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तत्कालीन अथवा ज्वलंत मुद्दों पर खुले विचारों का संसार
हिन्दी जगत में लेखक व पाठक
Posted By :
Lalit Surjan
.
Posted On :
(12:44:03 PM)
23, Feb, 2010, Tuesday
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( 2 )
हिन्दी के अध्यापक, समीक्षक व संपादक- सबने अपने-अपने प्रभामंडल स्थापित कर लिए हैं और उसमें बहुत कठिन साधना के बाद ही किसी नए व्यक्ति को प्रवेश मिल पाता है।
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समाज का आइना है दलित साहित्य
Posted By :
Sanjeevkhudshah
.
Posted On :
(11:50:47 AM)
13, Feb, 2010, Saturday
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( 2 )
साहित्य की सर्वमान्य परिभाषा यही रही है कि ''साहित्य वही है जो समाज के यर्थात का चित्रण करे, समाज को समाज के सत्य से परिचित कराये।`` इसीलिए साहित्य को समाज का प्रतिबिन्ब भी कहा जाता है। मेरे दिमाग में यह प्रश्न हमेशा कौंधता था कि दलित साहित्य की स्वीकारोक्ति पर विवाद क्यों?
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बाबा की अथाईं और बाबा का ही न्याय
Posted By :
Dr. Purushottam Meena
.
Posted On :
(09:39:41 AM)
12, Dec, 2009, Saturday
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( 0 )
आदिवासी गाँवों में पंचों द्वारा संयुक्त रूप से बैठकर जिस स्थान पर पंचायत कर स्थानीय मामलों में निर्णय लेकर न्याय किया जाता है, उस स्थान को स्थानीय बोली में अथाईं कहा जाता है और गाँव में बड़े-बुजर्गों को सम्मान सूचक सम्बोधन ''बाबा'' कहकर बुलाया जाता है।
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इन्दिराजी जैसे दृढ़प्रतिज्ञ व्यक्तित्व व&
Posted By :
Dr. Purushottam Meena
.
Posted On :
(09:45:01 AM)
15, Nov, 2009, Sunday
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( 0 )
मानव मनोविज्ञान का सुस्थापित सिद्धान्त है कि किसी भी हीन या संकीर्ण या संकुचित भावना से ग्रस्त व्यक्ति या समाज के लोगों की मनोग्रंथियों को आसानी से अन्य लोगों के प्रति नकारात्मक एवं आक्रामक बनाया जा सकता है। महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार ने शुरु से यही किया है। केवल इतना ही नहीं, बल्कि इस देश में विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, आरएसएस, दुर्गावाहिनी, श्रीराम सेना आदि तथाकथित धार्मिक ठेकेदार संगठन और इन्हें संरक्षण देने वाले इनके राजनैतिक आका भी तो यही करते रहते हैं।
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Maharashtra�s Old Ages Devils...
Posted By :
Sanjay vatsa
.
Posted On :
(05:13:43 AM)
11, Nov, 2009, Wednesday
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( 0 )
Political Drama of Maharashtra
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अब कौन कहेगा दिल्ली को गरीब नवाज़
Posted By :
Naushad Ahmad
.
Posted On :
(04:47:26 AM)
09, Nov, 2009, Monday
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अमेरिका की लाजवाब सुरक्षा नीति पर हाय तौबा क्यूं ?
Posted By :
Sanjeevkhudshah
.
Posted On :
(11:25:28 AM)
19, Oct, 2009, Monday
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( 1 )
भारत में बड़ी जबरजस्त परंपरा है जिसकी सुरक्षा में आदमी लगे हो उसकी सुरक्षा जांच नही होती। जब कोई हवाई जहाज से आये तो उसकी जांच नही होती। जब कोई ट्रेन के वातानुकूलित डिब्बे से उतरे तो उसकी जांच नही होती।
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अफीम की पिनक
Posted By :
Lalit Surjan
.
Posted On :
(11:55:15 AM)
04, Oct, 2009, Sunday
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( 1 )
इन दिनों जो फिल्में व टीवी कार्यक्रम आ रहे हैं, उन्हें मोटे तौर पर निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:- 1. हॉलीवुड की वे फिल्में जिन्हें पहले सामान्यत: स्टंट फिल्मों के नाम से जाना जाता था
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बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त किसानो को सीधी सहायता मिले : संजय पाण्डेय
Posted By :
Shibbubhai
.
Posted On :
(11:35:13 AM)
08, Sep, 2009, Tuesday
Comments
( 0 )
सूखा राहत के नाम पर विभिन्न योजनाओ में जमकर बन्दर बाँट होता है , इसलिए पात्र किसानों को समय से और उचित मात्रा में राहत राशिः नही पहुँच पाती है।
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BJP'S Pseudo Intellectualism !
Posted By :
Sanjay vatsa
.
Posted On :
(02:16:59 AM)
21, Aug, 2009, Friday
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( 1 )
Now it is said that Adavani would be much egger too to write a book on Jinna by influencing Pseudo Intellectualism and that day…
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