आगरा बाजार सूना हो गया...चरण दास चोर अनाथ हो गया...और उसी के साथ अनाथ हो गए नाटक के चाहने वाले हज़ारों लोग...अब कोई उन्हें बाज़ार का सच नहीं दिखायेगा... क्योंकि नाटक के जरिए सच का आईना दिखाने वाले हबीब तनवीर नहीं रहे... बीमारी के बाद हबीब तनवीर का भोपाल में निधन हो गया....क्या थी हबीब तनवीर की सबसे बड़ी खासियत...सोचता हूं तो लगता है कि हबीब तनवीर की सबसे बड़ी खासियत यही थी की उन्होंने आम आदमी की शक्ति को पहचाना.... हबीब तनवीर के नाटकों के कथ्य और अभिनेता दोनों कभी भी इलीट नहीं रहे...छत्तीसगढ़ जैसे पिछड़े राज्य से आए तनवीर ने लोक कला को अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापीत किया...जब सभी लोग बड़े-बड़े स्टारों को लेकर नाटक का मंचन करने में जुटे रहे ठीक उसी समय हबीब तनवीर ने लोक कलाकारों को मंच पर लाकर जैसे आभिजात्य को बड़ी चुनौती पेश कर दी... यों तो हबीब तनवीर ने इंग्लैंड जाकर अभिनय और निर्देश का प्रशिक्षण लिया थे लेकिन थे खांटी देशी...उनके नाटक इसकी गवाही देते हैं....आम लोगों से जुड़े विषयों को नाटक का कथ्य बनाना और उतने ही सीधे-साधे तरीके से उसे पेश कर देना यही सबसे बड़ी खासियत थी हबीव तनवीर की.... नया थियेटर की स्थापना करने वाले हबीब तनवीर ने सचमुच भारतीय थियेटर जगत को नयापन दिया...मिट्टी की गाड़ी अब रुक गई है...थम गई है...क्योंकि हबीब तनवीर की सांसे थम गई है...लेकिन ये भी सच है कि जिंदगी कभी रुकती नहीं...और शायद तनवीर साहब को भी ये पंसद न आए की शो रुक जाए...शायद वो दुनिया के पर्दे के पीछे बैठकर देख रहे हों कि अब कौन उनके चरण दास चोर को गले लगाता है...कौन फिर से आगरा बाज़ार को सजाता है... |