो गये हैं कि 'आपÓ पार्टी को इतना भारी बहुमत कैसे मिला? 'आपÓ पार्टी के खिलाफ जो पार्टियां हैं अब खुलेआम कह रही हैं कि केजरीवाल ने जनता से झूठे वायदे किये। उन्हें बहलाया और फुसलाया। इसी कारण उन्हें इतनी बड़ी सफलता मिली। सच शीघ्र ही सामने आ जाएगा। ...

डॉ गौरीशंकर राजहंस

अरविन्द केजरीवाल की 'आपÓ पार्टी ने जनता से 70 वायदे किए हैं। अब चुनाव समाप्त हो गया है। उसके परिणाम भी घोषित हो गये हैं और सारे देश के लोग यह देखकर आश्चर्यचकित हो गये हैं कि 'आपÓ पार्टी को इतना भारी बहुमत कैसे मिला? 'आपÓ पार्टी के खिलाफ जो पार्टियां हैं अब खुलेआम कह रही हैं कि केजरीवाल ने जनता से झूठे वायदे किये। उन्हें बहलाया और फुसलाया। इसी कारण उन्हें इतनी बड़ी सफलता मिली। सच शीघ्र ही सामने आ जाएगा।
मुख्यमंत्री की शपथ लेने के पहले ही केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और यह मांग की कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिये। दूसरे शब्दों में पुलिस जो केन्द्र के पास है और भूमि जो अब तक डीडीए के पास है वह दिल्ली सरकार के अधीनस्थ हो। क्या केन्द्रीय सरकार केजरीवाल की इस मांग पर राजी होगी? इस संदर्भ में मैं व्यक्तिगत अनुभव पाठकों से बांटना चाहता हूूं। 8वीं लोकसभा में बड़े जोर की बहस हो रही थी कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिये और दिल्ली सरकार का पुलिस पर नियंत्रण होना चाहिये। मुझे अभी भी याद है कि उस समय गृहमंत्री बूटा सिंह थे। ममता बनर्जी, जयप्रकाश अग्रवाल और मैंने जोरशोर से यह मांग की थी कि हर हालत में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा तो मिलना ही चाहिये। हमारे शोरशराबे के बाद कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने भी यही मांग उठाई और बूटा सिंह खिन्न हो उठे। लंच ब्रेक में वे मेरी सीट पर आए और मुझे कहा कि मुझे प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तुरन्त बुलाया है। मुझे घोर आश्चर्य हुआ। क्योंकि कोई कारण नहीं था कि प्रधानमंत्री मुझे बुलाते। राजीव गांधी संसद भवन में अपने कमरे में टीवी पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्रवाई देख रहे थे। जब मैं उनसे मिला तब उन्होंने हैरान होकर पूछा कि यह बेतुकी मांग कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए और पुलिस दिल्ली सरकार के अधीनस्थ हो, आप लोग क्यों उठा रहे हैं? उसके बाद उन्होंने कहा कि हमें 'यथार्थवादीÓ होना चाहिये। सब दिन केन्द्र में और दिल्ली में कांग्रेस पार्टी की ही सरकार नहीं रहेगी। हो सकता है कि कुछ अरसे के बाद दिल्ली में किसी दूसरी पार्टी की सरकार बन जाए। उस हालत में तो रोज-रोज झंझट होते रहेंगे। इसीलिए बहुत सोच समझकर यह निर्णय किया गया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जाएगा और पुलिस केन्द्र सरकार के अधीन ही रहेगी। हम लोग जो कांग्रेसी सदस्य थे, राजीव गांधी की बात मान गये और बूटा सिंह के इस अनुरोध पर राजी हो गए कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा।
तब से आज तक कई बार विभिन्न पार्टियों ने यह मांग की है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। हर चुनाव में अपने घोषणापत्र में विभिन्न पार्टियां यही मांग करती आ रही हैं। लेकिन सच यह है कि कोई भी पार्टी जो केन्द्र में सत्ता में है, नहीं चाहती है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए और पुलिस उसके अधीन की जाए। शीला दीक्षित के समय में भी दिल्ली सरकार बार-बार यही कहती रही कि हम महिलाओं के सुरक्षा इसलिए नहीं कर पा रहे हैं कि पुलिस दिल्ली सरकार के अधीनस्थ नहीं है। जो बात शीला दीक्षित के समय में सही थी वही बात केजरीवाल के समय में भी सही है। अत: केजरीवाल लाख सिर पटकें सच यह है कि केन्द्र किसी भी हालत में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं देगा। क्योंकि कोई भी पार्टी किसी भी हालत में अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना नहीं चाहती है।
