महिलाओं के प्रति रवैया... रक्षाबंधन पर के दिन जब एक युवती तिपहिया से जाने की प्रतीक्षा में थी तभी एक ऑल्टो सवार लोगों ने उसे दबोच लिया। शुक्र है कि लोगों का जमीर जागा और उस युवती को दरिंदों के हाथ लुटने से बचा लिया गया। यह ठीक उसी दौरान हो रहा था जब एक सुरक्षित रेलयात्रा की उम्मीद से लेडीज स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही थी। रक्षाबंधन पर चली महिला स्पेशल ट्रेन निं:सेदह एनसीआर की महिलाओं के लिए किसी तोहफे से कम नहीं कही जा सकती। लंबे अरसे इसकी मांग की जा रही है कि स्थानीय रेलगाडिय़ों में महिला कोच की स्थिति सुधारी जाए। पुरूषों द्वारा महिला कोच में यात्रा, महिला कोच में असुरक्षा की भावना रहती है वहीं गर्मी के दिनों में पंखों की दयनीय हालत, बरसात में पानी की बौछारों की बेरोक आवाजाही और सर्दी में खिड़कियों से सीधी कलेजे को चीरने वाली हवा भी स्थानीय रेलगाडिय़ों में सफर करने वाली महिलाओं के लिए परेशानी का सबब है। यहां चल रही स्थानीय रेलगाडिय़ों की रखरखाव पर चर्चा की बजाय यदि शहर में महिलाओं के लिए दूसरे परिवहन साधनों पर चर्चा करें तो पता चलता है कि महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन साधनों की कमी स्पष्ट है। तिपहिया चालकों पर महिलाओं को भरोसा नहीं है तो कई हादसे इसकी ठोस वजह भी हैं। सरकारी बसें बेहतर हैं लेकिन यहां भी सट कर छेड़छाड करने वालों की कमी नहीं है। बाकी बची मेट्रो तो यह अभी तक किसी नकारात्मक वजह से चर्चा में नहीं है। लेकिन रिंग रेल सहित सभी मौजूद साधनों में महिलाओं को सुरक्षित यातायात पर ध्यान आवश्यक जरूर है। संदेह नहीं कि अस्ट्रेलियाई नागरिक का बलात्कार करने व हत्या की घिनौनी वारदात करने वाले टैक्सी चालक को सजा देने से संदेश सख्त जाएगा लेकिन सुरक्षित, आरामदेय महिलाओं के लिए परिवहन साधनों की कमी को कम से कम अब तो दूर करने की दिशा में तेजी से कदम उठाने चाहिए। रेलवे की भी यह जिम्मेदारी जरूर है कि वह स्टेशन के आसपास खड़े होने वाले अराजक तत्वों को हटाने में स्थानीय पुलिस, प्रशासन के सहयोग से आगे आए और एक सकारात्मक पहल करे...।
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