चिन्मय मिश्र
चिन्मय मिश्र

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चिन्मय मिश्र

जिंदगी राम का बनवास लगे
पकौड़े सा तला जा रहा समाज
सम्मान और रोजगार से बेदखल होती महिलाएं 
न्याय की सुरंग में उम्मीद का उजाला
जानलेवा होती शिक्षा
अतीत जीवियों का वर्तमान
बाबाओं की बांबियों में कैद महिलाएं
एक शिष्ट राजनीति की सुगबुगाहट
हिंसा का नया कालखंड
पद्मावती अतीत नहीं वर्तमान में खोजिए
क्वाड  त्रिकोण का चौथा कोण
इंस्पेक्टर मातादीन चांद से लौट आए हैं
रोशनी में छाया अंधेरा
बूंद नहीं है तो समुद्र भी नहीं है
रोजगार की खोज में भटकती अर्थव्यवस्था