मृत्युंजय शिवाजी सामंत की एक कालजयी कृति है. कर्ण की नज़र से महाभारत के पूरे घटनाक्रम को देखना खलनायकों की एक दूसरी छवि प्रस्तुत करता है. आम तौर पर खलनायक बस एक बुरा व्यक्ति होता है जिसमें आम मानवीय भावनाएं नहीं होती हैं. मृत्युंजय इस मिथक को तोड़ते हुए वह पक्ष उजागर करता है जो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हर बात सिर्फ ब्लैक और व्हाइट में नहीं होती बल्कि हर खलनायक के पीछे शायद कोई महानायक ही होता है. इतना सब वर्णित करते हुए भी यह उपन्यास बुराई को महिमामंडित नहीं करता. बुरे का अंत बुरा ही होगा, यह निश्चल सत्य दिखाता है. पूरे उपन्यास में कर्ण का आत्मवर्णन मुख्यतः है, उसके अलावा कृष्ण, कुंती, दुर्योधन, द्रौपदी आदि के भी आत्मवर्णन हैं जो बहुत खूबसूरती से लिखे गए हैं. |