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  रोज़मर्रा की ज़िन्दगी से लिए गए रोचक वाकिये
 
२६ जनवरी
Posted By : Tarushikha
Posted On : (02:17:26 AM) 31, Jan, 2010, Sunday
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हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली के जिस अपार्टमेन्ट में मैं रहती हूँ, गणतंत्र दिवस मनाने का निश्चय किया गया.
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A Delhi Metro Voyage
Posted By : Priyanka.singhal
Posted On : (11:22:57 AM) 20, Dec, 2009, Sunday
Comments ( 0 )
Remember the last time you went by taking Delhi Metro?? Remember the last time you were standing on a metro station and leaning forward to see the metro approaching??
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दोनों बीवी राजी, क्या करेगा काजी?
Posted By : Dr. Purushottam Meena
Posted On : (12:10:38 PM) 29, Nov, 2009, Sunday
Comments ( 1 )
दुर्भाग्य है, इस देश का और इस देश की स्त्रियों का कि आज 21वीं सदी में भी कानून उसी प्रकार से काम कर रहा है, जैसे कि 17वीं और 18वीं शताब्दी में करता था।
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धारा 151 संविधान के खिलाफ!
Posted By : Dr. Purushottam Meena
Posted On : (08:49:24 AM) 18, Nov, 2009, Wednesday
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राज ठाकरे की पार्टी की मान्यता रद्द होनी च
Posted By : Dr. Purushottam Meena
Posted On : (04:59:58 AM) 12, Nov, 2009, Thursday
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छठ : अर्थों की अधिकता और सार्थकता
Posted By : Tesuashish
Posted On : (10:13:26 AM) 22, Oct, 2009, Thursday
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भारतीय लोक पर्वों की अपनी विशेषता है। खासकर छठ जैसे पर्वों की। जिसमें समाज के सभी वर्गों की समान भागीदारी होती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि छठ जैसे लोकपर्व में भी कर्मकांडों का समावेश किया जा रहा है- जैसे मंत्र, पुरोहित और पूजा विधि। दरअसल छठ के लिए ऐसा कुछ भी अनिवार्य नहीं है।
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वट सावित्री का व्रत
Posted By : Tarushikha
Posted On : (01:19:59 AM) 26, May, 2009, Tuesday
Comments ( 4 )
मुझे आजतक इस तरह के व्रतों का औचित्य समझ में नहीं आया
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इसका इलाज क्या है?
Posted By : Ajai Singh
Posted On : (05:37:48 AM) 03, Jul, 2009, Friday
Comments ( 1 )
सभी की एक ही कहानी है की उनका पति बहुत शराब पीता है
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आया मुझे फिर याद वो गालिब...
Posted By : Sudhir kumar
Posted On : (04:58:15 AM) 24, Jun, 2009, Wednesday
Comments ( 1 )
बात कहां से शुरू करूं यही सोच रहा हूं। हां, याद आया। अभी कुछ दिनों पहले मैं बस में यात्रा कर रहा था। पीछे की सीट मिली। बैठ गया। बस चली भी नहीं थी कि, एक बुजुर्ग धोती-कुर्ते में पोते के साथ बस पर चढ़े। उनको बस तक छोडऩे के लिए उनके घर वाले भी आए थे। एक बच्चा भी था साथ में।
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ईमानदारी
Posted By : Sudhir kumar
Posted On : (03:59:29 AM) 12, Jun, 2009, Friday
Comments ( 1 )
ऑटोवाले की ईमानदारी बात पिछले दिनों की है। मैं ऑफिस से लेट निकला। दस बजे के बाद की बात है।
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