इस्लामिक देशों में हिंसा

एल.एस. हरदेनिया : वैसे तो इस्लाम शांति व सद्भाव का धर्म माना जाता है परंतु रमजान के माह में इस धर्म की पवित्रता और उच्च आदर्शों के प्रति विशेष ध्यान दिया जाता है। इस्लाम के अनुयायी माहभर रोजा रखते हैं। रोजा रखने के दौरान वे एक बूंद पानी भी नहीं पीते हैं। ...

एल.एस. हरदेनिया

वैसे तो इस्लाम शांति व सद्भाव का धर्म माना जाता है परंतु रमजान के माह में इस धर्म की पवित्रता और उच्च आदर्शों के प्रति विशेष ध्यान दिया जाता है। इस्लाम के अनुयायी माहभर रोजा रखते हैं। रोजा रखने के दौरान वे एक बूंद पानी भी नहीं पीते हैं। किसी चीज के खाने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं पर इतना नियंत्रण रखता है वह कभी हिंसक घटना कर ही नहीं सकता। रमजान के महीने में यह अपेक्षा की जाती है कि रोजा रखने वाला न सिर्फ हिंसा से दूर रहे वरन् हिंसक विचार भी अपने मन में न लाए।
परंतु आश्चर्य इस बात का है कि इन अपेक्षाओं के बावजूद अनेक मुस्लिम बहुल देशों से रम
जान के दौरान घटित हिंसक घटनाओं की रिपोर्ट आ रही है। इनमें से कुछ घटनाएं दिल दहलाने वाली हैं। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक रेस्तरां में आतंकवादियों ने हमला करएक भारतीय लडक़ी सहित 20 विदेशियों की धारदार हथियारों से हत्या कर दी और कई लोगों को बंधक बना लिया। इसी तरह की एक दर्दनाक क्रूरता से भरपूर घटना 22 जून को पाकिस्तान में हुई। 22 जून को कराची में दिन दहाड़े एक महान सूफी गायक की हत्या कर दी गई। जिस गायक की हत्या की गई उनका नाम अमजद साबरी है। उनकी ख्याति न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि दुनिया के महान गायकों में थी। वे सूफी दर्शन से जुड़ी कव्वालियां गाते थे। जब वे अपना गायन पेश करते थे तो हजारों श्रोता मंत्रमुग्ध होकर उनके गायन को सुनते थे। 22 जून को साबरी अपने एक मित्र के साथ कराची के भीड़ भरे इलाके से गुजर रहे थे तभी दो मोटरसाइकिल सवार युवकों ने उनके वाहन पर गोलियां दागीं। इन अज्ञात हमलावरों ने अमजद साबरी को निशाना बनाया। वे स्वयं कार चला रहे थे। दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। थोड़े समय बाद साबरी की मौत हो गई और कुछ समय बाद उनके साथी की भी मृत्यु हो गई। घटना के कुछ समय बाद तालिबान के एक गुट ने साबरी की हत्या की जिम्मेदारी ली। तालिबान के एक प्रवक्ता ने यह कहा कि हां, हमने साबरी को मारा है क्योंकि वे ईश्वर-विरोधी थे।
यहां यह उल्लेखनीय है कि अमजद साबरी के पिता गुलाम फरीद साबरी भी एक महान सूफी गायक थे। दूसरे दिन साबरी के जनाजे को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके जनाजे में लगभग तीस से पैंतीस हजार लोग शामिल हुए। मैंने स्वयं पाकिस्तान की प्रसिद्ध लेखिका •ााहिदा हिना से बात की। उनका कहना था कि पाकिस्तान के सभी समझदार नागरिकों ने साबरी की हत्या के लिए आंसू बहाए हैं। उन्हें उनके पिता की कब्र के पास ही दफनाया गया। साबरी के जनाजे में जो लोग शामिल हुए उनमें पाकिस्तान की राजनीति, फिल्म, कला, साहित्य और उद्योग की बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल थीं। साबरी की हत्या के कुछ दिन पूर्व बांग्लादेश में भी एक पैंसठ साल के सूफी संत की हत्या की गई। उसके कुछ दिन पहले बांग्लादेश में ही उदार विचारों के धनी एक प्रोफेसर की हत्या की गई थी। इन दोनों हत्याओं की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी जो इस समय सारी दुनिया में कहर मचाए हुए है।
