चिन्मय मिश्र
चिन्मय मिश्र

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चिन्मय मिश्र

खतरनाक होती पत्रकारिता
माननीय अब तो उठिए एक नदी डूब गई है
शिक्षा को शिक्षा ही रहने दो
कुछ देर के लिए समय को थाम लें
कृषि क्यों मांग रही बलिदान
एक जीवंत समाज संस्कृति व सभ्यता का घट श्राद्ध
यह महज खतरे की घंटी नहीं है
कुंठा छुपाती नर्मदा सेवा यात्रा
हिंसा की निरंतरता  बिल्किस बानो और ज्योति सिंह के लिए अलग-अलग चश्मे
मारिये मरिए और चुनाव लड़ते रहिए
आगे पाठ पीछे सपाट
कश्मीर  असंभव नहीं है समाधान
संविधान ही सर्वोच्च है
मयखानों में मचती खलबली
दोराहे पर खड़ी पत्रकारिता