अभी कुछ दिनों पहले मैं ट्रेन से आगरा जा रहा था। कंपार्टमेंट में बैठे प्राय: सभी लोग एक स्वर से कहने लगे कि केजरीवाल ने जो लम्बे-चौड़े वायदे जनता से किए हैं उन्हें वे किसी भी हालत में पूरा नहीं कर पाएंगे। क्योंकि दिल्ली सरकार का खजाना पूरी तरह खाली है। यदि सब्सिडी देकर बिजली और पानी के बिलों में लोगों को राहत दी जाएगी तो वह पैसा आखिर आए कहां से? इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में कहा है कि जो लोग मुफ्त बिजली देने का वायदा करते हैं उनके पास तो बिजली है ही नहीं। यह बात 100 प्रतिशत सही है। क्योंकि दिल्ली सरकार अपनी खपत की केवल 20 प्रतिशत बिजली का उत्पादन करती है। बाकी बिजली दूसरे राज्यों से आती है, जो पूर्णत: केन्द्र के नियंत्रण में है। यदि दूसरे राज्य कोई बहाना बनाकर दिल्ली को कम बिजली देना शुरू कर दें तो दिल्ली में एक बार फिर से अन्धकार छा जाएगा और हाहाकार मच जाएगा।
एक बात और है कि केजरीवाल की पार्टी ने यह वायदा किया है कि 400 यूनिट तक जो बिजली की खपत करते हैं उन्हें बिजली के बिल का आधा पैसा ही देना होगा। लेकिन यदि किसी ने 401 यूनिट खपत कर ली तो उसे पूरा पैसा देना होगा। प्रश्न यह है कि 'आपÓ पार्टी ने तो चुनाव के पहले कहा था कि दिल्ली की सारी जनता को बिजली के बिल का आधा पैसा ही भरना होगा। अब ये 400 यूनिट वाली बात कहां से आ रही है और कैसे कोई इस बात पर नियंत्रण रखेगा और रोज-रोज अपने मीटर को देखेगा कि 400 यूनिट से ज्यादा बिजली की खपत तो नहीं हो गई है। यह यथार्थवादी बात नहीं है। होना तो यह चाहिये कि जो वायदा केजरीवाल की पार्टी ने किया था उसे पूरा करना चाहिये और सभी लोगों के बिजली बिलों को आधा करवा देना चाहिये।
अब गर्मियां आ रही हैं। दिक्कत अब गर्मियों में  और अधिक बढ़ जाएगी। हाल हाल तक केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी और हरियाणा में हुड्डा की कांग्रेस सरकार थी। परन्तु आए दिन हरियाणा दिल्ली का पानी यह कहकर रोक देता था कि उसके पास यथेष्ठ मात्रा में पानी नहीं है। वह अपने किसानों को तो सिंचाई के लिए पानी दे ही नहीं सकता है। अत: दिल्ली को वह कैसे पानी दे? अब जबकि हरियाणा में 'भाजपाÓ की सरकार है और दिल्ली में 'आपÓ पार्टी की सरकार तो यह निश्चित है कि दोनों सरकारों में टकराव होगा और दिल्ली की जनता पानी के लिए तरस जाएगी। फिर प्रति परिवार को 700 लीटर प्रतिमाह मुफ्त पानी देने की बात हो रही है। यदि किसी कारणवश किसी के पानी का मीटर यह दिखाए कि उस व्यक्ति ने 701 लीटर पानी की खपत की है तो उसे पूरा पैसा देना होगा। सवाल यह है कि अधिकतर पानी के मीटर दोषपूर्ण हैं और कैसे कोई पता लगा सकेगा कि खपत 700 लीटर है या 701 लीटर। इसमें भी व्यावहारिक रुख अपनाना होगा।
केजरीवाल अनेक स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाने की बात तो करते हैं। परन्तु इसके लिए जमीन चाहिए और जमीन तो डीडीए के पास ही है जो केन्द्र सरकार के अधीन है। डीडीए आसानी से दिल्ली सरकार को जमीन नहीं देगा। फिर इतने सारे मकान बनाने के लिए पैसा कहां से आएगा? यदि जनता पर टैक्स लगाया गया तो भारी हो-हल्ला और हंगामा होगा। लोग कहते हैं कि सत्ता में आने के बाद लोगों की न•ार बदल जाती है। शपथ ग्रहण समारोह में ही केजरीवाल ने कहा था कि जैसे ही वे गाड़ी से उतरते हैं, विभिन्न टीवी चैनलों के रिपोर्टर माईक उनके सामने लगाते हुए पूछते हैं कि अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन आप कब तक करेंगे? उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को जनता ने पांच साल का जनादेश दिया है इसलिए कोई हड़बड़ी नहीं है। यह जानकर सभी भौंचक्के रह गये। इसके अतिरिक्त मीडियाकर्मियों के साथ दिल्ली के सचिवालय में जो दुव्र्यवहार हुआ और जिस तरह उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया प्रेस कांफ्रेंस गुस्से में छोड़कर चले गए उसके कारण केजरीवाल सरकार मीडिया में अकारण ही अलोकप्रिय हो रही है।
सच यह है कि अरविन्द केजरीवाल सरकार की राह में कांटे बिछे हुए हैं। दिल्ली की जनता सांस रोककर यह प्रतीक्षा कर रही है कि वह किस प्रकार दिल्ली की समस्याओं का समाधान करती है।     
(लेखक पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत हैं)

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