क्रूरता की ये घटनाएं उस समय चरम पर पहुंच गईं जब पाकिस्तान की एक मां ने 20 जून को अपनी गर्भवती बेटी की हत्या की। 21 जून को अफगानिस्तान में 25 लोगों की हत्या की गई, इनमें भारत के दो नागरिक भी शामिल थे। 19 जून को बांग्लादेश में एक लडक़ी की हत्या कर दी गई। 17 जून को बांग्लादेश में ही एक ऐसे व्यक्ति की हत्या कर दी गई जो धर्मनिरपेक्ष विषयों पर किताबें छापता था। 8 जून को इस्तांबुल में 11 लोग एक बम विस्फोट की घटना में मारे गए।जोर्डन में पांच बेकसूर लोगों को एक आतंकी हमले में मार दिया गया। यह घटना शरणार्थियों के एक कैंप के सुरक्षा दफ्तर में हुई।  7 जून अफगानिस्तान में एक अमरीकी पत्रकार और उसके साथ रहने वाला उनका अनुवादक मारा गया। पाकिस्तान में ही एक पुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई। बांग्लादेश में बलात्कार का विरोध करने पर एक महिला की हत्या हुई। अमेरिका में 14 जून को एक मुस्लिम व्यक्ति ने अनेक लोगों की हत्या कर दी। जो मारे गए वे सभी ऐसे नागरिक थे जिनका किसी भी धर्म या समाज से विरोध नहीं था। 13 जून को पाकिस्तान में एक टीवी शो चल रहा था। इस शो में ऑनरकिलिंग के विषय पर बातचीत हो रही थी। इस बातचीत में पाकिस्तान के एक महत्वपूर्ण सिनेटर शामिल थे। कार्यक्रम की संचालिका ने जब कुछ ऐसे प्रश्न पूछे जो उन्हें अच्छे नहीं लगे, इस पर इन सिनेटर महोदय ने स्टूडियो के भीतर ही उस महिला एंकर की पिटाई कर दी, जिसे उस शो के दर्शकों ने भी देखा। पाकिस्तान में एक हिंदू की इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि उसने इफ्तार के पहले खाना खाने का प्रयास किया था। 8 जून को बांग्लादेश में एक मंदिर के पुजारी की बिना कारण हत्या कर दी गई। 21 जून को अफगानिस्तान में 14 नेपाली मारे गए। इन सबकी हत्या की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली।
इसी दरम्यान यह खबर आई है कि हिंदू और सिख अफगानिस्तान को छोडक़र भाग रहे हैं। यह सिलसिला रमजान के महीने में भी चालू है। वैसे भी अनेक मुस्लिम देशों में इस्लामिक स्टेट ने कहर मचाकर रखा है और इस कहर के सबसे ज्यादा शिकार मुसलमान ही हो रहे हैं। सबने उम्मीद की थी कि कम से कम रमजान के महीने में हिंसक घटनाओं का सिलसिला थमेगा परंतु यह अपेक्षा भी निराशा में बदल गई।साबरी की हत्या की निंदा पाकिस्तान के सभी राजनैतिक दलों के नेताओं और समाज के अन्य प्रमुख लोगों ने भी की है।  इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के प्रवक्ता नईम-उल-हक ने यह आरोप लगाया कि कराची में कोई सुरक्षित नहीं है। वहां के एक और प्रमुख नागरिक वसीम अख्तर ने कहा है कि कराची में बाहुबलियों का राज है। बाहुबलियों के अनेक संगठन प्रतिबंधित हैं परंतु वे खुलेआम कराची की सडक़ों और गलियों में आपको ढूंढते मिल जाएंगे।


 

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